बाघिन एसटी-9 ने सडक़ पार कर किया सांभर का शिकार

Prem Pathak

Publish: Mar, 15 2018 07:00:00 AM (IST)

Alwar, Rajasthan, India
बाघिन एसटी-9 ने सडक़ पार कर किया सांभर का शिकार

कुछ महीने पहले बाघिन एसटी-9 वनकर्मियों व ग्रामीणों को दिखी तो संक्रमण के चलते उसकी पूंछ में खून टपकने की चर्चा रही।

लम्बे समय से पूंछ में संक्रमण के चलते चर्चा में रही बाघिन एसटी-9 ने बुधवार को सडक़ पार कर सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र स्थित बांदीपोल में सांभर का शिकार किया। बाद में बाघिन शिकार को लेकर झाडिय़ों में ओझल हो गई।बाघिन एसटी-9 के अचानक सडक़ पर आने से वनकर्मियों में हडक़म्प मच गया। बाद में वनकर्मियों ने सडक़ के दोनों ओर यातायात को कुछ समय के लिए रुकवाया, जिससे सडक़ पर वाहनों की कतार लग गई। बाघिन के शिकार कर बांदीपोल स्थित जंगल में ओझल हो जाने के बाद सडक़ पर वाहनों की आवाजाही सुचारू हो सकी। बाघिन एसटी-9 को ख्ुाले में शिकार करते वनकर्मियों ने कई महीनों बाद देखा है।


पूंछ में संक्रमण से थी पीडि़त
बाघिन एसटी-9 लंबे समय से पूंछ में संक्रमण से पीडि़त थी। इस कारण वह घने जंगलों में अपनी टैरिटरी बना रह रही थी। यह बाघिन गत बारिश के दौरान लंबे समय तक वनकर्मियों को नहीं मिल सकी थी। इस कारण बाघिन को लेकर आशंका बढ़ गई। कुछ महीने पहले बाघिन एसटी-9 वनकर्मियों व ग्रामीणों को दिखी तो संक्रमण के चलते उसकी पूंछ में खून टपकने की चर्चा रही। इसके बाद भी वह वनकर्मियों की पहुंच से दूर ही रही। यही कारण है कि लंबे समय से पूंछ में संक्रमण होने के बाद भी उसका अब तक वन्यजीव चिकित्सक इलाज नहीं कर पाए हैं।


दो बार जयपुर की टीम लौटी
बाघिन एसटी -9 का रेडियो कॉलर खराब होने के कारण वनकर्मियों को उसकी लोकेशन लेने में कठिनाई आई। पूर्व में जयपुर चिडिय़ाघर के चिकित्सकों का दल एवं रेडियो कॉलर लगाने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम भी सरिस्का आई, लेकिन बाघिन की लोकेशन नहीं मिल पाने और ट्रंक्यूलाइज नहीं होने के कारण न तो उसकी पूंछ का इलाज हो सका और न ही बाघिन को रेडियो कॉलर लगाया जा सका।


बाघिन एसटी-5 की तलाश में जुटी टीम
गत करीब 20 दिनों से लापता हुई बाघिन एसटी-5 का बुधवार तक कोई पता नहीं चल सका। सरिस्का बाघ परियोजना के सीसीएफ डॉ. गोविंदसागर भारद्वाज ने बताया कि अभी तक बाघिन एसटी-5 की लोकेशन या उसके बारे में पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। वनकर्मियों की टीम सरिस्का की उमरी, देवरी टैरिटरी के अलावा आसपास के जंगल, राजगढ़ वनखंड व जमवारामगढ़ क्षेत्र में कॉम्बिंग में जुटी है। वहीं, उमरी व आसपास के क्षेत्रों में कैमरे से लोकेशन ढूंढऩे के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कैमरों में बाघिन की तस्वीर नहीं आ पाई है।

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