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अलवर

मछली के एक करोड़ बीज होंगे तैयार… बांधों को देंगे लीज पर

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि 15 दिन के अंदर सरिस्का क्रिटिकल टाइगर हैबीटेट (सीटीएच) की 54 हजार 835.91 हैक्टेयर जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी करें। जस्टिस शिव कुमार ङ्क्षसह ने उच्च स्तरीय पांच सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद यह आदेश दिए हैं। प्रदेश सरकार के वकील ने एनजीटी से कहा कि जमीन के नक्शे आदि की डिजिटल प्रक्रिया में समय लगेगा। ऐसे में उन्हें 15 दिन का समय दिया जाए।

अलवरJul 05, 2024 / 05:24 pm

Pradeep

अलवर. मत्स्य विभाग ने मछली पालन को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए मछली के एक करोड़ बीज तैयार किए गए हैं। साथ ही मछली पालन के लिए ख श्रेणी के जलाशय और बांधों को पांच वर्ष के लीज पर दिया जाएगा। इसमें 5 लाख तक के टेंडर मत्स्य विभाग और पांच लाख से अधिक के टेंडर राज्य सरकार के अधीन होंगे।
पिछले दिनों सिलीसेढ़ में मछली पालने के लिए टेंडर किए गए, लेकिन कोई नहीं आया। इसकी लीज कीमत 75 लाख रुपए रखी गई थी। अब दोबारा जल्द ही इसके टेंडर किए जाएंगे। साथ ही जयसमंद, सरसा देवी मय नदी, अजबगढ़ बांध, सारेखुर्द बांध, हंससरोवर, आगर नागर, हरसौरा, देवती, जिरौली और खानपुर मेवान के टेंडर करने के लिए 15 जुलाई तिथि रखी गई।
बाहर से नहीं मंगवाना पड़ेगा बीज
जिले में मछली का बीज तैयार होने पर लोगों को मछली पालन के लिए बीज बाहर से मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कृषि विभाग की ओर से मछली पालन करने के लिए अनुदान भी दिया जाता है, ताकि किसानों को समृद्ध बनाया जा सके। बारिश का मौसम मछली का बीज तैयार करने के लिए उचित होता है। इसी मौसम में ब्रीङ्क्षडग होती है।
इनका कहना है
जिले में मछली के बीज तैयार करने की तैयारी चल रही है। इसी सीजन में ही बीज तैयार होता है। साथ ही जलाशय और बांधों को मछली पालने के लिए पांच साल की लीज पर दिया जाएगा। बांधों में मछली पालन के अलावा अन्य गतिविधि नहीं हो सकेगी।
  • महेश सोनवाल, मत्स्य विकास अधिकारी, अलवर।
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एनजीटी का आदेश, 15 दिन में सीटीएच के नाम करें 54 हजार हैक्टेयर जमीन
बफर एरिया में कॉमर्शियल गतिविधियों पर अब तक कार्रवाई न होने पर जताई नाराजगी
अलवर. राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि 15 दिन के अंदर सरिस्का क्रिटिकल टाइगर हैबीटेट (सीटीएच) की 54 हजार 835.91 हैक्टेयर जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी करें। जस्टिस शिव कुमार ङ्क्षसह ने उच्च स्तरीय पांच सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद यह आदेश दिए हैं। प्रदेश सरकार के वकील ने एनजीटी से कहा कि जमीन के नक्शे आदि की डिजिटल प्रक्रिया में समय लगेगा। ऐसे में उन्हें 15 दिन का समय दिया जाए।
जस्टिस शिव कुमार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सरिस्का के सीटीएच व बफर जोन में कॉमर्शियल एक्टिविटीज (होटल-रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट आदि) नहीं हो सकती हैं। ऐसी गतिविधियों को सरकार चिन्हित कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। सरिस्का के सीटीएच एरिया का म्यूटेशन होने के बाद यह कार्रवाई अमल में लाई जाए। नोटिफिकेशन के बाद भी सरिस्का का इको सेंसेटिव जोन घोषित न होने पर सरकार से जवाब मांगा है।
होटल-रेस्टोरेंट की रिपोर्ट न देने पर दायर किया विरोध
नाहरगढ़ वन एवं वन्यजीव अभयारण्य सुरक्षा एवं विकास समिति के वकील वैभव पंचोली ने उच्च स्तरीय कमेटी की ओर से सीटीएच, बफर एरिया में संचालित होटल-रेस्टोरेंट आदि की रिपोर्ट सब्मिट नहीं करने पर विरोध दायर किया। एडवोकेट ने बताया कि एनजीटी ने सरिस्का के बफर जोन में चल रही कॉमर्शियल एक्टिविटीज पर प्रशासन की ओर से एक्शन नहीं लेने पर नाराजगी जाहिर की है। प्रतिबंधित एरिया से बाहर संचालित गतिविधियों से पहले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति जरूरी है। एनजीटी ने साफ कर दिया कि पहले सरकार सरिस्का सीटीएच जमीन का म्यूटेशन खोले और उसके तुरंत बाद कॉमर्शियल एक्टिविटीज पर कार्रवाई करे।
सीबीआई व ईडी की भूमिका म्यूटेशन के बाद
उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद एनजीटी ने कहा कि सीटीएच एरिया के म्यूटेशन के बाद ही सीबीआई व ईडी की भूमिका होगी। इसी कारण दोनों एजेंसियों से कोई पूछताछ नहीं की गई। इन्हें फिलहाल फ्री कर दिया गया।

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