प्रदेश में खतरनाक हो रहा भीड़तंत्र, राजस्थान में पिछले तीन माह में भीड़ ने इतने लोगों को चोर समझकर पीटा

प्रदेश में खतरनाक हो रहा भीड़तंत्र, राजस्थान में पिछले तीन माह में भीड़ ने इतने लोगों को चोर समझकर पीटा
प्रदेश में खतरनाक हो रहा भीड़तंत्र, राजस्थान में पिछले तीन माह में भीड़ ने इतने लोगों को चोर समझकर पीटा

Lubhavan Joshi | Updated: 04 Sep 2019, 12:03:53 PM (IST) Alwar, Alwar, Rajasthan, India

Mob Lynching In Rajasthan : प्रदेश में नहीं रुक रही वारदात: बेवजह हुए कई शिकार

अलवर. Mob Lynching In Rajasthan : प्रदेश में भीड़तंत्र हावी होता जा रहा है। ( Mob Lynching In Rajasthan ) राजस्थान में पिछले तीन माह में मॉब लिंचिंग की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। पिछले तीन माह में कई लोग बेवजह भीड़ का शिकार हो चुके हैं। राजस्थान में मॉब लिंचिंग पर बनाए गए कानून के बावजूद भी भीड़ कानून को अपने हाथ में लेते हुए सङ्क्षदग्ध लोगों को निशाना बना रही है। प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए यह चिंता की बात है कि मॉब लिंचिंग की वजह से देशभर में नकारात्मक सुर्खियों में रहने वाला अलवर यहां भी अव्वल है। अलवर के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी भीड़ द्वारा पीटने के मामले सामने आए हैं।

ग्रामीणों ने एमआइए थाना इलाके में मंगलवार को बच्चा चोर समझ दो युवकों को पकडकऱ पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने मारपीट करने के आरोप में पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया है। एमआईए थाना पुलिस ने बताया कि बिहार के नालंदा निवासी अवधेश प्रेमी और गुड्डू एमआइए स्थित एक फैक्ट्री में काम करते हैं। मंगलवार को उनकी छुट्टी थी। दोनों शराब पीने के लिए सुबह आर्यकन्या स्कूल के समीप बाजरे के खेत में बैठे थे। इसी दौरान आसपास के लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझ पकड़ लिया और धुनाई कर दी। पुलिस ने दोनों युवकों को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया और थाने ले आई। प्रभारी शिवराम गुर्जर ने बताया कि मारपीट करने वाले गोलेटा निवासी इमरान और उसके पिता आसमोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया है।


यहां हुई घटनाएं

जिला घटनाएं
अलवर 08

बांसवाड़ा 06

पाली 04

जैसलमेर 03

अजमेर 03

कोटा 02

जोधपुर 02

उदयपुर 02

जयपुर 02

बारां 01

झालावाड़ 01

भीड़तंत्र खतरनाक

अ नजाने में या जानबूझकर बच्चा चोर की अफवाह के फेर में आकर मासूम व निर्दोषों को पीटना सरासर गलत है। अब तक राजस्थान में दर्जनों को बेवजह ही भीड़ द्वारा पीटा गया है। बिना सोचे-समझे अफवाहों को आगे बढ़ाना या कानून को हाथ में लेना चूक नहीं बल्कि अपराध है। सभी को चाहिए कि अफवाहों से सचेत रहें, उनका प्रतिकार करें। लोकतंत्र का पोषण करें, भीड़तंत्र का नहीं।

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