अलवर शहर में 19 दिन बाद आए पैंथर ने 8 घंटे कराई मशक्कत, कमरे में छोड़ा गया मुर्गा, फिर इस तरह किया गया रेस्क्यू

अलवर शहर में एक बार फिर आए पैंथर ने दहशत मचाई, पैंथर को 8 घंटे बाद वापस छोड़ दिया गया।

By: Hiren Joshi

Published: 04 Apr 2019, 09:49 AM IST

अलवर. शहर के जयकृष्ण क्लब में बुधवार सुबह अचानक पैंथर दिखाई दिया, इससे वहां मौजूद कर्मचारी एवं अन्य लोग भयभीत हो गए। करीब 8 घंटे की मशक्कत के बाद पैंथर को ट्रेंकूलाइज किया जा सका। उसे सरिस्का के उमरी वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। करीब 19 दिन में शहर की आबादी क्षेत्र में पैंथर आने कीे यह दूसरी घटना है। पकड़ा गया पैंथर नर है और उम्र 4-5 साल बताई गई है। वजन 50 से 60 किलोग्राम बताया गया है।

शहर के बीचोबीच स्थित जयकृष्ण क्लब में सुबह करीब 6 बजे डयूटी पर तैनात कर्मचारियों को सचिव कार्यालय के बाहर पैंथर बैठा दिखाई दिया। कर्मचारी शुरू में कुछ समझ नहीं पाए और अजीब तरह का बड़ा जानवर मानकर कार्यालय का बाहर का दरवाजा बंद कर दिया। गार्ड को फोन कर किसी बड़े जानवर होने की सूचना दी, लेकिन गार्ड के पहुंचने तक पैंथर वहां से उठकर चला गया। क्लब सचिव बाबू झालानी को भी सूचना दी गई। झालानी ने क्लब पहुंचकर सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी। कैमरे के समय अनुसार क्लब में पैंथर सुबह 5.52 बजे घूमता दिखाई दिया। सूचना मिलने पर वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची।

मुर्गे को छुआ तक नहीं

कमरे में पैंथर के बैठ जाने और काफी देर तक कोई मूवमेंट नहीं करने से वनकर्मियों की समस्या बढ़ गई। इस दौरान वनकर्मियों ने पैंथर की मूवमेंट के लिए कई पारम्परिक तरीके अपनाए, लेकिन सब बेकार रहे। वनकर्मियों ने कमरे में मुर्गा छोड़ा, लेकिन पैंथर ने उसे छुआ तक नहीं।
बीज गोदाम के पास जब पैंथर को ट्रेंकूलाइज करने के प्रयास किए जा रहे थे तो वनकर्मियों को फिर चारपाई व लोहे की जालियों का सहारा लेना पड़ा, जबकि उस दौरान वहां भीड़ नहीं थी।

दीवार फांदकर बीज गोदाम के पास पहुंचा

जयकृष्ण क्लब से चलकर पैंथर दीवार फांदता हुआ नयाबास रोड स्थित बीज गोदाम के पास झाडिय़ों में जाकर छिप गया। क्लब में वनकर्मियों एवं गार्डों ने पैंथर की तलाश की, लेकिन नहीं मिला। बाद में वनकर्मी बीज गोदाम क्षेत्र में पहुंच गए। यहां भी काफी देर तक पैंथर नहीं दिखा। तलाशी के दौरान पैंथर के झाडिय़ों में छुपे होने का आभास मिला। वनकर्मियों ने झाड़ी के पास चारपाई व जाली लगाकर ट्रेंकूलाइज करने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाए। इस बीच 9.15 बजे पैंथर एकाएक वहां से उठकर फिर दीवार फांदकर जयकृष्ण क्लब आकर कार्यालय परिसर में बने एक कमरे में बैठ गया। जहां वनकर्मियों की टीम ने कमरे के गेट में छेद कर करीब 2 बजकर 5 मिनट पर पैंथर को ट्रेंकूलाइज किया।

दूसरे शॉट में हुआ बेहोश

सरिस्का से रेंजर शंकर सिंह शेखावत के नेतृत्व में आई वनकर्मियों की टीम को दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर पैंथर को ट्रेंकूलाइज करने में सफलता मिली। रेंजर शंकर सिंह ने ट्रेंकूलाइज करने के लिए दो शॉट दागे, पहला शॉट दरवाजे में बनाए छेद से दागा लेकिन खाली चला गया। बाद में छेद से सही लोकेशन बनाकर दूसरा शॉट लगाया, जिससे वह ट्रेंकूलाइज हो गया। बाद में पिंजरे में बंद कर पैंथर को मेडिकल के लिए ले गए। आर्यनगर में आने वाला पैंथर नहींशहर में 19 दिन में पैंथर आने की घटना से शहर में भय का माहौल बन गया। लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि कहीं यह पैंथर वही तो नहीं, जो कि गत 15 मार्च को स्कीम नम्बर एक आर्यनगर में आया था। ट्रेंकूलाइज करने के बाद पैंथर का मेडिकल करने वाले चिकित्सकों का मानना है कि दोनों पैंथर अलग-अलग है और दोनों की उम्र भी अलग है।

Hiren Joshi
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