Video : #Falaharimahara यौन शोषण मामला : आस्था के नाम पर छल, इसके लिए हम खुद जिम्मेदार हैं और कोई नहीं

Video : #Falaharimahara यौन शोषण मामला : आस्था के नाम पर छल, इसके लिए हम खुद जिम्मेदार हैं और कोई नहीं
Allegations of sexual abuse on falahari maharaj

Rajeev Goyal | Publish: Sep, 22 2017 12:31:11 PM (IST) Alwar, Rajasthan, India

पत्रिका ने परिचर्चा की तो यही निष्कर्ष निकलकर सामने आया कि आस्था के नाम पर छल होता है तो जिम्मेदार हम भी हैं, जो भेड़ चाल हो जाते हैं।

अलवर.

फलाहारी महाराज पर युवती से दुष्कर्म करने का आरोप लगने के बाद आस्था के नाम पर छल पर नए-नए सवाल सामने आने लगे हैं। सबकी अलग-अलग धारणा भी है। इस विषय पर पत्रिका ने परिचर्चा की तो यही निष्कर्ष निकलकर सामने आया कि आस्था के नाम पर छल होता है तो जिम्मेदार हम भी हैं, जो भेड़ चाल हो जाते हैं। कुछ ने देश की सरकारों को भी बराबर का जिम्मेदार बताया। कहा कि जितना पैसा आस्था पर खर्च हो रहा है उतना शिक्षा और वैज्ञानिकता पर खर्च हो तो एेसी तस्वीर सामने नहीं आती।
पैसे की चाहत में अंधे नहीं बनें

 

पैसा या कोई और मन की इच्छा को पूरा करने के लिए अंधे नहीं बनें। हर घटना या परिस्थिति का मन: विश्लेषण भी करें। कुछ व्यक्तियों का व्यक्तित्व प्रभावशील होता है। जिसके कारण आमजन को उनके प्रति आकर्षण होता है। फिर व्यक्ति उससे सम्बंधित संस्था से जुड़ता है। प्रभाव में आने के बाद व्यक्ति अच्छे व बुरे को भी गौण करने लगता है। जो गलत है। अच्छे व बुरे को समझने के लिए विश्लेषण करना चाहिए। ताकि गलत चीजों से बचा जा सके। एेसा नहीं हो कि कहीं भीड़ पहुंच रही है तो हमें भी वहीं जाना है।
-डॉ.ओपी गुप्ता, मनोचिकित्सक, अलवर

 

धर्म की नहीं आध्यात्म की बात हो


हमारे देश में धर्म की नहीं आध्यात्म की बात होनी चाहिए। लेकिन सत्ता ने एेसा नहीं होने दिया। राज करने वाले ही जनता को वैज्ञानिक नहीं बनने दिया। हम भारत को कैसा भारत बनाना चाह रहे हैं। समझ से परे है। आस्था के नाम पर हम वो पढ़ रहे हैं। जिसकी जरूरत ही नहीं है। अलवर में भी यही हुआ है। यहां पिछले दिनों भव्य मंदिर बनाया गया। फिर हजारों की संख्या में महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। मुझे लगता है। इस तरह के आयोजन की जरूरत नहीं है।
-डॉ. वीरेन्द्र विद्रोही, सामाजिक कार्यकर्ता

 

हम चुप नहीं बैठे हैं


इस मामले में भी हम चुप नहीं हैं, लेकिन भाजपा तो धर्म को राजनीति से जोड़ती रही है। हम धर्म में राजनीति को बिल्कुल शामिल नहीं करते हैं। यहां भी सब सामने आ जाएगा। महाराज से किसके ज्यादा सम्बंध रहे। किनके लिए उन्होंने ज्यादा काम किया। हमारा यही कहना है कि लोगों की धार्मिक भावना से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाए। यदि दोषी पाए तो। जांच में दोष मिले तो कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कानून की कमजोरी का फायदा उठाने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
-टीकाराम जूली, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस, अलवर

 

यह अविश्वसनीय प्रकरण


यह अविश्वसनीय प्रकरण है। जिस तरीके से प्रकरण सामने आया। पहले अलवर पुलिस पर विश्वास ही नहीं किया गया। छत्तीसगढ़ में फाइल तैयार की गई। इसके बाद जब मामला अलवर पहुंचा तो अलवर पुलिस तुरंत मामला दर्ज किया है। मैं इस बात का गवाह हूं कि १५ - १६ दिन से फलाहारी महाराज अस्वस्थ हैं। नौ दिन पहले शौच में खून भी आया। हम बेटियों की रक्षा करने में पीछे नहीं है। नहीं किसी का पक्ष ले रहा हूं। जांच के बाद सब सामने आ जाएगा। कोई चाल है तो भी पता चल जाएगी।
-पं. धर्मवीर शर्मा, जिलाध्यक्ष, भाजपा अलवर

 

पुरानी व्यवस्था नहीं छोड़ रहे


मुझे लगता है यह व्यवस्था का कसूर है। एक तो हम २१वीं सदी में आ गए। लेकिन भारत में बनी चली आ रही व्यवस्था को नहीं छोडऩा चाह रहे। जिससे किसी का उद्धार भी नहीं है। वैज्ञानिक जीवन की ओर आगे बढऩे की बजाय पुराने ढर्रे पर ही चले आ रहे हैं। सरकारों ने भी इसके लिए कुछ नहीं किया। जिसके कारण जनता उसी परिपाटी पर चली आ रही है।
-के.एल. सिरोही, सामाजिक कार्यकर्ता

 

देश चलाना है या मठ


देश संविधान के अनुसार चलना चाहिए। सरकारों को भी यह सोचना चाहिए कि उनको देश चलाना है या मठ चलाने हैं। हम धर्म को आस्था के लिए महामंडल कर देते हैं। पैसा ज्यादा वहां लगा रहे हैं। जबकि जरूरत है स्कूल, साहित्य व शिक्षा पर लगाने की। तभी तो अशिक्षा इन जगहों पर लेकर पहुंचती हैं। फिर इस तरह की घटनाएं होती हैं। इस पर सरकार को कड़े निर्णय लेने की जरूरत है।
-जया गुप्ता, साहित्यकार

 

पहचान के हुनर को काम में लें


आपकी किसी में आस्था है तो रखें। लेकिन पहचान के हुनर से भी परखते रहें। कौन व्यक्ति कैसा व्यवहार प्रारंभिक तौर पर या सामान्य मेल-जोल में कर रहा है?। यह पहचान का हनुर तो अपने पास लाना ही होगा। यह सामने वाले व्यक्ति के बातचीत के तरीके से भी दिखता है। खुद का विवेक भी इसमें काम लें। जहां कहीं शक जाहिर हो उससे दूरी बनाने में समय नहीं लगाएं।
-लता भोजवानी, छात्रासंघ अध्यक्ष, राजकीय जीडी कॉलेज, अलवर

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