प्रदेश में नवजात बच्चों की मौत का एक बड़ा कारण सामने आया, इस लापरवाही से समाप्त हो गया हजारों मासूमों का जीवन

Reason Of Children Death In Rajasthan: कोटा में बच्चों की मौत के बाद से प्रदेश के अलग-अलग शहरों में नवजात की मौत के आंकड़े सामने आ रहे हैं। इतनी मौत के पीछे एक बड़ा कारण भी सामने आया है।

By: Lubhavan

Published: 06 Jan 2020, 01:57 PM IST

अलवर. प्रदेश भर के अस्पतालों के एफबीएनसी वार्ड में न जाने कितने बच्चों की संक्रमण से मौत हो चुकी है। जिसका कोई अधिकृत आंकड़ा विभाग के पास भी नहीं है। लेकिन, यह सही है कि एफबीएनसी वार्ड में एक वार्मर पर एक से अधिक बच्चों को शिफ्ट करने से संक्रमण का बड़ा डर रहता है। जबकि अलवर ही नहीं पूरे प्रदेश में सालों से एक वार्मर पर दो-तीन शिशु भी देखे जाते रहे हैं। अलवर के अस्पताल में तो शनिवार को श्रम राज्य मंत्री के निरीक्षण के दौरान तीन-तीन बच्चे एक वार्मर पर मिले हैं। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल में नवजात की मौत के बाद वार्मर की जांच हो रही है, जिसके कारण थोड़ी देर के लिए वार्मरों पर बच्चे शिफ्ट किए गए थे।

6 माह पहले संक्रमण

छह माह पहले प्रदेश भर के अस्पतालों के एफबीएनसी वाडों में एक वार्मर पर एक से अधिक शिशुओं का इलाज होते देखा गया है। उस दौरान संक्रमण से जिन बच्चों की मौत हुई उसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। जबकि असलियत यह है कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की बड़ी कमी है। आए दिन अधिक बच्चों के बीमार होने पर एक मशीन पर एक से अधिक शिशु शिफ्ट करने पड़ जाते हैं।

अब नहीं रख सकते ज्यादा बच्चे

अब विभाग के यह स्पष्ट आदेश हैं कि एक वार्मर पर एक ही मरीज रहेगा। अलवर के शिशु अस्पताल में 20 वार्मर हैं। जिनमें से 18 कार्यरत हैं। लेकिन ऐसा देखा गया है कि वार्मर की संख्या से काफी अधिक मरीज मिले हैं। चिकित्सक मानते हैं कि जिन बच्चों को इंफेक्शन होता है या श्वांस में समस्या आती है। अपरिपक्कव शिशु, गंदा पानी अंदर जाने से बीमार शिशुओं को एफबीएनसी वार्ड में भर्ती किया जाता है, ताकि उनको थैरेपी व ऑक्सीजन सहित खास इलाज हो सके। वहीं पर फीड करने से लेकर दवा देने का कार्य होता है। शिशुओं में संक्रमण होने का अधिक डर रहता है। जिसके कारण विशेष सावधानी की जरूरत होती है। इससे बचने के लिए ही एक साथ एक मशीन पर अधिक शिशु रखने से संक्रमण होता है।

यह सही कि एक शिशु हो

यह सही है कि एक वार्मर पर एक ही शिशु होना चाहिए। अन्यथा नवजात व बच्चों में संक्रमण का डर रहता है।
ओपी मीणा, सीएमएचओ, अलवर

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