बहरोड़ से डॉ. जसवंत यादव सरकार मे रहे श्रम मंत्री, लेकिन अपने ही क्षेत्र के युवाओं को नहीं दिला पाए रोजगार, मंत्री जसवंत यादव जानिए रिपोर्ट कार्ड

बहरोड़ से डॉ. जसवंत यादव सरकार मे रहे श्रम मंत्री, लेकिन अपने ही क्षेत्र के युवाओं को नहीं दिला पाए रोजगार, मंत्री जसवंत यादव जानिए रिपोर्ट कार्ड

Hiren Joshi | Publish: Nov, 10 2018 11:32:44 AM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 11:32:45 AM (IST) Alwar, Alwar, Rajasthan, India

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विधानसभा चुनाव नजदीक आए तो प्रमुख राजनीतिक दलों को एक बार फिर से क्षेत्र के विकास की चिंता सताने लगी है। जबकि राठ की राजनीति में अग्रणी रहे बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र में बीते पांच वर्ष में स्वास्थ्य, शिक्षा, पार्किंग, जाम की समस्या, कानून व्यवस्था की स्थिति, सफाई, मंडी एवं सडक़ों की हालत में ज्यादा सुधार नहीं दिख पाया। गांव व कस्बों में अधिकांश जन समस्याएं मुंह बाएं खड़ी है। हालांकि गत विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों ने विकास के ढेरों वादे किए, लेकिन इनकी याद राजनीतिक दलों को पांच बीत जाने के बाद आई।

बहरोड़ में 79 लाख की राशि के कार्य अटके

बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र में विधायक कोटे से बीते पांच साल में 10 करोड़ 75 लाख की राशि आवंटित हुईं। इसमें से विधायक डॉ. जसवंतसिंह यादव ने अभिशंसा तो पूरी राशि की कर दी, लेकिन विधानसभा चुनाव की घोषणा से ऐन पहले की गई अभिशंसा चुनाव आचार संहिता की परिधि में आ गई। इस कारण बहरोड़ क्षेत्र की 7925000 राशि के विकास कार्यों की अभिशंसा को वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल सकी। अब ये विकास कार्य विधानसभा चुनाव बाद हो पाएंगे। विधानसभा चुनाव देख प्रमुख राजनीतिक दलों व प्रमुख प्रत्याशी फिर से विकास के राग अलापने लगे हैं। गत विधानसभा चुनाव 2013 की स्थिति देखे तो क्षेत्र के विधायक डॉ.जसवंत यादव ने बहरोड़ या नीमराणा को जिला बनाने, बड़े कस्बों को नगर पालिका बनाने, बहरोड़ मे सीवरेज डलवाने का मुख्यत: वादा किया था, लेकिन पांच साल का कार्यकाल बीतने के बाद भी इनमें से ज्यादा वादे पूरे नहीं हो पाए। खास बात यह कि इन वादों को पूरा कराने के प्रयास भी आधे अधूरे ही दिखाई दिए। विपक्ष के रूप में कांग्रेस की भूमिका भी क्षेत्र में कमजोर रही है। गत विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी बलजीत यादव ने जरूर क्षेत्र की समस्याओं को लेकर बीच- बीच में विरोध प्रर्दशन किए। बहरोड़ क्षेत्र की टीस है कि सरकार में भागीदारी के बाद भी न तो जिले की सौगात मिल पाई और न ही विकास की राह खुल पाई।

 

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