यहां उपकरण भी है, और स्टॉफ भी लेकिन किसानों को नहीं मिल रही सटीक जानकारी

यहां उपकरण भी है, और स्टॉफ भी लेकिन किसानों को नहीं मिल रही सटीक जानकारी

Hitesh Singh Bhardwaj | Publish: Feb, 15 2018 11:02:16 AM (IST) Alwar, Rajasthan, India

क्या यह विभागीय उदासीनता है, या फिर लापरवाही ? लाखों की लागत खर्च होने के बावजूद किसान को पुराने परंपरागत तरीकों से ही अनुमान लगाना बनी मजबूरी

अलवर जिले में मौसम की जानकारी देने के लिए सरकारी स्तर पर कोई भी व्यवस्था नहीं है। नौगांवा कस्बे के कृषि अनुसंधान केन्द्र पर स्थापित मौसम वैधशाला के अधिकतर उपकरण ही खराब हैं जिस कारण मौसम की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है।
नौगांवा कस्बे के कृषि अनुसंधान केन्द्र पर लाखों की लागत से की मौसम वैधशाला स्थापित है । यह रख-रखाव नहीं होने व बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण ये मौसम वैधशाला दम तोड़ती नजर आ रही है। कृषि अनुसंधान केन्द्र पर स्थापित अत्याधुनिक मौसम वैधशाला बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। इसकी मौसम की जानकारी से किसानों के लिए भी उपयोगी है।
कृषि अनुसंधान केन्द्र के डॉ. सुरेश मुरलिया ने बताया कि इस मौसम वैधशाला के माध्यम से मौसम के न्यूनतम व अधिकतम तापमान के अलावा हर आधा घंटे में तापमान में उतार चढ़ाव का रिकॉर्ड लिया जाता है। हवा की दिशा एवं गति, सूर्य की तीव्रता एवं बरसात की मात्रा के अलावा मौसम में आद्र्रता की मात्रा, ओस की मात्रा, जमीन के तापमान की अन्य जानकारी ज्ञात होती है। इसी जानकारी के आधार पर केन्द्र के वैज्ञानिक किसानों को फसल बुवाई समय सहित वर्षा का पूर्वानुमान, फसल में लगने वाले रोगों एवं कीटों की जानकारी, फसलों में सिचांई की मात्रा एवं सिंचाई के समय की जानकारी उपलब्ध कराते हैं और फसलों सम्बन्धी अन्य सुझाव देते हैं। परन्तु कई माह से खराब पड़ी मशीन के कारण मौसम वैधशाला मौसम का हाल नहीं बता पा रही है, जिससे न तो वैज्ञानिक ही इसका लाभ ले पा रहे हैं और न ही किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। अनुसंधान केन्द्र पर स्थापित मौसम वैधशाला वर्ष भर में कुछ ही दिनों चलती है।

मशीन खराब होने पर मशीन के तकनीकी जानकारों की कमी के कारण कम्पनी के लोगों का इंतजार करना पड़ता है, वहीं कम्पनी को इसके लिए मोटी रकम रख-रखाव के नाम की चुकानी पड़ती है। कम्पनी के लोग कई दिनों बाद मशीन की दुरुस्ती के लिए आते हंै और कुछ दिनों बाद वापस मशीन में कोई तकनीकी खराबी हो जाती है। मौसम वैधशाला की मशीन लम्बे समय से खराब पड़ी है, परन्तु उसकी खबर लेने वाला कोई नहीं है। मशीन में पहले बैटरी की खराबी थी, जिसे केन्द्र की ओर से नया बदलवा देने के बावजूद मशीन कार्य नहीं कर रही है और मौसम का हाल पता नहीं लग पा रहा।

मशीन मेन्टीनेन्स का कोई बजट उपलब्ध नहीं

यूं तो सरकार द्वारा वैज्ञानिकों के प्रयोगों के लिए मौसम के हाल जानने के लिए अत्याधुनिक मौसम वैधशाला कृषि अनुसंधान केन्द्र पर स्थाापित कर दी गई पर इसके मेन्टेनेन्स का कोई भी बजट सरकार की ओर से नहीं देने से लाखों रुपए लागत की ये मशीन नाकारा साबित हो रही है।

मशीन में तकनीकी खराबी

मशीन में कोई तकनीकी खराबी है, जिसकी सूचना कम्पनी को कई बार दे दी गई है, लेकिन कम्पनी की ओर से मशीन को सही नहीं किया जा रहा है, जिससे परेशानी हो रही है।
-डॉ. सुरेश मुरलिया, क्षेत्रीय निदेशक कृषि अनुसंधान केन्द्र नौगांवा

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