कोरोना से बचाव में अनाथ व लावारिस बालिकाएं भी मदद के लिए आगे आई, दिन-रात मास्क बनाने के काम में जुटी बालिकाएं

कोरोना वायरस के खतरे के दौरान अनाथ, लावारिस बालिकाएं भी मदद के लिए आगे आ रही हैं

By: Lubhavan

Updated: 31 Mar 2020, 11:59 AM IST

अलवर. कोरोना आपदा से लडऩे के लिए हर आदमी अपने स्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है ऐसे में लावारिस बालिकाएं भी किसी से पीछे नहीं हैं।

आरती बालिका गृह की बालिकाएं भी मदद में पीछे नहीं है। ये बालिकाएं बचपन से अनाथ है लावारिस हैं। यह बालिकाएं इन दिनों दिन रात मास्क बनाने की तैयारी में जुटी हुई हैं। बालिकाओं ने बताया कि हमारा अपना कोई नहीं है मां बाप ने हमें परिस्थितियों के हाल पर छोड़ दिया था।

इस बीमारी में लापरवाही से बहुत से बच्चे अनाथ हो जाएंगे। हम कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए मास्क बनाकर निशुल्क बांट रही है । इतना ही नहीं यह सैनंटाइजर भी तैयार कर रही है।

बालिका गृह की संचालिका मीरा सैनी ने बताया कि इन बालिकाओं को सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया है । अब इसकी सार्थकता साबित हो रही है।

विकलांगता सेवा में आड़े नहीं आ रही-

मालाखेड़ा के समीपवर्ती गांव मिर्जापुर में एक विकलांग युवा इन दिनों पूरे गांव ही नहीं समीपवर्ती गांवों में भी लोगों को कोरोना महामारी को लेकर जागरुक कर रहा है। वह घर-घर जाकर अपनी टीम के साथ दवाई का स्प्रे करवा रहा है तो लोगों को मुंह पर कपड़ा बांधने, सोशल डिस्टेंस रखने, घर से बाहर नहीं निकलने की सीख दे रहा है। यह विकलांग युवा प्रेम चौधरी है जिसके मंसूबे इसे और मजबूत बना रहे हैं। ये लोगों को पहले से ही सोशल डिस्टेंस रखने की बात कह रहा है जिसे लोग पहले नहीं मानते थे, वे अब मानने लगे हैं।

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Lubhavan Desk
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