Video : सुप्त पड़ी रोडवेज की तीसरी आंख, बसों की जांच रहे स्पीड

Video : सुप्त पड़ी रोडवेज की तीसरी आंख, बसों की जांच रहे स्पीड

Rajeev Goyal | Publish: Aug, 05 2017 04:45:00 PM (IST) Alwar, Rajasthan, India

कैमरे केवल बसों की स्पीड जांचने के काम आ रहे हैं। जबकि ज्यादातर बसों में पहले से स्पीड गवर्नर लगे हुए हैं।

अलवर.
यात्रियों की सुरक्षा व बस के अंदर की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने के लिए राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की ओर से रोडवेज बसों में कैमरे को लगवा दिए गए, लेकिन नियमित मॉनिटरिंग के अभाव में रोडवेज की ‘तीसरी आंख’ सुप्त पड़ी है। वर्तमान में ये कैमरे केवल बसों की स्पीड जांचने के काम आ रहे हैं। जबकि ज्यादातर बसों में पहले से स्पीड गवर्नर लगे हुए हैं।

 

यह मिलना था फायदा


बसों में लगे कैमरों से रोडवेज को दो मुख्य फायदे होने थे। पहला बस की पल-पल की स्पीड की जानकारी रोडवेज को मिलती। दूसरा बस में बैठी सवारियों की तस्वीरें आती रहती। इससे यात्रा के दौरान चालक-परिचालकों की कारगुजारी व यात्रियों को होने वाली असुविधा का रोडवेज को पता चलता। लेकिन एेसा नहीं हुआ।

 

बसों में कैमरों के बावजूद कई रूटों पर यात्रियों को बसों में खड़े होकर यात्रा करनी पड़ रही है। हालांकि, रोडवेज अधिकारियों की मानें तो बसों में कैमरे व बीटीएस सिस्टम लगने से डीजल एवरेज में अवश्य सुधार आया है। दरअसल, एक ही स्पीड में गाड़ी के चलने पर डीजल कम खर्च होता है। कई बार चालक-परिचालक जल्दबाजी के चक्कर में गाड़ी को भगाते है। इससे डीजल अधिक लगता है। कैमरे लगने के बाद चालक बस की स्पीड पर ध्यान देने लगे हैं।

 

अलवर आगार में कुल बसें- १३९
इनमें सें कंडम- २४
कैमरे लगे- ९७ बस
मत्स्य नगर आगार में कुल बसें-१०४
इनमें से कंडम बसें- १५
कैमरे लगे- किसी में नहीं
अलवर में ९७ बसों में लगे कैमरे

 

रोडवेज ने करोड़ों रुपए खर्च कर मई २०१६ में बसों में कैमरे लगवाना शुरू किया। अलवर में इस दौरान अलवर आगार की ९७ बसों में कैमरे लगाए गए। इसके लिए अलवर आगार के वर्कशॉप में कंट्रोल रूम भी बनाया गया। जिसमें कैमरा लगाने वाले कम्पनी का एक कर्मचारी भी बिठाया गया। लेकिन हुआ ये कि इनमें से २४ बसें कुछ दिनों बाद कंडम होकर डिपो में खड़ी हो गई। शेष बसों में लगे कैमरे शोपीस बनकर रह गए।

 

यह सही है कि कैमरों से जितना फायदा मिलना चाहिए था, उतना नहीं मिल रहा है। अब इनका ज्यादा से ज्यादा फायदा लिया जाएगा। जो खामियां सामने आएंगी, उसमें सुधार कराया जाएगा।
रमेशचंद शर्मा, मुख्य प्रबंधक अलवर

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