अलवर लोकसभा उपचुनाव: किसी भी करवट बैठ सकता है ऊंट, जानिए क्या कहती है तिजारा विधानसभा क्षेत्र की जनता

अलवर लोकसभा उपचुनाव: किसी भी करवट बैठ सकता है ऊंट, जानिए क्या कहती है तिजारा विधानसभा क्षेत्र की जनता

Rajeev Goyal | Updated: 25 Jan 2018, 02:56:21 PM (IST) Alwar, Rajasthan, India

अलवर लोकसभा उपचुनावों के लिए सभी विधानसभा क्षेत्रों के वोट बेहद ही अहम है, जानिए क्या कहती है तिजारा विधानसभा क्षेत्र की जनता।

अलवर. धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी तिजारा में मतदाताओं की चुप्पी राजनेताओं का भ्रम फिर तोड़ सकती है। चन्द्रप्रभ देहरा जैन मंदिर व भर्तृहरि के गुम्बज के लिए देश-विदेश तक विख्यात तिजारा के मतदाता इस बार चुप्पी साधे है। उनकी चुप्पी में बड़ा राज छिपा हुआ है। जिले के तिजारा विधानसभा क्षेत्र में अब तक कांग्रेस का दबदबा रहा है। कांग्रेस शासन मेंं चिकित्सा मंत्री रहे दुर्रुमियां यहां से तीन बार विधायक रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस भ्रम को तोड़ा और यहां से मामन यादव जीतकर आए। करीब 2 लाख 19 हजार मतदाताओं के इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा मुस्लिम वोट हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति व अहीर मतदाता हैं। तिजारा में इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों की बात हो रही है। स्थानीय निवासी अजीत यादव ने बताया कि तिजारा विधानसभा क्षेत्र में भिवाड़ी, टपूकड़ा आदि क्षेत्र आते हैं। यहां ढेरों फैक्ट्रियां होने के बावजूद इनमें स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है। इसे लेकर आन्दोलन हुए, नेताओं ने बड़े-बड़े वादे और दावे किए, जो पूरे नहीं हुए। स्थिति ये है कि एनसीआर में शामिल होने के बाद भी यहां बेरोजगार युवाओं की बड़ी फौज है।

चल सकता है ध्रुवीकरण का दांव

तिजारा विधानसभा क्षेत्र में इस बार रामगढ़ की भांति वोटों के ध्रुवीकरण का अंदेशा भी बना हुआ है। यदि एेसा हुआ तो भाजपा को फायदा मिल सकता है। दरअसल, क्षेत्र में ज्यादातर मेव मतदाता सरकार से नाराज हैं और वे कांग्रेस के पक्ष में वोट का मानस बना रहे हैं। यहां दोनों प्रत्याशियों के यादव होने के चलते अहीर मतों के विभाजन का भी खतरा बना हुआ है। एेसे में भाजपा यहां ध्रुवीकरण का दांव खेल सकती है।

पिछला गणित भाजपा के पक्ष में, अब राह मुश्किल

तिजारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने 2013 में पहली बार बाजी मारी और यहां से भाजपा के मामन यादव करीब 40 हजार मतों से विजयी हुए। 2014 के लोकसभा चुनावों में भी मोदी लहर के चलते भाजपा को यहां से बढ़त मिली थी। जबकि 2003 और 2008 के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के एमामुद्दीन अहमद खां उर्फ दुर्रुमियां विजयी हुए थे। लेकिन इस बार यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों की राह आसान नहीं है। स्थानीय विधायक पर एक जाति विशेष क्षेत्र में ही विकास के आरोप लग चुके हैं। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी पर बाहरी और सरकार नहीं होने का ठप्पा है।

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