आर्थिक परिस्थितियों की वजह से वैज्ञानिक नहीं बन सका राजस्थान का ये शिक्षक, आज होगा उपराष्ट्रपति के हाथों से सम्मानित

आर्थिक परिस्थितियों की वजह से वैज्ञानिक नहीं बन सका राजस्थान का ये शिक्षक, आज होगा उपराष्ट्रपति के हाथों से सम्मानित

Dinesh Saini | Publish: Sep, 05 2018 10:14:15 AM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 10:34:19 AM (IST) Alwar, Rajasthan, India

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अलवर। ‘प्रधानमंत्री ने जब लंदन में मेरा नाम लेकर कहा था, हिंदुस्तान अलवर के इमरान में बसता है। तब से मैं प्रधानमंत्री से मिलना चाहता था। आज मेरी इच्छा पूरी हो गई। पीएम ने मुझसे पूछा, और इमरान कैसे हो। तुमने कितने एप बनाए हैं। यू आर डूइंग वेल’। यह कहना है अलवर के शिक्षक इमरान खान का मेवाती। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने गए देशभर के 45 शिक्षकों में से एक अलवर के इमरान भी है। उन्हें बुधवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु पुरस्कार से नवाजेंगे। इससे पहले उन्होंने मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की। इमरान राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृति स्कूल, अलवर में प्राइमरी क्लास के बच्चों को पढ़ाते हैं। उन्होंने अभी तक पढऩे और पढ़ाने के 80 से ज्यादा मोबाइल एप बनाए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 2015 में उनके एप को अपने डिजिटल अभियान में शामिल किया था।

 

आर्थिक तंगी से नहीं बना वैज्ञानिक
इमरान कहते है, ‘पापा किसान थे। मेरी इच्छा वैज्ञानिक बनने की थी, लेकिन घरेलू आर्थिक परिस्थितियों की वजह से वैज्ञानिक नहीं बन पाया।’ उन्होंने कहा, ‘भाई घर में पुराना कम्प्यूटर छोड़ कर चला गया था। मैंने कम्प्यूटर का इस्तेमाल करना शुरू किया और कुछ किताबों से पढ़ाई शुरू की, धीर-धीरे मोबाइल एप बनाना शुरू किया।’ इमरान ने बताया कि उनके जिले के बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढऩा चाहते थे। उन्होंने अपने स्कूल में कम्प्यूटर लैब बनाई। प्राइवेट स्कूल के बच्चे भी उनके स्कूल की ओर आकर्षित होते हैं।

 

पीएम भी हुए चूरू की सुमन के मुरीद
प्रधानमंत्री के सामने जब मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित 45 अध्यापकों में से छह अध्यापकों को अनुभव बांटने के लिए चुना तो उनमें एक चूरू के राजगढ़ ब्लॉक की राजकीय मोहता बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की डॉ सुमन जाखड़ भी थी। डॉ सुमन की कहानी सुनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी तारीफ की। सुमन ने बताया कि राजगढ़ में अपराध का ग्राफ ज्यादा है। ऐसे में लड़कियों को स्कूल तक खींचने की चुनौती, लेकिन उन्होंने यह चुनौती स्वीकारी और कुछ ही साल में स्कूल में दाखिला 400 से बढकऱ 1300 हो गया। डॉ सुमन ने ‘पत्रिका’को बताया, ‘मैंने प्रधानमंत्री को बताया कि वह घर.घर जाकर बच्चियों को स्कूल में भेजने के लिए लोगों को मनाती है।’

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