रेस्ट हाउस में वार्ता को नहीं पहुंचे किसान, प्रशासन धरना स्थल पर आया तो भी नहीं बनी बात

सरिस्का प्रशासन के खिलाफ किसानों का महापड़ाव तीसरे दिन भी जारी, किसान सभी मांग मानने पर अड़े

By: Prem Pathak

Published: 24 May 2018, 11:19 AM IST

सरिस्का प्रशासन के खिलाफ किसानों का चल रहा महापड़ाव तीसरे रोज बुधवार को भी जारी रहा। वार्ता को सरिस्का पहुंचे एडीएम प्रथम राकेश गढ़वाल की समझाइश भी किसानों को महापड़ाव स्थगित कराने पर राजी नहीं कर पाई। वहीं सरिस्का सीसीएफ गोविन्द भारद्वाज भी वार्ता के लिए गेस्ट हाउस पर मौजूद रहे, लेकिन किसान वहां वार्ता को पहुंचे ही नहीं।
विभिन्न मांगों को लेकर सरिस्का तिराहा पर महापड़ाव दे रहे किसानों से बातचीत के लिए एडीएम प्रथम सुबह सरिस्का गेस्ट हाउस पहुंचे। उनके साथ सरिस्का के उच्च अधिकारी भी थे। बाद में थानागाजी उपखण्ड अधिकारी कैलाश चन्द शर्मा भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक टिकैत के बैनर तले चल रहे अनिश्चितकालीन महापड़ाव पर पहुंचे और किसानों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए गेस्ट हाउस बुलाया, लेकिन यूनियन के पदाधिकारी जिला कलक्टर की अध्यक्षता में ही वार्ता करने पर अड़ गए। गेस्ट हाउस में वार्ता के लिए किसी प्रतिनिधि के नहीं पहुंचने पर एडीएम प्रथम राकेश गढ़वाल पैदल चलकर महापड़ाव स्थल पर पहुंचे और वार्ता के लिए समझाइश। इस पर किसान यूनियन के जिला महामंत्री पेमाराम सैनी, प्रदेश महामंत्री जयकिशन गुर्जर ने मना कर दिया और जिला कलक्टर की अध्यक्षता में वार्ता की बात कही। किसान यूनियन के सदस्यों ने बताया कि पहले ही हम मांग पत्र सौंप चुके हैं। इसके तीसरे दिन क्या रूपरेखा तैयार की है उसे जनता के सामने बताएं। बाद में एडीएम के नेतृत्व में प्रशासन व सरिस्का के अधिकारी महापड़ाव स्थल पर पहुंचे। महापड़ाव की अध्यक्षता कर रहे प्रभूदयाल एवं अन्य किसानों ने जिला कलक्टर के नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताई और दोपहर 3.30 पर जिला कलक्टर का पुतला दहन किया। बुधवार को दोपहर 12 बजे किसानो की ओर से सदबुद्धि यज्ञ किया जाएगा।

यह हुई बातचीत

एडीएम प्रथम राकेश गढवाल ने कहा कि जो कार्य होने वाले हैं वे शुरू करवा दिए जाएंगे। जो कार्य नहीं होने वाले हैं उनके बारे में वन विभाग से कारण पूछा जाएगा कि क्यों नहीं हो सकते। जो कार्य नहीं होने वाले हैं उनका विकल्प ढूंढा जाएगा। बातचीत के दौरान किसानों ने कहा कि 2 साल से कुशालगढ़ नाके के फ ोरेस्टर की तानाशाही के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाघ एसटी-11 की इंदौक के कालामेडा जंगल में 19 मार्च को मौत हुई, उसमें किसान को शिकारी घोषित किया है। जब बाघ एसटी-11 के रेडियो कॉलर गले में लगी हुई थी और कर्मचारी उसकी मॉनिटरिंग कर रहे थे तो उन्होंने स्कूल में तहसीलदार या गांव के मुखिया को सूचना क्यों नहीं दी।

ये अधिकारी पहुंचे वार्ता को

महापडा़व में सरिस्का उपवन संरक्षक हेमन्त सिह, अलवर एसडीएम मिलाप सक्सेना, मालाखेड़ा तहसीलदार मिथलेश मीना, ग्रामीण सीओ सांवरमल नागौरा, एसीएफ सुरेन्द्रसिंह धाकड़ सहित कई अधिकारी पहुंचे थे।

Prem Pathak Reporting
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