शाहजहांपुर किसान आंदोलन: दिल्ली-जयपुर हाइवे पर किसानों ने बनाई झोपड़ियां, मौसम की मार को लेकर तैयारियां पूरी

Shahjahanpur Kisan Aandolan में हाइवे पर किसानों ने झोपडी बनाना शुरू कर दिया है। गर्मी से बचने के लिए किसानों ने यह तरीका अपनाया है।

By: Lubhavan

Published: 22 Feb 2021, 09:42 AM IST

अलवर/ शाहजहांपुर. केन्द्र सरकार द्वारा कृषि सुधार कानून पारित करने को लेकर देशभर के किसान संगठनों में उठे विरोधी स्वरों ने देशव्यापी आंदोलन का स्वरूप दे दिया। आंदोलन की आग दिनों दिन बढती जाने के साथ दिल्ली कूच की योजना को लेकर पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश व राजस्थान के किसान संगठन अपने घरों से निकले थे। आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली सीमा के समीप टीकरी, सिंघु, गाजीपुर व शाहजहांपुर-खेडा बॉर्डरों पर ही पुलिस प्रशासन द्वारा दिल्ली जाने से रोक दिये जाने के चलते किसानों का महापड़ाव हाइवे सडकों पर ही डाल आंदोलन शुरू कर दिया गया।

आंदोलन के शुरूआत में किसानो के विरोध प्रदर्शन कुछ समय ही चलने को लेकर कयास लगाये जा रहे थे। किसान संगठनों व केन्द्र सरकार के बीच हुई समझौता वार्ताओं मे एक के बाद एक वार्ताओं के साथ ग्यारह वार्ताओं के दौर विफल रहने के साथ आंदोलन उग्र होता गया। बॉर्डर पर किसानों की एकजुटता को लेकर योगेन्द्र यादव, अमराराम जाट, राजाराम मील, पवन दुग्गल, तारासिंह सिद्दू, डॉ. संजय माधव,रणजीतङ्क्षसह राजू सहित द्वारा सभी संगठनों को एक ही बैनर के साथ एकजुटता बनाये रख आंदोलन करने की राय बनने के साथ संयुक्त किसान मोर्चा का गठन किया जाकर महापड़ाव स्थल पर आवश्यक सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी महईया कराई जाने लगी।

मौसम के साथ बदलता गया महापडाव स्थल का स्वरूप

दिसम्बर में शुरू हुए आंदोलन के दौरान कुछ समय आंदोलन की योजना के साथ टैंट के अस्थाई पांडाल मे रजाईयां व अलाव तापने के लिए लकडियों की व्यवस्था शुरू कराई गई। दिनों दिन केन्द्र सरकार से वार्ताओं के दौर विफल हाने के साथ कडकडाती ठंड व महापडाव स्थल पर आंदोलन कारियों की बढती संख्या के साथ स्थाई तंबू गाडे गये।तंबुओं मे रहने वाले किसानों के ओढने के लिए रजाई व कंबल व पहनने के लिए गर्म वस्त्र, खाना पकाने के लिए रोटी सेकने की दो मशीने,नहाने के लिए गर्म पानी करने के यंत्र, कपडे धाने के लिए वाशिंग मशीने,अलाव तापने के लिए पर्याप्त लकडियां,सर्दी के मौसम को देखते हुए मूंगफली,रेवडी व अन्य खाद्य सामग्री भी महापडाव स्थल पर उपलब्त होती रही।

4 व 6 जनवरी को हुई मावठ से आंदोलन स्थल पर किसानो के भीगे तंबुओं व बिस्तरों से हुई अव्यवस्था के चलते संयुक्त किसान मोर्चा की और से बारिस के बचाव के लिए वाटरप्रुफ तंबुओं की व्यवस्था शुरू की गई। 8 जनवरी को महापडाव स्थल की जांच करने पहुंच संभागीय आयुक्त समित शर्मा के समक्ष किसानो द्वारा व्याप्त समस्याओं से अवगत कराने के बाद अस्थाई शौचालयों की माकूल व्यवस्था,पानी की व्यवस्था के साथ चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए चिकित्सकीय टीम व एम्बेलेंस की सुविधाऐं पुलिस प्रशासन द्वारा मुहैया कराई गई।10 जनवरी को हरियाणा सीमा स्थित पेट्रोलपंप संचालकों व हाइवे के समीप ढाबा व अन्य सामान की दुकाने चलाने वाले दुकानदारों द्वारा आंदोलनकारियों को हाइवे से हटवाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन के साथ जबरन हटाने की धमकी के साथ राजस्थान पुलिस प्रशासन द्वारा किसानो की सुरक्षा बढा दी गई।

गर्मी की आहट के साथ किसान तंबुओं को दे रहे झोंपडी का स्वरूप...

महापडाव स्थल पर बदलते मौसम के साथ अपना स्वरूप भी बदलने लगा है। गर्मी की आहट के साथ किसानो ने अपने तंबुओं पर पूले डालकर झोंपडी बनाने मे जुट गये हैं। साथ ही गर्मी के मौसम को देखते हुए सब्जी व अन्य खाद्य सामग्री को खराब होने से बचाव के लिए बडे फ्रीज व शुद्ध पानी के लिए आरओ की व्यवस्था भी संयुक्त किसान मोर्चा की और से शुरू कराई जा रही है। किसानों ने अपने तंबुओं के स्थान पर पूले डालकर झोंपडी बनाता देख आसपास के ग्रामीणों व हाइवे सर्विस लाइन के गुजरते वाहनों में सवार लोगों में किसानों का आंदोलन लंबा चलने की चर्चाऐं आम होने लगी है।

Lubhavan Desk
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