90 किलोमीटर प्रतिघंटे की क्षमता, 9 किलोमीटर की रफ्तार से रेंगते हैं वाहन

अलवर के भूगोर तिराहे से हनुमान चौराहे के बीच बेहाल मेगाहाइवे

 

अलवर के भूगोर तिराहे से हनुमान चौराहे के बीच मेगा हाइवे के सीने पर अतिक्रमण के पहाड़ खड़े हो गए हैं। गोबर, कबाड़ और बजरी डालकर अतिक्रमण किए जाने से चार किलोमीटर की दूरी में वाहन दौडऩे की अपेक्षा रेंगते हैं। रेंगते वाहन तभी राहत की सांस ले पाते हैं जब वे हनुमान चौराहा पार कर लेते हैं। अगर कोई वाहन चालक अतिक्रमण से संकरी हुई सड़क पर वाहन को दौड़ाने की चेष्टा करता भी है तो कुछ सैकंड बाद ही उसे अहसास हो जाता है कि वाहन को पलटने से बचाना है तो रेंगते हुए ही जाना पड़ेगा। चार किलोमीटर लम्बाई की ये सड़क उस मेगाहाइवे का हिस्सा है जिसे भिवाड़ी से मंडरायल तक 90 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार के हिसाब से करोड़ों की लागत से बनाया गया था।

अलवर. शहर के भीतर ही नहीं अब 200 फुट बाइपास रोड़ पर हादसे का सामान जम गया है। भूगोर तिहारा से हनुमान चौराहे के बीच में रोडी, बजरी व कबाड़ के पहाड़ खड़े हो गए हैं। दुकानों के आगे मुख्य रोड पर 60 से 80 फीट तक अतिक्रमण ऐसे जम गया मानो प्रशासन की मौन स्वीकृति हो। तभी तो शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। जिसका असर ये है कि ऐसे ही अनदेखी रही तो यह 200 फीट रोड भी 60 फीट का ही रह जाएगा। फिर अतिक्रमण हटाना प्रशासन के बूते से बाहर हो जाएगा।
ये हैं वहां के हालात

तिराहे के पास फैक्ट्री

भूगोर तिराहे के पास हनुमान चौराहे की तरफ जैसे ही कुछ दूर चलेंगे मुख्य रोड पर रोडी बनाने का प्लांट लगा है। जिसने रोड के आगे बिल्कुल जगह नहीं छोड़ रखी। बड़ा अतिक्रमण कर लिया। इससे करीब 100 मीटर आगे चलेंगे तो दुकानों के आगे मलबा पड़ा है। बीच-बीच में होर्डिंग लगे हैं। जो अवैध हैं। कुछ जगह विद्युत पोल व रोडलाइट के पोल ने घेर रखी है। जिनकी आड़ में अतिक्रमण कर रखा है।

कटीघाटी के रोड का मलबा यहां पटका

कटीघाटी से भवानी तोप सर्किल के बीच में सीसी रोड है। जिसका मलबा हटाकर 200 फीट रोड पर बीच-बीच में पटक कर पहाड़ का रूप दे दिया गया है। मुख्य रोड पर चलते वाहन का जरा सा बैलेंस बिगड़ा तो तय मानिए जान बचना मुश्किल है।

ढाबे वालों ने हद पार की

इस रोड पर कुछ ढाबे संचालित हैं। जिन्होंने अतिक्रमण करने की हद पार कर दी है। मुख्य रोड से दुकान तो दूर है लेकिन, दुकान के आगे इतना सामान जमा देते हैं कि बगल में बिल्कुल जगह नहीं बचती है। ईटाराणा चौक के पास भी ढाबे हैं। जिन्होंने बगल में कबाड़ और होटल के आगे अतिक्रमण कर रखा है।

स्कूल के आगे अतिक्रमण

इस रोड पर दो-तीन छोटे स्कूल हैं। जिन्होंने बड़ी जगह रोक ली है। पक्का निर्माण तक कर लिया। एक जगह पर सड़क की जगह को खेल मैदान के रूप में कब्जे में ले रखा है। दूसरे स्कूल ने रोड के किनारे तक जालियां लगा रखी हैं। यह सब अतिक्रमण किसी दिन बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकता है। अब पूरा रोड व्यवसायिक हो गया है। जगह-जगह दुकानें बन गई।

गोबर से रोक दिया रोड

ईटाराणा चौराहे के पास तो सड़क की जगह पर गोबर डालकर रोक दिया। कहीं गोबर की रूडी है तो कहीं उपले जमा दिए। जिसे देखकर लगता है कि शहर को व्यवस्थित रखने वाले प्रशासन नींद में हैं। कभी इधर से निकले तो भी नहीं जागे। इतना सब होने के बावजूद प्रशासन किसी दुर्घटना के होने के इन्तजार में है।
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यह है जिम्मेदारों का कहना
पूरे रोड का कल मौका दिखवाते हैं। जहां-जहां अतिक्रमण है उसे चिह्नित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह शहर के बाहर की तरफ का हिस्सा है लेकिन, काफी बड़ी रोड है। इस पर कार्रवाई करेंगे।

प्रमोद शर्मा, अतिक्रण निरोधक अधिकारी, यूआईटी अलवर

Dharmendra Yadav
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