अलवर शहर में जिंदगी को लगे पंख, हर तरफ दिखने लगी रौनक

अलवर शहर में लॉक डाउन के कारण थम गई जिंदगी अब चल निकली है। शहर को जैसे पंख लग गए हो। यहां की सूनसान रहने वाली सडक़ों पर रौनक दिखाई दी। कई बाजारों को देखकर लग ही नहीं रहा था कि यहां लॉक डाउन का कोई असर है। मैं फोटो जर्नलिस्ट के साथ रूपबास जगन्नाथ मंदिर से रवाना हुआ। जगन्नाथ मंदिर के सामने वाला मैदान पूरी तरह सूना है।

By: Dharmendra Adlakha

Published: 05 May 2020, 09:46 AM IST

रिपोर्ट- धर्मेन्द्र अदलक्खा, फोटो जर्नलिस्ट अंशुम आहूजा के साथ

अलवर शहर में लॉक डाउन के कारण थम गई जिंदगी अब चल निकली है। शहर को जैसे पंख लग गए हो। यहां की सूनसान रहने वाली सडक़ों पर रौनक दिखाई दी। कई बाजारों को देखकर लग ही नहीं रहा था कि यहां लॉक डाउन का कोई असर है।

मैं फोटो जर्नलिस्ट के साथ रूपबास जगन्नाथ मंदिर से रवाना हुआ। जगन्नाथ मंदिर के सामने वाला मैदान पूरी तरह सूना है। भवानी तोप पर कई पुलिस कर्मी बैठे हैं। इन्दिरा गांधी स्टेडियम के मुख्य गेट पर ताले लगे हैं और मोती डूंगरी चिल्ड्रन पार्क सूना है।

नंगली सर्किल से मन्नी का बड़ हम चले तो कई मोबाइल व स्टेशनरी की दुकानें खुली हैं। स्टेशनरी की दुकान वाले पूरी तरह खाली बैठे हैं।

नमकीन की दुकानों पर खूब भीड़-

हमने देखा कि नगर परिषद के आगे शहर में सबसे अधिक भीड़ नजर आई। यहां से केडल गंज की ओर जाने वाली सडक़ पर भीड़ थी। होप सर्कस से त्रिपोलिया तक तथा चूड़ी मार्केट पूरी तरह सूना था। चूड़ी मार्केट में आसानी से कार जा सकती है। काशीराम चौराहे पर बिजली उपकरणों के सामान बेचने वालों की दुकान पर भीड़ है।

इस मार्ग पर ब्रांडेड कपड़ों व अन्य सामान की बिक्री के लिए ग्राहकों का इंतजार है। अम्बेडकर सर्किल तक नई सब्जी की दुकानें लग गई हैं, यहां अधिकतर ब्रांडेड कपड़ों के शोरूम बंद हैं।

बोर हो गए लोग, दुकानदार निराश-

हमने यहां लोगों से बातचीत की तो उनका कहना था कि इतने दिन हुए लॉक डाउन से घर में बैठकर बोर हो गए हैं, वहीं दुकानदार निराश थे।

दो महीने बाद बाजार दवाई लेने आए-

लॉक डाउन ने हमें तो घर में ही कैद कर दिया है। दो महीने बाद बाजार में जरूरी दवा लेने आई हूं। अब समझ नहीं आ रहा है कि यह कब तक चलेगा।

-हेमलता शर्मा, सोना विहार निवासी

बाजार में हम कितने दिन बाद स्टेशनरी की दुकान खोल रहे हैं। यहां कोई खरीददारी करने नहीं आ रहा है। हम सफाई करके वापस चले जाएंगे।

- मुकेश जैन, दुकानदार, होपसर्कस।

बाजार में कई दिनों बाद पहली बार रौनक दिखाई दे रही है। यह सही है कि कुछ दिनों से बिक्री बढ़ी है लेकिन यह समय व्यवसाय के लिए विपरीत है।

- अंकुर भार्गव, दुकानदार

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रिपोर्ट- धर्मेन्द्र अदलक्खा, फोटो जर्नलिस्ट अंशुम आहूजा के साथ

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