अलवर उपचुनाव के दौरान बच्चों की समस्याओं पर नहीं किसी का ध्यान

हम वोटर नहीं तो क्या हुआ, परेशानियां तो हमारी भी है

By: Jyoti Sharma

Published: 20 Jan 2018, 10:03 PM IST



अलवर. कुछ ही दिनों में अलवर में उपचुनाव होने वाले हैं। चुनाव प्रचार के लिए नेताओं के दौरे चल रहे हैं। ये लोग बडे़ लोगों से ही बात कर उनकी समस्याएं जान रहे हैं। लेकिन इस बीच छोटे बच्चों की समस्याओं की ओर किसी का ध्यान ही नहीं है।

जबकि आने वाले भविष्य में ये छोटे बच्चे ही देश का भविष्य तय करेंगे। भले ही 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे इस बार वोट नहीं डाल पाए। लेकिन यदि इनकी समस्याओं को नजर अंदाज किया गया तो आने वाले दिनों में ये अपने मत से किसी भी सरकार को नीचे से ऊपर उठा सकते हैं और ऊपर से नीचे गिरा सकते हैं। छोटे बालकों की भी अपनी परेशानियां हैं। जिन पर सरकार और प्रशासन का ध्यान होना जरूरी है।पत्रिका टीम ने बालकों से बातचीत कर इनकी परेशानी जानी।


हमारे शहर में एक भी अच्छा खेल का मैदान नहीं है। हमें खेलने में परेशानी आती है। यदि अच्छे खिलाड़ी चाहिए तो खेल की सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। कॉलोनियों में पार्क में खेलना पड़ता है। स्कूलों के भी यही हालात है।

सुरेंद्र सिंह चौहान, विद्यार्थी

शहर के अधिकतर पार्को में गंदगी रहती है। आवारा पशु आ जाते हैं। कहीं झूले टूटे पडे़ हैं कहीं लाइट नहीं है। जबकि पार्क अच्छे होना बहुत जरूरी है। खराब झूलें आदि की वजह से कई बार मेरे चोट भी आ चुकी है। समय रहते इनको सही करवाना चाहिए।


जतिन चौधरी, विद्यार्थी
सरकार को बच्चों का बिलकुल भी ख्याल नहीं है। हमारे स्कूल का समय बढ़ा दिया है। हम करीब तीन बजे तक घर पहुंचते हैं जबकि पहले हम एक बजे ही घर पहुंच जाते थे। इससे ना तो खेलने का समय मिल रहा है और ना ही कोचिंग जाने का।


श्रद्धा कुमारी , विद्यार्थी
सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा में आगे बढ़ाने के लिए बहुत से पुरस्कार दिए जाते हैं। सीबीएसई स्कूल में पढ़ते हैं इसलिए ये पुरस्कार हमें नहीं मिलते। हम भी पढ़ाई में मेहनत करके आगे बढ़ते हैं

Jyoti Sharma
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