यहां सरकार की साख को लग रहा है बट्टा

अच्छा करने के फेर में चार तक शहर का ढांचा बिगाड़ते रहे

By: Dharmendra Yadav

Published: 09 Dec 2017, 06:50 AM IST

पिछले चार सालों में जिले में कोई बड़ा विकास कार्य धरातल पर नहीं आया।
सरकार की छवि बिगडऩे का मुख्य कारण पुराने विकास के बड़े कार्य पूरे नहीं होना है। पूरे हो गए तो उनको चालू नहीं करा सके। जिससे जनता में नकारात्मक संदेश गया है। हालांकि, अलवर शहर में स्वामी विवेकानन्द पनोरमा व स्वतंत्रता सेनानी हसन खां मेवाती का पनोरमा भी करीब-करीब बनकर तैयार है। इसी तरह जिले में गिने-चुने विकास के कार्य धरातल पर आए हैं। कुछ जगहों पर आईटीआई कॉलेज, अस्पताल क्रमोन्नत करने की घोषणा जरूर हुई हैं, लेकिन धरातल पर लाभ नहीं मिल सका है। हालांकि शहर में बायोडायवर्सिटी पार्क का विकास हो रहा है।


अलवर शहर का ढांचा इतना पहले खराब नहीं रहा

सड़क, पानी व सीवरेज के मामले में अलवर शहर की जनता पिछले दो सालों में सबसे अधिक परेशान रही। आरयूआईडीपी ,जलदाय विभाग व यूआईटी के जरिए सीवरेज व पानी की लाइन डालने के कार्य बदइंतजामी का शिकार रहे। शुरूआत में किसी ने ध्यान नहीं दिया। बाद में हालात बदतर हो गए। परेशान होकर जनता सड़कों पर आने लगी तो जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुली। उपचुनाव के कारण जब सरकार के अलवर में आने -जाने का सिलसिला शुरू हुआ तो जिम्मेदारों ने जनता की सुध लेने की सोची,लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चूके थे। तभी तो जिम्मेदार अधिकारियों ने खुद को बचाने के चक्कर में काम करने वाली कम्पनियोंं पर इस्तगासे के जरिए न्यायालय में मामला दर्ज करा दिया,जिसकी जांच चल रही है। तीन अधिकारियों को नोटिस देने के बाद उन्होनें सड़कों की सुुध ली। ताकि न्यायालय में खुद का बचाव कर सकें। शहर के बिगड़े ढ़ाचे का अनुमान इसी बात से लगा सकते है कि इस समय करीब 350 किलोमीटर से अधिक सड़कें टुटी पड़ी है, जिन्हें बनाने की कोई कार्ययोजना नहीं है। इसी तरह के हालात नगर परिषद भिवाड़ी के क्षेत्र में भी है।


कॉलोनियों में नहीं हुआ विकास


शहर की कॉलोनियों में नए पार्क विकसित नहीं हुए, जो सड़के बनाई गई उनकों दुबारा से तोड़ दिया गया। जहां नालियां नहीं है। वहां बारिश के दिनों में बुरे हाल है। पुरानी सीवर लाइन को साफ करने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए,जिससे कई कॉलेनियों में आमजन को बदबू में जीना पड़ रहा है।

जिले की सड़कें पड़ी है टुटी


जिले भर में एनसीआर के करीब 969 करोड़ रूपए क बजट से सडकें बनाने का ढिंढोरा तो चार साल से पीटा गया, लेकिन अभी तक सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। जबकि एनसीआर का बजट स्वीकृत होने की प्रक्रिया कई साल पहले से चलती आ रही है। इसी तरह ढिलाई रही तो इन सड़कों को बनाने का कार्य अगले साल भी पूरा नहीं हो सकेगा।


मेडिकल कॉलेज व मिनी सचिवालय ने बिगाड़ी सरकार की साख


सरकार की साख तो अधूरा मिनी सचिवालय और बनकर तैयार ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज ने खराब की है। 850 करोड़ रूपए खर्च करने के बाद मेडिकल कॉलेज का शुरू नहीं किया जा सका है। वहीं 85 करोड़ रूपए का मिनी सचिवालय चार साल से अधूरा खड़ा है।

Dharmendra Yadav
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