अलवर में परवान नहीं चढ़ पाई केंद्र सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना

केंद्र सरकार चाहे कितने भी अभियान चला पर्यटन स्थलों को चमकाने की तैयारियां कर रहा हो, लेकिन यह योजनाएं धरातल पर कम ही नजर आ रही है।

By: Jyoti Sharma

Published: 11 Dec 2017, 12:59 PM IST

केंद्र सरकार की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना अलवर जिले में अब तक परवान नहीं चढ़ पाई है। इसके तहत देश भर के एेतिहासिक, धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं को विकसित करना था, जिससे कि पर्यटकों की संख्या बढ़ सके। इसके तहत वर्ष 2017 में अलवर जिले के तीन स्थलों का चयन किया गया था। इसमें धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण समझे जाने वाले भर्तृहरि, पांडूपोल व बाला किला में काम होना था।


यह होना था काम


इन स्थानों पर पर्यटकों की संख्या बढे़ इसके लिए यहां पर पर्यटकों के लिए सुविधाएं दी जानी थी। इसके तहत सभी स्थानों पर बैंच, लॉकर सुविधा, सोलर लाइट, डस्टबिन, पानी की व्यवस्था, यात्री शेल्टर, महिला एवं पुरुष शौचालय, साइनेज बोर्ड जिसमें पर्यटक स्थलों का महत्व बताया जाए। इस योजना के तहत पर्यटक स्थलों पर सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जानी थी। साथ ही पर्यटन व पर्यटन से जुडे़ अन्य पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना था।

धार्मिक महत्व रखते हैं ये पर्यटक स्थल


केंद्र सरकार ने अध्यात्मिक सर्किट के तहत इन स्थलों का चयन किया था। इसमें पांडूपोल एेतिहासिक धार्मिक स्थल है। जो कि महाभारतकालीन स्थान है। यहां पर पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान भीम ने गदा के प्रहार से पहाड़ तोडक़र रास्ता बनाया था। यह जगह आज भी यहां मौजूद है। इसके साथ ही पाण्डव पुत्र भीम के घमंड को तोडऩे के लिए स्वयं हनुमान जी ने वानररूप धारण कर उसका मार्ग रोका था। भीम उसे मार्ग से हटा भी नहीं पाए थे। इस स्थान पर आज भी लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर बना हुआ है। इस स्थान को पांडूपोल के नाम से जाना जाता है।

भर्तृहरि में उज्जैन के राजा भर्तृहरि ने राजपाठ छोडक़र यहां पर तपस्या की थी। यहां पर महाराजा भर्तृहरि का मंदिर बना हुआ है। प्रतिवर्ष यहां लाखों भक्त दर्शनों के लिए आते हैँ और मनौती मांगते हैं।

फैक्ट फाइल

पांडूपोल के लिए 188.42 लाख रुपए
भर्तृहरि के लिए 129.14 लाख रुपए
बाला किला के लिए 166.22 लाख रुपए

वन विभाग के क्षेत्र में आते हैं


स्वदेश दर्शन योजना के अध्यात्मिक सर्किट के तहत पांडूपोल, भर्तृहरि का चयन किया गया था। बाला किला के लिए भी पैसा आया था । यह बजट कार्यकारी एजेंसी को दिया जा चुका है । काम क्यों शुरू नहीं हुआ यह वो ही पता पाएंगे।
टीना यादव, सहायक निदेशक, पर्यटन विभाग, अलवर।


रिवाइज प्लान बनाने को कहा है


पर्यटन विभाग एवं पीडी कोर को योजना का रिवाइज प्लान बनाने को कहा गया है। वन क्षेत्र में वन नियमों के तहत ही निर्माण कार्य कराने का प्रावधान है। इस कारण पुराने प्लान के मुताबिक कुछ निर्माण कार्य संभव नहीं थे।
डॉ. गोविंदसागर भारद्वाज, सीसीएफ, सरिस्का बाघ परियोजना

Jyoti Sharma
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