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भूमिहीन बेरोजगारों के लिए वैध माइंस जरूरी, स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को कलक्टर के जरिए भिजवाएगी प्रस्ताव…पढ़ें यह न्यूज

ग्रामीण क्षेत्र के गैर मुमकिन पहाड़ पर लीज जारी कर पट्टे देने की मांग का मामला, 1948 में लेबर कमेटी का हुआ था गठन।

अलवरJun 29, 2024 / 07:41 pm

Ramkaran Katariya

मालाखेड़ा. उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत जमालपुर के विभिन्न गांवों में गैर मुमकिन पहाड़ को वैध खनन के लिए पट्टे जारी कर भूमिहीन बेरोजगारों को रोजगार तथा सरकार को राजस्व की प्राप्ति के लिए स्पेशल इन्वेस्टीगेशन की गठित टीम कलक्टर को प्रस्ताव बनाकर भेजेगी। टीम की बैठक के दौरान ग्राम पंचायत जमालपुर सरपंच कुसमा देवी की ओर से इस मामले में एक प्रार्थना पत्र दिया गया था।
उपखंड अधिकारी मालाखेड़ा देवी सिंह की अध्यक्षता में हुई टीम की बैठक में थाना अधिकारी मालाखेड़ा हितेश कुमार शर्मा, तहसीलदार, नायब तहसीलदार व अधिवक्ता मौजूद रहे। पत्र में मांग की गई है कि मालाखेड़ा उपखंड के गांव सताना, मौडिया बिलंदी, बाढ़ बिलंदी, नांगल, बरखेड़ा, खेडला के पहाड़ से पहले खनन विभाग की ओर से रॉयलटी के स्वरूप रवना श्याम गंगा, बारा भड़कोल नाके पर लिया जाता था। वह अब बंद हो गया है, जिससे पत्थरों की तस्करी बढ़ गई और अवैध तरीके से पत्थर खनन हो रहे हैं। इस संबंध में पूर्व प्रधान शिवलाल गुर्जर, एडवोकेट भारत चौधरी, रतिराम, मंगतूराम, साधु चौधरी, मनीराम, पूर्व सरपंच राजेंद्र सिंह ने बताया कि भूमिहीन बेरोजगारों को रोजगार मिले, सरकार को राजस्व मिले, इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय भारत सरकार को कलक्टर के माध्यम से पत्र लिखकर वन क्षेत्र से बाहर गैर मुमकिन पहाड़ को लीज पर देकर जनहित के लिए कार्य किया जाए।
गौरतलब है कि भूमिहीन लेबर के आर्थिक उत्थान के लिए 1948 से पहले दी बारा क्वेरी लेबर कांट्रेक्टर के नाम से करीब 500 मजदूर ने इसका पंजीयन कराया था। उसके बाद से करीब 20 गांव के पहाड़ों से खनन कर मजदूर परिवार का पालन पोषण करने लगे। राजस्व रॉयल्टी के माध्यम से 2003 तक पत्थर खनन से वसूली कर सरकार के खजाने को भरते रहे, लेकिन यह संस्था बाद में राजनीति का शिकार बन गई और यह राजस्व वसूली बंद हो गई। तभी से अवैध खनन का कार्य हो रहा है। भूमिहीन मजदूर के हित के लिए फिर से इसे शुरू करने की मांग ने जोर पड़ा है।
बैठक में प्रस्ताव लिया

उपखंड अधिकारी देवीसिंह का कहना है कि जनवरी माह में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की थी। उसके बाद अब पेट्रोलियम मंत्रालय भारत सरकार से पत्र आया है, जिसमें चार बिंदु के आधार पर स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम की बैठक की, जिसमें थाना अधिकारी मालाखेड़ा, तहसीलदार, नायब तहसीलदार व अधिवक्ता मौजूद रहे। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय कर इसका प्रस्ताव कलक्टर के माध्यम से पेट्रोलियम मंत्रालय भारत सरकार को भेजने व पत्थर और बजरी को खनन विभाग के माध्यम से लीज पर जारी कर पट्टे देने की मांग की गई।

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