शाहजहांपुर बॉर्डर पर आंदोलन के विरोध में राजस्थान-हरियाणा के 35 गांव जुटे, तम्बू हटाकर हाइवे खाली कराने की चेतावनी दी

शाहजहांपुर में राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर लम्बे समय से आंदोलन के कारण आसपास के गांव के उद्योग धंधे बंद हो गए हैं, अब 35 गांव की महापंचायत ने चेतावनी दी है

By: Lubhavan

Published: 11 Jan 2021, 02:00 PM IST

शाहजहांपुर (अलवर). बॉर्डर पर किसानों की ओर से नेशनल हाइवे-48 को जाम किए जाने के विरोध में रविवार को हरियाणा और राजस्थान के 35 गांवों के ग्रामीणों की महापंचायत हुई। बॉर्डर के समीपवर्ती पेट्रोल पंप पर हुई महासभा में किसान आंदोलनकरियों को हाइवे से हटाकर खाली करने की मांग की जाने लगी। किसान आंदोलन की वजह से रोजगार और काम धंधे चौपट होने से लोगों ने आक्रोश जताया। हाइवे बंद होने से वाहनों को निकालने के लिए रूट डायवर्ट होने से गांव में वाहनों का आवागमन बढ़ गया है जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि अगर आंदोलनकारी हाइवे को खाली नहीं करेंगे तो उन्हें मजबूरी में जबरन हाइवे खाली करना पड़ेगा। महापंचायत को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। हरियाणा और राजस्थान पुलिस ग्रामीणों और किसानों के टकराव न हो इसके लिए समझाइश करने में जुट गई। दोनों पक्षों से शांति वार्ता कर समस्या का हल निकालने की बात कही जा रही है। आंदोलनकारी किसान नेता और पूर्व विधायक अमराराम सहित संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों को महापंचायत स्थल पर बुलाया गया, जहां दोनों पक्षो के बीच वार्ता का दौर चला।

महापंचायत को में वक्ताओं ने कहा कि किसान आंदोलन की वजह से उनके गांव में होकर दिन-रात वाहनों का आना जाना रहता है इसकी वजह से कई मकानों को वाहनों ने तोडकऱ छतिग्रस्त कर दिया है। इसके अलावा हाइवे पर आवागमन चालू नहीं होने के बाद लोगों के व्यवसायिक गतिविधियां नहीं चल पा रही हैं जिससे उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। हाइवे पर सभी पेट्रोल पंपों का कारोबार ठप होने से कार्यरत कर्मचारियों को वेतन दे पाने के भी लाले पड़ रहे हैं। गांव में बीमार होने पर भी हाइवे के स्थानीय लोगों को घूमकर अस्पताल जाना पड़ रहा है। वहीं किसान आंदोलन की वजह से फसलें भी खराब हो रही है और नालों का पानी फसलों में जा रहा है। हरियाणा के ग्रामीण आंदोलनकारियों को हाइवे से हटाना चाह रहे थे जबकि किसानों ने हाइवे से हटने से इंकार कर दिया।

इसके बाद महापंचायत में निर्णय किया गया कि आंदोलनकारी किसान हाइवे को खाली नहीं करते हैं तो उन्हें जबरन खाली करा दिया जाएगा। इसके बाद हरियाणा प्रशासन के द्वारा ग्रामीणों से बात की गई और राजस्थान प्रशासन से बातचीत की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन भी ग्रामीणों को नहीं रोक पाएगा। रात में टैंट में घुस घुस कर किसानों को जबरन यहां से खदेड़ देने की चेतावनी दी। इसके बाद हरियाणा पुलिस के अधिकारी उन्हें समझाया। कानून व्यवस्था को बनाए रखने की अपील की जा गई। फिलहाल ग्रामीण धरना देकर बैठे भी ओर हरियाणा की तरफ बॉर्डर लगे बेरिकेट्स पर पुलिस अलर्ट है।
ग्रामीण मीनू यादव ने बताया कि किसान आंदोलन कारियों ने हाइवे नहीं खोला तो 35 गांव के लोग एकत्रित होकर महिला पुरुष और बच्चों सहित हाईवे पर आएंगे और जबरन हाइवे को खुलवा देंगे। किसानों के आंदोलन की वजह से उनके कारोबार प्रभावित हो रहा है । उन्होंने कहा आरपार की लड़ाई करेंगे। ग्रामीण हाइवे की हरियाणा सीमा में धरने पर बैठ गए और बेरिकेट्स हटाने की जिद पर अड़ गए। लेकिन हरियाणा राजस्थान के प्रशासन ने दो घंटे का समय लेकर किसान नेताओं से बात कर समाधान करने की सहमति के बाद शाम 5 बजे का समय दिया गया । 5 बजे बाद राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील , किसान नेता रामपाल जाट मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों से वार्ता कर कहा कि हम सभी किसान संगठनों से बात करके आप को बता देंगे। किसान नेताओं की बात मानते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि आपके कहने पर हम लोग आज आज का समय और दे रहे हैं वरना कल के बाद महिलाओं सहित हम लोग जबरन बेरिकेटर्स को हटाकर यातयात चालू करवा देंगे। इस दौरान कोई भी घटना होती है तो उसकी जिम्मेवारी किसान नेताओं और स्थानीय प्रशासन की होगी ।

जिस पर किसान नेता राजाराम मील व अमराराम ने ग्रामीणों से कहा कि उनकी तरफ से कोई हाइवे जाम नहीं किया गया। बल्कि हरियाणा पुलिस द्वारा किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के कारण मजबूरी में किसान हाइवे पर पड़ाव डालने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा प्रशासन यदि अवरोधक हटा देती है तो किसान महापड़ाव स्थल से शांतिपूर्वक दिल्ली की ओर कूच कर जाएंगे।

Lubhavan Desk
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