गांठ के पैसे लगाकर कर रहे समाजसेवा

स्काउट गाइड अभियान में बजट तक नहीं

By: Dharmendra Adlakha

Published: 20 Jan 2018, 09:41 PM IST

अलवर. स्काउट गाइड एक स्वयं सेवी, शैक्षिक, गैर सरकारी आंदोलन है। भारत में स्काउट व गाइड की स्थापना 1913 में एनी बिसेंट ने की थी। स्काउटिंग के जनक बैडन पावेल थे। इसका लक्ष्य युवाओं का मानसिक, शारीरिक व अध्यात्मिक विकास करना है। स्काउट गाइड की वर्दी निर्धारित की गई है। स्काउट गाइड को देखते ही सभी का उनके प्रति सम्मान अपने आप ही आ जाता है। रेलवे स्टेशन पर गर्मियों के दिनों में पानी पिलाना हो या जगन्नाथ मेला या फिर कोई भी बड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम, सभी में स्काउट गाइड अपने सक्रिय भूमिका निभाते हुए मिल जाएंगे।

 

अलवर जिले में कहने को तो सभी सरकारी स्कूलों के साथ कुछ गैर सरकारी स्कूलों में स्काउट व गाइड कार्यक्रम चल रहा है। जिले के सभी महाविद्यालयो में भी यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके प्रति युवाओं का रुझान भी है। सरकारी उदासीनता के कारण इस कार्यक्रम में युवाओं को भाग लेने में परेशानी आ रही है।

 

विद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर स्काउट व गाइड के लिए किसी प्रकार का अनुदान या बजट तक नहीं दिया जाता है जबकि इसके प्रति युवा अधिक रुचि ले रहे हैं। स्काउट गाइड के राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले शिविरों में भी युवाओं को अपने बजट से जाना पड़ता है जिसमें उन्हें उधार तक लेना होता है।

 

बजट की कमी का मामला पिछले दिनों उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी के अलवर आगमन पर विद्यार्थियों ने उठाए थे लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हुआ। एक छात्रा ने उच्च शिक्षा मंत्री को बताया था कि राष्ट्रीय स्तर के शिविर के लिए उसके 10 हजार रुपए खर्च हो गए जबकि सरकार की ओर से उसे कुछ नहीं मिला।

 

स्काउट गाइड के जिला संगठक प्रमोद शर्मा का कहना है कि अलवर जिले में स्काउट के प्रति बच्चों व युवाओं का रुझान बढ़ता जा रहा है। बहुत से स्काउट गाइड से जुड़े बच्चे व युवा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

 

सेवा का नहीं मिलता पूरा प्रतिफल-

स्काउट गाइड के प्रमाण पत्र पर रेलवे में वरीयता दी जाती है जबकि राजस्थान में नौकरियों में अभी तक इसके प्रमाण पत्र को बोनस अंक प्रदान नहीं किए जाते हैं। इसके लिए स्काउट गाइड से जुड़े लोग काफी समय से प्रमाण पत्रों को वरीयता देने की मांग कर रहे हैं। स्काउटिंग एक जीवन शैली है जिससे बालपन से सुसंस्कार विकसित किए जाते हैं।

 

यह कहते हैं सेवाभावी युवा-

 

अलवर जिले में नही पूरे प्रदेश में रुझान है। इसके लिए सरकार ने बजट ही नहीं दिया है। इस बारे में कई बार शिक्षा मंत्री को लिखा है लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हुआ है।

- जितेन्द्र कौशिक, राज्य पुरस्कार विजेता रोवर।

स्काउट गाइड अन्य कार्यक्रमों से अधिक प्रभावी है। गरीब विद्यार्थी कैसे इसका राष्ट्रीय शिविर अटेंड करेंगे जिसमें काफी खर्चा आता है।

-देवेन्द्र कुमार निपुण, रोवर, कला महाविद्यालय, अलवर।

अलवर जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का स्काउट व गाइड के प्रति रुझान नहीं है। इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए हमें सार्थक प्रयास करने चाहिए।

- अजय वर्मा, राज्य पुरस्कार विजेता रोवर।

स्काउट गाइड को प्रभावी बनाने के लिए सरकार को महाविद्यालय ही नहीं विद्यालय स्तर पर पूरा बजट देना चाहिए जिससे समाजसेवा के गुण युवाओं में विकसित हो सके।

- राजू जाटव, राज्य पुरस्कार विजेता रोवर, अलवर।

Dharmendra Adlakha
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