scriptThe faces of the farmers blossomed with Maavath | मावठ से खिले किसानों के चेहरे | Patrika News

मावठ से खिले किसानों के चेहरे

सरसों और गेहूं सहित सब्जियों में होगा बारिश का लाभ, बढ़ेगा उत्पादन

अलवर

Published: January 10, 2022 02:13:15 am

अलवर. जिलें में गत दो दिनों से हो रही मावठ की बरसात से एक ओर जहां किसानों के चेहरे खिल उठे हंै, वहीं कृषि वैज्ञानिक इसे फसलों सहित वातावरण के लिए अच्छा संकेत मान रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक मावठ के बारे में बताते हंै कि रबी की फसलों के मौसम में होने वाली वर्षा मावठ कहलाती है, इस वर्षा का महत्व केवल वर्षा जल से नहीं अपितु यह वर्षा पूरे वातावरण में परिवर्तन लाती है। वातावरण में प्रदूषण के कारण जो गर्त छाई हुई थी वो साफ हो जाएगी और पौधों पर जमें धूल के कण भी इससे धूल जाऐंगे और उनमें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया भी सुचारू एवं बेहतर हो सकेगी।
फसलों के नजरिये से मावठ की वर्षा को ले तो जिलें में ज्यादातर किसान बारानी अथवा संरक्षित नमी वाली फसलों को बोते है। बारानी सरसों में पानी की उपलब्धता के आधार पर 35-40 दिन व दूसरी सिंचाई 75-80 दिन की अवस्था पर करते हंै । कृषि वैज्ञानिक डा. सुरेश कुमार ने बताया कि गत दो दिनों से हो रही मावठ का असर विशेष रूप से बारानी सरसों के लिए वरदान साबित होगी । इससे बारानी सरसों की फसल के अन्दर दानों का अच्छा भराव व तेल की मात्रा में बढोतरी होगी। पछेती सरसों में मावठ की बरसात के बाद यूरिया की टाँप ड्रेसिंग से किसानों के उत्पादन में बढोतरी होगी, वहीं वर्षा की इन बूंदों से सरसों में चेपे की जो शुरूआत हुई थी उस प्रकोप से किसानों को छुटकारा मिलेगा। गेहूं और जौ की फसल पर इस मावठ का अच्छा लाभ मिलेगा। समय पर बोई गई फसल अभी 75-80 दिनों की है और इस वक्त मावठ का होना गेहूं और जौ की फसल की बढवार एवं दानों की संख्या बढने के लिए लाभदायक है। वे किसान जिनकी फसल अभी कमजोर है और पीली पड रही है वो इस मावठ का फायदा लेते हुए यूरिया का छिडकाव अपनी फसलों में करे जिससे उन्हे उत्पादन में लाभ मिल सके। और जिन क्षेत्रों में मावठ हल्की हुई है वे किसान गेहूं और जौ में अपनी सिंचाई जारी रखे।
रबी की फसलों के अलावा जिलें में किसान सब्जियों पर भी निर्भर है और इस मावठ से उन सब्जियों पर भी असर देख जा सकता है जिलें में प्रमुख रूप से इस मौसम में मटर, टमाटर, बैंगन, गोभी मिर्च बोई जाती है। मावठ से इनमें उत्पादन तो बढेगा ही पर इससे बीमारी की आशंका बढेगी । मिर्च एवं टमाटर में गलन रोग व पत्ती झुलसा रोग होने की आशंका है इसके लिए किसान खेतों में भरे हुए पानी की निकासी व्यवस्था करे जिससे रोग से बचा जा सके और वैज्ञानिक उपायों को अपनाये जिससे लगने वाले रोग से निजात मिल सके।
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