सरिस्का की हरियाली पर अब तीसरी आंख से निगरानी

सरिस्का बाघ परियोजना की हरियाली और बाघों पर अब तीसरी आखं (ड्रोन) से निगरानी होगी। सरिस्का प्रशासन इन दिनों ड्रोन कैमरे से जंगल व वन्यजीवों की निगरानी

By: Prem Pathak

Published: 04 Jan 2018, 12:38 AM IST

देश-दुनिया में बाघों के लिए विख्यात सरिस्का बाघ परियोजना में शिकारियों की ओर से वन्यजीवों के शिकार एवं अन्य अवैध गतिविधियां को अंजाम दिया तो वे बच नहीं पाएंगे। सरिस्का में वनकर्मियों की कम संख्या को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा के लिए हाई टेक्नॉलॉजी के उपयोग का निर्णय किया है। सरिस्का में हाई सिक्योरिटी सिस्टम कितना कारगर हो सकता है, इसके लिए फिलहाल एक ड्रोन से सरिस्का की निगरानी की ट्रायल ली जा रही है।

उदयपुर में दिखा चुके आई सिक्योरिटी का ट्रायल

वन्यजीवों एवं वानस्पतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सरिस्का बाघ परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार की ओर से पिछले बजट में आईटी सिक्योरिटी सिस्टम स्थापित करने को मंजूरी दी थी। सरकार के आईटी विभाग की ओर से सरिस्का की आईटी सुरक्षा व्यवस्था की ट्रायल का पिछले दिनों उदयपुर में आयोजित सेमिनार में सफल प्रदर्शन भी किया गया था। फिलहाल सरिस्का में आईटी सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है।


फिलहाल तालवृक्ष रेंज में ट्रायल

सरिस्का बाघ परियोजना पर शिकारियों के संकट को देखते हुए सरकार ने पिछले महीने तालवृक्ष रेंज की देवरा चौकी को एक ड्रोन ट्रायल के लिए दिया है। ड्रोन कैमरा लगातार वन क्षेत्र में वन्यजीवों व टाइगरों की निगरानी कर रहा है। इससे वन्यजीवों के फोटो भी लिए गए हैं।


इन क्षेत्रों में निगरानी कर रहा ड्रोन

सरिस्का के सघन क्षेत्र स्थित तालवृक्ष की देवरा चौकी को दिया गया है। फिलहाल ड्रोन से देवरा चौकी से नाथूसर, पानी ढाल, गुढ़ा कल्याणपुरा, रामपुर तृतीय तक करीब 15 से 20 किलोमीटर के जंगल में निगरानी की जा रही है।


इसलिए ड्रोन की जरुरत

सरिस्का बाघ परियोजना में वनकर्मियों की कमी के चलते वर्ष 2005 में एम्पावर्ड कमेटी ने बाघों की सुरक्षा के लिए एक बीट पर तीन कर्मचारी तैनात करने की सिफारिश की थी। वहीं सरिस्का प्रशासन के पास 102 बीटों पर केवल 106 वनकर्मी ही तैनात हैं। वनकर्मियों की कमी के कारण ही सरिस्का में ड्रोन कैमरों से निगरानी की जरूरत पड़ रही है।

सरिस्का में हाई टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी जरूरी


सरिस्का में बाघों की निगरानी व सुरक्षा के लिए हाई टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी सिस्टम की जरुरत है। इसी के तहत सरिस्का में ड्रोन कैमरे से निगरानी की ट्रॉयल ली जा रही है।

-डॉ. गोविंद सागर भारद्वाज, सीसीएफ, सरिस्का बाघ परियोजना

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