मत्स्य विश्वविद्यालय के हाल बेहाल, विद्यार्थी बेबस, जहां हाथ रखो वहां अनियमितता

Matsya University Alwar : अलवर के मत्स्य विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की परेशानियां आम हो चुकी हैं, किसी भी विभाग में काम ठीक तरीके से नहीं हो पा रहा।

अलवर. राजर्षि मत्स्य विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए युवाओं ने लंबे समय तक संघर्ष किया लेकिन यह संघर्ष एक लाख से अधिक युवाओं के लिए परेशानी का सबब बन गया है। राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय स्थापना से लेकर अब तक विद्यार्थियों ने राहत की सांस नहीं ली है। यहां की अव्यवस्थाएं विश्वविद्यालय की पहचान बन गई है। विश्वविद्यालय के पास पूरा स्टॉफ तक नहीं है। प्रशासनिक कार्य कला महाविद्यालय कन्या छात्रावास में चल रहा है। कक्षाओं के लिए पर्याप्त स्टॉफ नहीं है।

विश्वविद्यालय अभी तक किसी भी शैक्षिक सत्र का परीक्षा परिणाम समय पर जारी नहीं कर सका है। विश्वविद्यालय की कार्य शैली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इससे सम्बद्ध गैर सरकारी महाविद्यालयों में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है और ना ही इनमें पूरा स्टाफ है। कई महाविद्यालय 2 या 3 कमरों में ही चल रहे हैं। ऐसे महाविद्यालयों की मान्यता को हर साल बढ़ा दिया जाता है। अधीनस्थ महाविद्यालयों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की पीड़़ा को कोई समझने को तैयार नहीं है। यहां स्टॉफ की भर्ती के ढंग को लेकर कई बार सरकार को शिकायत की गई है। अनियमिताताओं को कई विधायक विधानसभा में उठा चुके हैं लेकिन समस्या ज्यों की त्यों हैं। बीते वर्षों में परीक्षाओं के कई प्रश्न पत्र पहले ही विद्यार्थियों के पास आते रहे हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलपति हैं जबकि रजिस्ट्रार का पद रिक्त है। ऐसे में विद्यार्थियों की समस्याएं कौन सुनेगा।

विद्यार्थी असहाय हैं

अलवर जिले के विद्यार्थी असहाय हैं। यहां कुलपति कार्यवाहक हैं तो रजिस्ट्रार तक नहीं है। कोई समस्याएं सुनने वाला भी नहीं है। जिले के विद्यार्थी असहाय हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय के सामने कई चुनौतियां है।
कुलदीप यादव, छात्रसंघ अध्यक्ष, राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर।

सपने जो पूरे नहीं हो सके

मत्स्य विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए हमने काफी लंबा संघर्ष किया। तब यह सोचा था कि अलवर में विश्वविद्यालय की स्थापना से युवा और उनके अभिभावक लाभान्वित होंगे। इसके लिए संघर्ष करते हुए कई बार जेल गए और आंदोलन किया। इसकी स्थापना के बाद यह नहीं पता कि हमें इसकी स्थापना को लेकर ही पछताना पड़ेगा कि हमने यह विश्वविद्यालय क्यों खुलवाया। विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के उद्देश्य में पूरी तरह विफल रहा है। अब लगता है कि हम राजस्थान विश्वविद्यालय के साथ ही रहते तो अच्छा होता।
विष्णु चावड़ा, संयोजक, मत्स्य विश्वविद्यालय संघर्ष समिति, अलवर।

Lubhavan
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