शाहजहांपुर बॉर्डर: एक माह पूर्व शुरू हुआ 50 किसानों का कारवां 30 हजार के पार पहुंचा, हाइवे पर जारी है आंदोलन

दिल्ली-जयपुर नेशनल हाइवे पर स्थित शाहजहांपुर में किसान एक माह पूर्व जुटना शुरू हुए थे, अब इस आंदोलन में प्रदेश सहित अन्य राज्यों के हजारों किसान पहुंच चुके हैं।

By: Lubhavan

Published: 03 Jan 2021, 10:35 AM IST

शाहजहांपुर. केंद्र सरकार की ओर से पारित कृषि बिलों के विरोध में दिल्ली में हो रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए 2 दिसंबर को राजस्थान से जा रहे 50 किसानों को हरियाणा पुलिस-प्रशासन ने सीमा पर रोक दिया था। किसानों ने एकता बनाए रखी।जिसके नतीजतन एक माह बाद 2 जनवरी तक 30 हजार से ज्यादा किसान राजस्थान-हरियाणा सीमा पर संगठित रूप से डटे हैं।

किसानों ने किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में 10 दिन तक शाहजहांपुर एरिया में निजी जमीन पर पड़ाव डालकर केंद्र सरकार से किसान संगठनों की वार्ता का इंतजार किया, लेकिन कोई हल नहीं निकलने पर वे 12 दिसंबर को फिर से दिल्ली कूच के लिए निकले। दिल्ली-जयपुर नेशनल हाइवे जाम की चेतावनी की गूंज प्रशासन से लेकर किसानों तक पहुंची और दिल्ली आंदोलन की तरह शाहजहांपुर आंदोलन भी चर्चा में आ गया। 13 दिसंबर से प्रदेश और देश के अन्य राज्यों के किसान शाहजहांपुर बॉर्डर पहुंचने लगे। बॉर्डर के उस पार हरियाणा सीमा छावनी में तब्दील है। साल के अंतिम दिन कुछ किसानों का सब्र टूटा और बैरिकेट तोड़कर हरियाणा में तरफ दाखिल हो गए।

संयुक्त किसान मोर्चा का किया गठन

कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलनरत देश भर के 500 से अधिक संगठनों ने महापडाव स्थल पर पहुंचने से इसे बल मिला और संयुक्त किसान मोर्चा का गठन कर इसके राष्ट्रीय ध्वज तले आंदोलन जारी रखने का निर्णय किया गया।जिसमे स्वराज संकल्प पार्टी के योगेन्द्र यादव, कामरेड अमराराम, रामपाल जाट सहित विभिन्न संगठनो के संयोजकों को शामिल कर सरकार से होने वाली वार्ता मे संयुक्त मोर्चा पदाधिकारियों की सहमति पर ही निर्णय लेना तय किया गया। इससे पूर्व जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष राजाराम मील, कांग्रेस नेता बलबीर छिल्लर व अन्य नेताओं ने किसानों का सहयोग किया। पूर्व विधायक कामरेड अमराराम जाट,पूर्व विधायक पवन दूगल,अखिल भारतीय किसान सभा के गंगानगर जिलाध्यक्ष कालू थौरी के नेतृत्व में समुचित व्यवस्था शुरू करा दी गई। अलवर युवा कांग्रेस भी किसानों की सेवा में जुटी है।

शाहजहांपुर बॉर्डर: एक माह पूर्व शुरू हुआ 50 किसानों का कारवां 30 हजार के पार पहुंचा, हाइवे पर जारी है आंदोलन

अब हाइवे पर ही जिंदगी

कृषि कानून के विरोध में खेत-खलियान छोड़कर किसान हाइवे पर आ गए हैं। किसान महापड़ाव पर ढाई किलोमीटर के दायरे में सभी सुविधाएं हैं। मेहनती किसान यहां भी सेवा कार्य में जुटे हैं। लंगर के आलावा किसानों के लिए छाछ-लस्सी, ज्यूस और ईलायची व केसर का दूध अन्य सेवाएं भी निरंतर जारी हैं। पंजाब से आए कुछ लोगों की ओर से वहां काजू-बादाम के गौंद के लड्डू भी बांटे जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अस्थाई विधुत कनेक्शन भी दिया गया है।

राजस्थान, पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल के किसान मौजूद

सभा स्थल पर राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा हरियाणा,पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश सहित देशभर के प्रांतों से आकर महापडाव स्थल पर किसानों की संख्या 30 हजार के पार पहुंच गई। यहां हनुमान बेनीवाल ने एनडीए से अलग होने का ऐलान किया तो कई नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ता ने किसान बिल के विरोध में भाषण दिए। यहां भीम आर्मी के प्रमुख चन्द्रशेखर रावण, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटेकर, पूर्व सांसद डॉ करण सिंह यादव, कांग्रेस नेता डॉ.आरसी यादव, एडवोकेट बस्तीराम यादव, ललित यादव, पूर्व कलक्टर जगरूप यादव आदि ने किसानों का समर्थन किया।

जब तक केंद्र सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य और अन्य मांगें नहीं मानी जाती, तब तक किसान बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे। चाहे मौसम की मार भी हमें यहां से नहीं डिगा पाएगी। अपना हक लेकर ही आंदोलन समाप्त करेंगे।

रामपाल जाट, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान महापंचायत

Lubhavan Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned