अगर आप रात में वाहन चला रहे हैं तो रखें ध्यान, हुआ कुछ ऐसा जिससे बढ़ी हादसे की आशंका

सर्दियों में कोहरे के कारण अधिक सडक़ हादसे होते हैं, अब हुआ कुछ ऐसा जिससे बढ़ सकते हैं हादसे।

By: Rajiv Goyal

Published: 15 Jan 2018, 04:17 PM IST

जले में सर्दी जानलेवा साबित हो रही है। कोहरे व सर्दी में वाहन भिड़ंत के चलते सडक़ें खून से लाल हो रही हंै। वहीं, सडक़ों की दशा और उनसे गायब सफेद पट्टिकाओं के लिए जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए है। दरअसल, सर्दी व कोहरे में वाहन चालकों के लिए सडक़ पर बनी सफेद पट्टिका मददगार साबित होती हैं। चालक पट्टिकाओं के आधार पर ही सडक़ का अनुमान लगाता है। लेकिन जिले में स्थिति यह है कि ज्यादातर सडक़ों से सफेद पट्टिका गायब है। जहां पट्टिकाएं हैं तो वे धूल-मिट्टी से अटी पड़ी हैं। इससे रात्रि में वाहन चालकों को नजर नहीं आती और दुघर्टना का अंदेशा बना रहता है।

हर साल एक तिहाई दुघर्टनाएं सर्दियों में

भरतपुर के गांव बहज के पास कुछ दिनों पहले कोहरे के चलते गाड़ी पोखर में उतरने से अलवर के चार जनों की जान चली गई। इसके अगले दिन घने कोहरे के कारण अलवर-भिवाड़ी मेगा हाइवे पर भिण्डूसी के पास एक-एक कर पांच वाहन आपस में टकरा गए। दुघर्टना में रोडवेज बस में सवार करीब डेढ़ दर्जन लोग घायल हो गए। पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो हरसाल सडक़ दुघर्टनाओं में हुई मौतों में से लगभग एक तिहाई मौतें सर्दियों में होती हैं। पिछले साल अलवर में सडक़ दुघर्टनाओं में करीब 500 लोगों की जानें गई, जिनमें से लगभग 150 जानें सर्दियों में सडक़ पर व्हाइट लाइन के अभाव में दुघर्टना में गई।

यह है नियम

भारतीय सडक़ सुरक्षा नियम के तहत प्रत्येक सडक़ के दोनों ओर ऐज लाइन (सफेद पट्टिका) होनी चाहिए, ताकि सडक़ पर चलने वाले वाहन सडक़ से नीचे नहीं उतरें। सडक़ के बीचोंबीच सेन्ट्रल लाइन होनी चाहिए। यह सडक़ को दो भागों में बांटती है। इसके अलावा चौराहा, तिराहा आदि की जानकारी के लिए सडक़ पर जेब्रा लाइन होनी चाहिए। निमयानुसार सडक़ पर बनी सभी पट्टिकाओं पर हर छह माह में पेंट होना चाहिए, ताकि इनकी दृश्यता बनी रहे और वाहन चालकों को वाहन चलाते समय सुविधा रहे।

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