शहीद हंसराज की शहादत की कहानी पढ़कर भर आएंगी आपकी आंखे, जिस बेटे को पहली बार देखने आने वाला था, उसी ने दी मुखाग्नि

हंसराज गुर्जर 12 जून 2018 को पाकिस्तानी सेना से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे।

अलवर. 15 जनवरी यानी भारतीय थल सेना दिवस। भारतीय सेना के जवान देश की रक्षा करने में कई चीजों का बलिदान कर देते हैं, वे देश के लिए जान तक दे देते हैं। एक ऐसा ही किस्सा हम लेकर आए हैं देश के वीर सिपाही का। जो अपने बेटे का चेहरा पहली बार देखने के लिए घर आ रहा था, लेकिन उससे पहले ही वो शहीद हो गया। उसकी शहादत पर पूरा गांव रोया। हम बात कर रहे हैं अलवर जिले के बानसूर के हंसराज गुर्जर की।

हंसराज गुर्जर 12 जून 2018 को शरहद पर पाकिस्तान से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। 12 जून को उन्हें पाकिस्तान को जवाब देते वक्त गोली लग गई। उसी रात हंसराज गुर्जर को फ्लाइट पकड़कर अपने 15 दिन के बेटे को पहली बार देखने के लिए आना था। बेटा 15 दिन का हो गया था तो उसका कुआं पूजन करना था। इसी दिन हंसराज पहली बार बेटे को देखता, लेकिन अपने बेटे को गोद में लेने से पहले ही हंसराज देश के लिए शहीद हो गए।

जम्मू-कश्मीर के सांबा सेक्टर की चमलियाल पोस्ट पर 12 जून की रात रात को पाक गोलीबारी में अलवर जिले के बानसूर तहसील क्षेत्र के मुगलपुरा गांव का बेटा हंसराज गुर्जर शहीद हो गया था। शहीद हंसराज गुरुवार को छुट्टी पर अपने घर आने वाले थे, लेकिन पाकिस्तान से लोहा लेते हुए वे शहीद हो गए। हंसराज की छुट्टी स्वीकृत हो चुकी थी और अगली रात ही उनको फ्लाइट से घर के लिए रवाना होना था। हंसराज गुर्जर (28) का जन्म 20 अगस्त 1990 को हुआ था। शहीद के भाई देशराज गुर्जर ने बताया कि तीन भाइयों में वह सबसे छोटा था। शहीद के दोनों बड़े भाई एवं पिता खेती बाड़ी करते हैं।

15 दिन के बेटे ने दी थी मुखाग्नि

हंसराज का पार्थिव देह जब उनके गांव पहुंचा तो 15 दिन के बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। हसंराज यूनिट का होनहार एवं जाबांज सिपाही था। यूनिट में उसने अपने साथियों को अपने पुत्र होने की खुशखबरी सुनाई ओर सभी साथियों को मिठाई खिलाई ओर छुट्अी मंजूर होने की बात कहकर गांव में कुआं पूजन में आने को कहा था।

Lubhavan Desk
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