scriptsariska letest tiger st 6 news | चार जंगलों की सैर कर चुका राजा, अंत समय एनक्लोजर में गुजारने को मजबूर | Patrika News

चार जंगलों की सैर कर चुका राजा, अंत समय एनक्लोजर में गुजारने को मजबूर

अलवर. चार जंगलों की सैर कर सरिस्का में बादशाहत जमा चुका बाघ एसटी-6 अंत समय में अब एनक्लोजर में अंत समय गुजारने को मजबूर हैं। पूंछ में घाव होने के बाद करीब एक साल यह बाघ सरिस्का के एनक्लोजर में बंद है।

अलवर

Published: November 02, 2021 12:30:01 am

अलवर. चार जंगलों की सैर कर सरिस्का में बादशाहत जमा चुका बाघ एसटी-6 अंत समय में अब एनक्लोजर में अंत समय गुजारने को मजबूर हैं। पूंछ में घाव होने के बाद करीब एक साल यह बाघ सरिस्का के एनक्लोजर में बंद है। खास बात यह कि जंगल में जीवन के 15 साल से ज्यादा समय बिताने के बाद अंतिम समय में एनक्लोजर में अकेला रहने को मजबूर है।
चार जंगलों की सैर कर चुका राजा, अंत समय एनक्लोजर में गुजारने को मजबूर
चार जंगलों की सैर कर चुका राजा, अंत समय एनक्लोजर में गुजारने को मजबूर
बाघ एसटी-6 रणथंभौर से पुनर्वास कर सरिस्का लाया गया। सरिस्का आने से पहले इस बाघ की रणथंभौर में सल्तनत रही। स्वभाव से हमलावर बाघ एसटी-6 रणथंभौर में हमला कर एक डीएफओ को घायल कर चुका है, वहीं सरिस्का आने के बाद हमला कर वनकर्मी को भी लहूलुहान कर चुका है। इतना ही स्वभाव से खूंखार यह बाघ सरिस्का में अपने से कम उम्र के बाघ एसटी-4 को टैरिटरी के संघर्ष में गंभीर रूप से घायल कर उसकी मौत का कारण भी बन चुका है। इसके अलावा भी कई अन्य बाघों को अपनी टैरिटरी में खदेड़ चुका है। करीब एक दशक तक सरिस्का में राज करने के बाद अब पूंछ के घाव व पैरों की दुर्बलता के चलते खुद दूसरों पर आश्रित हो कर रह गया है।
कभी गुर्राहट से थर्रा जता था जंगल, अब खुद मोहताज

बाघ एसटी-6 की गुर्राहट से कभी रणथंभौर व सरिस्का का जंगल थर्रा जाता था। बाघ ही नहीं पैंथर सहित अन्य वन्यजीव भी जंगल में जगह छोड़ देते थे, वहीं बाघ एसटी-6 अब जिंदा रहने के लिए वनकर्मियों पर निर्भर है। वनकर्मियों की ओर से एनक्लोजर में ही मांस या वैट तथा उपलब्ध कराते हैं, इसी से ही वह जीवन के शेष दिन गुजार रहा है।
बाघ की सामान्यत: उम्र रहती है 14-15 साल

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघ की उम्र सामान्त: 14-15 साल मानी जाती है, जबकि बाघ एसटी-6 की उम्र 15 साल के पार हो चुकी है। पूंछ में घाव व पैरों की लाचारी व शारीरिक दुर्बलता के बावजूद यह बाघ उम्र के आखिरी पड़ाव पर भी चलने-फिरने में सक्षम है और चिकित्सकों की देखरेख में समय बीता रहा है।
उम्रदराज होने पर भेज देते हैं चिडिय़ाघर में

अक्सर बाघ या अन्य वन्यजीवों को उम्र दराज होने या फिर गंभीर घायल होने पर चिडिय़ाघर में भेज दिया जाता है, लेकिन बाघ एसटी-6 को उम्र दराज व शारीरिक दुर्बलता के बावजूद जयपुर स्थित चिडिय़ाघर में नहीं भेजा गया है। इसके पीछे सरिस्का प्रशासन का तर्क है कि बाघ एसटी-6 अभी चलने- फिरने में सक्षम है। सरिस्का में एनक्लोजर का दायरा करीब दो किलोमीटर है, इस कारण यह बाघ यहां घूम फिरकर ज्यादा जीवन जी सकता है, जबकि चिडिय़ाघर का दायरा बहुत छोटा होता है, ऐसे में बाघ को वहां भेजने से उसे परेशानी हो सकती है। इसके अलावा बाघ एसटी-6 को जंगल में खुला छोडऩे पर अन्य बाघों से भिडंत होने का खतरा है। यही कारण है कि करीब साल से यह बाघ एनक्लोजर में बंद रहकर जीवन का अंतिम समय गुजार रहा है।
एनक्लोजर में स्वस्थ्य है बाघ एसटी-6

बाघ एसटी-6 सरिस्का के एनक्लोजर में स्वस्थ है। बाघ की पूंछ में घाव होने के बाद इसे एनक्लोजर में चिकित्सीय देखरेख में रखा गया है। यह बाघ भोजन व पानी आराम से ले रहा है।
सुदर्शन शर्मा

डीएफओ, सरिस्का बाघ परियोजना

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