सरिस्का समेत प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में रेड अलर्ट घोषित

अलवर. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (होफ) ने टाइगर रिजर्व में शिकारियों की ओर से फंदे लगाने की घटनाओं के चलते वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सरिस्का बाघ परियोजना समेत पूरे प्रदेश में आगामी फरवरी तक रेड अलर्ट घोषित किया गया है।

By: Prem Pathak

Published: 06 Dec 2020, 12:16 AM IST

अलवर. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (होफ) ने टाइगर रिजर्व में शिकारियों की ओर से फंदे लगाने की घटनाओं के चलते वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सरिस्का बाघ परियोजना समेत पूरे प्रदेश में आगामी फरवरी तक रेड अलर्ट घोषित किया गया है। रेड अलर्ट के दौरान सभी राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारण्यों व समस्त वन क्षेत्रों में शिकारियों की गहन तलाशी अभियान चलाया जाएगा। जरूरत होने पर अभियान में स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग लेकर शिकारियों, अपराधियों को पकडऩे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रधान मुख्य संरक्षक की ओर से जारी आदेश में बताया कि गश्ती दल की ओर से संरक्षित क्षेत्रों तथा वन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए निरंतर कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान में सभी वन मंडल के वनाधिकारी व अन्य स्टाफ भी शामिल होंगे। उन्होंने मुख्य वन संरक्षक, उप वन संरक्षक, नियंत्रण अधिकारी अपने अधिकारिक क्षेत्र में निर्देशों की कठोरता से पालना कराने के निर्देश दिए हैं।
अभियान के दौरान छुट्टियां रद्द कीरेड अलर्ट के दौरान चलाए जाने वाले अभियान में अवकाश पर चल रहे सभी फील्ड स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर उन्हें तत्काल ड्यूटी पर उपस्थित होने के लिए पाबंद करने के आदेश दिए गए हैं। केवल तीन परिस्थितियों में ही फील्ड स्टाफ की छुट्टियां स्वीकृत की जा सकेंगी। इनमें परिवार में माता-पिता व अन्य की मृत्यु होने, पुत्र-पुत्री या स्वयं की शादी होने तथा स्वयं या पत्नी की गंभीर बीमारी शामिल हैं।

सरिस्का के लिए जरूरी है अभियान
रेड अलर्ट के दौरान सरिस्का बाघ परियोजना में गहन तलाशी अभियान चलाने की जरूरत है। कारण है कि सरिस्का में पूर्व में बाघ एसटी-11 की खेत में लगे फंदे में गर्दन फसने के कारण मौत हुई थी। वहीं बाद में सरिस्का प्रशासन ने वन क्षेत्र में एक सांभर के गले में तार का फंदा लगा पकड़ा था। वहीं सरिस्का बाघ परियोजना स्थित गांवों के खेतों में ग्रामीणों की ओर से वन्यजीवों से फसलों को बचाने के लिए फंदे लगाने की घटनाएं उजागर हुई हैं। इस कारण सरिस्का में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गहन अभियान चलाने की जरूरत है।

सरिस्का में है 21 बाघों का कुनबा

सरिस्का में इन दिनों बाघों का कुनबा बढकऱ 21 तक पहुंच गया है। इन बाघों की टैरिटरी सरिस्का के अलग-अलग क्षेत्रों में है। इस कारण बाघों को फंदे से बचाने की ज्यादा जरूरत है। यही कारण है कि सरिस्का में गहन तलाशी अभियान चलाकर शिकारियों व अपराधियों की धरपकड़ की जरूरत है।
वर्ष 2005 से हो चुका बाघों का सफाया

सरिस्का पर शिकारियों की नजर लंबे समय से रही है। स्थानीय शिकारियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के बाघ अंग तस्करों की गतिविधियां सरिस्का में रही हैं। वर्ष 2005 से पूर्व शिकारियों ने फंदे लगाकर व अन्य तरीकों से शिकार कर सरिस्का को बाघ विहिन कर दिया था। वहीं पुनर्वास के बाद भी सरिस्का में शिकारियों व अपराधियों की गतिविधियां कम नहीं हो सकी हैं।

सरिस्का में अभियान के दिए निर्देश

रेड अलर्ट को लेकर सरिस्का में पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं। अभियान के लिए टीमें गठित कर गहन तलाशी शुरू कर दी गई है। शिकारियों व अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आरएन मीणा

वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक सरिस्का बाघ परियोजना

Prem Pathak Reporting
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