पंचायत चुनाव की तिथियां टकरा सकती हैं प्रशासन गांवों के संग अभियान से

प्रदेश में अलवर समेत छह जिलों में अभी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव आगामी 30 अक्टूबर से पहले होने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग किसी भी समय अलवर समेत छह जिलों के लिए चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर सकता है।

By: Prem Pathak

Published: 07 Sep 2021, 01:06 AM IST

अलवर. प्रदेश में अलवर समेत छह जिलों में अभी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव आगामी 30 अक्टूबर से पहले होने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग किसी भी समय अलवर समेत छह जिलों के लिए चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर सकता है। वहीं राज्य सरकार प्रदेश में आगामी दो अक्टूबर से प्रशासन गांवों के संग अभियान शुरू करने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में चुनाव व अभियान की तिथियों में टकराव की उम्मीद है। यदि तिथियों में टकराव की नौबत आई तो प्रशासन के समक्ष अभियान की तिथियों में बदलाव ही एक रास्ता बचेगा।

जिले में पंचायत राज संस्थाओं के तहत जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य व पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के चलते टलते रहे हैं। इन संस्थाओं के चुनाव में करीब दो साल की देरी हो चुकी है। इस कारण अलवर जिले में चुनाव जरूरी हो गए हैं। इस बार अभी तक प्रदेश में करीब 27 जिलों में दो चरणों में इन संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अलवर सहित छह जिलों में 30 अक्टूबर से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। ऐसे में सबकी नजरें इन दिनों राज्य चुनाव आयोग पर टिकी है।

कई चरणों में हो सकते हैं चुनाव

राज्य चुनाव आयोग की ओर से प्रदेश में अब तक हुए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कई चरणों में कराए गए हैं। अलवर जिले में भी दो से चार चरण में ये चुनाव कराए जाने की उम्मीद है। ऐसे में चुनाव की लोक सूचना जारी होने से जिला प्रमुख व प्रधान पद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक महीने का समय भी लग सकता है। यानि चुनाव प्रक्रिया अक्टूबर तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा हुआ तो प्रशासन गांवों के संग अभियान की शुरुआती तिथियों में बदलाव कर इन्हें अभियान के अंतिम चरण तक खिसकाना पड़ सकता है।

कार्यक्रम में बदलाव इसलिए जरूरी

चुनाव व अभियान की तिथियों में टकराव की स्थिति में प्रशासन गांवों के संग अभियान की तिथियों में बदलाव चुनाव की आदर्श आचार संहिता की पालना के चलते जरूरी होगा। चुनाव आयोग की ओर से पंचायत चुनाव की लोक सूचना जारी होने के साथ ही उस क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता प्रभावी होना तय है। आचार संहिता के चलते प्रशासन गांवों के संग अभियान में अधिकाधिक लोगों को जमीन के पट्टे एवं अन्य छूट देना संभव नहीं हो सकेगा। इस कारण अभियान के उद्देश्यों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इस कारण चुनाव व अभियान की तिथियों में टकराव होने पर अभियान की तिथियों को अंतिम चरण तक खिसकाना जरूरी होगा।

Prem Pathak Reporting
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