नौनिहालों की जिंदगी को लेकर अब चेता परिवहन विभाग, कर रहा ऐसा काम, हर कोई होगा खुश

नौनिहालों की जिंदगी को लेकर अब चेता परिवहन विभाग, कर रहा ऐसा काम, हर कोई होगा खुश

Rajeev Goyal | Updated: 08 Feb 2018, 03:24:24 PM (IST) Alwar, Rajasthan, India

निजी स्कूल छोटे बच्चों को बाल वाहिनियों में ठसाठस भरकर ले जाती है, लेकिन अब पुलिस व यातायात पुलिस ने उनके खिलाफ अभियान चलाया है।

अलवर. शहर सहित अलवर जिले में क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर ले जाना अब बाल वाहिनी संचालकों को आसान नहीं रहेगा। यातायात पुलिस व परिवहन विभाग ने बुधवार से क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर सरपट दौड़ रही बाल वाहिनियों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है।

दोनों विभागों की ओर से पहले ही दिन क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर दौड़ रही 100 स्कूल वाहिनियों के चालान काटे गए। इनमें से 83 चालान अलवर शहर व उसके आस-पास के क्षेत्र में स्कूली बच्चों को ओवरलोड भरकर दौड़ रही बाल वाहिनियों के थे। वहीं, 15 चालान भिवाड़ी व 2 बहरोड़-नीमराणा क्षेत्र में स्कूली बच्चों को ठूस-ठूसकर दौड़ रही वाहिनियों के थे।

वाहिनियों ने रूट बदला

यातायात पुलिस व परिवहन विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए बुधवार को बाल वाहिनी संचालक अपने वाहिनियों को रास्ते बदल-बदल कर ले जाते दिखे। इस दौरान कुछ ने क्षमता से अधिक बच्चों को रास्ते में उतार दिया और कुछ देर बाद पुन: लेने आने की कहकर अपनी गलती छिपाई। गौरतलब है कि बाल वाहिनियों में नौनिहालों की जान को जोखिम लम्बे समय से बना हुआ है। वाहिनी संचालक चंद मुनाफे के लालच में क्षमता से अधिक बच्चों को बिठाकर ले जाते हैं। इससे हादसे का अंदेशा बना रहता है।

अलवर सहित चार जगह एक साथ शुरू

पुलिस व परिवहन विभाग की ओर से प्रथम चरण में अलवर शहर सहित भिवाड़ी, बहरोड़ व नीमराणा में बाल वाहिनियों के खिलाफ अभियान छेड़ा गया है। पहले दिन यातायात पुलिस ने एएसआई देवेन्द्र के नेतृत्व में एक टीम बहरोड़-नीमराणा भेजी, जिसने क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाती दो बाल वाहिनियों के चालान काटे। वहीं, दूसरी टीम एएसआई इन्द्रमणि के नेतृत्व में भिवाड़ी भेजी गई। अलवर शहर में यातायात प्रभारी अमृत सोनी व एएसआई रामअवतार के नेतृत्व में क्षमता से अधिक भरी बाल वाहिनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

ये मिले हालात

यातायात पुलिस के अनुसार अलवर शहर में कार्रवाई के दौरान ज्यादातर बाल वाहिनियों में क्षमता से अधिक बच्चे मिले। जिस बाल वाहिनी की क्षमता 12 बच्चों को ले जाने की थी, उसमें 18 से 20 बच्चे बैठे मिले। कुछ बाल वाहिनियों में तो बच्चे लटककर जा रहे थे। इस पर इनके चालान बनाए गए।

हो चुकी है कई घटनाएं

क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर दौड़ रही बाल वाहिनियों से कई दुघर्टनाएं हो चुकी है। इसके बावजूद न स्कूल संचालक बदले हैं और न वाहिनी संचालक। जबकि स्कूली वाहिनियों को लेकर सरकार के स्पष्ट आदेश है कि वाहिनियों में निर्धारित सीटों से डेढ़ गुने से अधिक बच्चे नहीं ले जाए जा सकते। इसके बाद भी वाहिनी संचालक बच्चों को चंद फायदे के लिए ठूस ठूसकर ले जाते हैं।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर यातायात पुलिस व परिवहन विभाग की ओर से क्षमता से अधिक बच्चों को ले-जाने वाली बाल वाहिनियों की जांच का अभियान छेड़ा गया है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों को भी जागरूक होना चाहिए। स्कूलों को भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए।
राहुल प्रकाश, जिला पुलिस अधीक्षक अलवर।

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