कोरोना वायरस: अलवर में पहली बार करणी माता का मेला स्थगित, बाला किला की वादियों में नहीं गूंजेगा, 'जय माता दी'

Karni Mata Mela : बाला किला स्थित करणी माता मंदिर में चेत्र नवरात्र के मेले को स्थगित कर दिया गया है।

By: Lubhavan

Published: 19 Mar 2020, 03:01 PM IST

अलवर. देश भर में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के उपायों के बीच बुधवार को अलवर में चैत्र नवरात्र में बाला किला परिसर स्थित करणीमाता मंदिर पर भरने वाला लक्खी मेला जिला प्रशासन व मेला कमेटी के बीच चर्चा के बाद स्थगित कर दिया गया। इस निर्णय के बाद हर साल करणीमाता मेले पर बाला किला परिसर स्थित मंदिर पर लगनी वाली श्रद्धालुओ की कतार दिखाई नहीं देंगी और न ही बाला किला परिसर में माता के जयकारें गूंज सकेंगे।

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी एडवायजरी की करणीमाता मेले में पालना को लेकर जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला कलक्टर इन्द्रजीत सिंह की अध्यक्षता में कलक्टर कार्यालय में करणी माता मेला आयोजन समिति व चक्रधारी हनुमान मन्दिर आयोजन समिति के पदाधिकारियों की बैठक हुई।

सर्वसम्मति से किया मेला स्थगित करने का निर्णय

बैठक में मेला मजिस्ट्रेट एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर उत्तम सिंह शेखावत, करणी माता मन्दिर पुजारी धनश्याम दास शर्मा व चक्रधारी हनुमान मन्दिर मेला समिति के अध्यक्ष लक्ष्मणराम सैनी तथा मेला आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर करणी माता मन्दिर के मुख्य पुजारी धनश्याम दास शर्मा ने कहा कि विश्वव्यापी महामारी के प्रकोप से बचाव के लिए जनहित में सर्वसहमति से अबकी बार नवरात्रा में करणी माता मेले के आयोजन को स्थगित किया जाना जरूरी है। इसी तरह चक्रधारी हनुमान मन्दिर मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष लक्ष्मणराम सैनी ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम और सरकार की ओर से जारी निर्देशों के तहत जनहित में सर्वसहमति से यह निर्णय किया गया कि इस बार करणी माता मेले का आयोजन स्थगित रखना जनहित में होगा। बैठक में उपस्थित मेला आयोजन समिति के सभी सदस्यों ने कोरोना वायरस के संक्रमण को शहर में फैलने से रोकने और राज्य सरकार की एडवाइजरी की पालना में 25 मार्च से 2 अप्रेल तक नवरात्रा में आयोजित होने वाले करणी माता मेले को सर्वसहमति से स्थगित करने का निर्णय किया।

सरकार की एडवायजरी 50 से ज्यादा लोग नहीं हो एकत्र

जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला कलक्टर सिंह ने कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों से अवगत कराते हुए बताया कि इस महामारी के संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरा विश्व चिंतित है। इसको लेकर केन्द्र और राज्य सरकार बहुत गम्भीर है और सरकार की ओर से महामारी के प्रकोप की रोकथाम के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। जिसमें प्रमुख रूप से आमजन से सतर्कता के साथ 50 से अधिक व्यक्तियों को एक स्थान पर एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि करणी माता मेले में बड़ी संख्या में श्रृद्धालु आते है।ं इससे कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की संभावना उत्पन्न हो सकती है।अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर एवं मेला मजिस्टे्रट शेखावत ने बताया कि बैठक में आयोजन समिति के सदस्यों को कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों एवं राज्य सरकार की ओर से 50 से अधिक व्यक्तियों को एक स्थान पर एकत्रित नहीं होने के संबंध में जारी एडवाइजरी की पालना में मेला समिति के उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसहमति से इस बार करणी माता मेले के आयोजन को स्थगित करने का निर्णय किया है।वर्ष 1984 से भरता है लक्खी मेला बाला किला स्थित करणी माता का मंदिर पूर्व महाराजा बख्तावर सिंह ने 1795 से 1815 के मध्य बनवाया था। पहले यहां मेला नहीं भरता था। वर्ष 1984 में तत्कालीन जिला कलक्टर अरविंद मायाराम के समय यहां मेला भरने की शुरुआत हुई। इसके बाद से मेला लगातार लग रहा है, उसके बाद मेले को कभी स्थगित नहीं किया गया। इस साल पहली बार करणीमाता मेले को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए स्थगित किया गया है। पूर्व महाराजा बख्तावर सिंह ने बीकानेर की करणी माता के मंदिर की तर्ज पर अलवर में करणी माता का मंदिर बनवाया था।

40 साल से लगातार भर रहा मेला

जिले में करणी माता का लक्खी मेला प्रतिवर्ष नवरात्र में भरता है। पिछले 40 सालों से यहां मेला लगातार भरता रहा है। कभी भी मेले को स्थगित करने के हालात नहीं बने, लेकिन इस बार कोरोना वायरस की समस्या के चलते जनहित में मेले को निरस्त करने का निर्णय किया गया है।

करणीमाता मेला स्थगित, जिले के शेष मेलों में यही पहल जरूरी

बाला किला करणी माता मंदिर के पुजारी उमेश शर्मा का कहना है कि जिला प्रशासन की सलाह व सरकार की एडवायजरी के कारण करणी माता के मेला स्थगित कर दिया है, लेकिन नवरात्रों के दौरान शहर व जिले में अन्य देवी मंदिरों में भी मेले भरते है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए उन मंदिरों में भी भीड़ एकत्र नहीं हो, ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए। गौरतलब है कि नवरात्रों में मालाखेड़ा बाजार स्थित वैष्णो माता मंदिर, सागर स्थित मनसा माता मंदिर, हजारी का मोहल्ला स्थित काली माता मंदिर मूंगस्का स्थित सती माता मंदिर, बस स्टैंड स्थित चिंतपूर्णी माता मंदिर तथा जिले में धोलागढ़ व बहरोड़ में दहमी सहित जिले में कई स्थानों पर मेले भरते हैं।

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