कुश्ती दंगल को देखने यहांं पहुंचते है हजारों लोग, हजारों में होता है सबसे बड़ा कामडा

कुश्ती दंगल को देखने यहांं पहुंचते है हजारों लोग, हजारों में  होता है सबसे बड़ा कामडा

Dharmendra Yadav | Publish: Feb, 15 2018 12:13:58 PM (IST) | Updated: Feb, 15 2018 12:15:14 PM (IST) Alwar, Rajasthan, India

जूनियर, सब जूनियर व सीनियर वर्ग के पहलवानों का हुआ आमना-सामना, सबसे बड़ा कामड़ा 15 हजार का

अरावली की गोद में बसा अलवर प्राकृतिक छटाओं के साथ सतरंगी संस्कृति से लबरेज है। ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है चूहड़सिद्ध। इस स्थान पर शिवरात्रि पर्व पर दो दिवसीय भर मेला लगता है। जहां आस पास स्थित गांवों के हर धर्म व संप्रदाय के लोग इस स्थल पर पहुंचते है। लोगों की मान्यता है कि इस स्थान पर मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
चूहड़ सिद्ध के मेले में दूसरे दिन कुश्ती दंगल का आयोजन होता है। इस बार भी हर वर्ष की भांति कुश्ती दंगल का आयोजन हुआ। इसमें राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा व मध्य प्रदेश के करीब 175 पहलवानों ने जोर आजमाया, जबकि 31 हजार की कुश्ती बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई।

कुश्ती कोच मातादीन भाटी ने बताया कि दंगल में 250 से 300 पहलवान शामिल हुए, लेकिन 175 पहलवान कुश्ती दंगल में उतरें। दंगल में 51 रुपए से लेकर 15 हजार राशि का कामडा हुआ। इनमें 150 रुपए तक के मुकाबले में छोटी उम्र के पहलवान आसपस में भिड़े। जबकि 200 रुपए तक की कुश्ती में बड़े पहलवान शामिल हुए। दंगल में तीन श्रेणी जूनियर, सब जूनियर व सीनियर वर्ग के युवाओं ने हिस्सा लिया। दंगल में 1100, 2100, 4100, 5100, 11 हजार, 15 हजार व 31 हजार का कामड़ा हुआ। इनमें 31 हजार के मुकाबले में 12 मिनट तक कुश्ती होनी थी। लेकिन बीच में कुश्ती रुक गई। इसलिए अंतिम मुकाबला बिना नतीजा समाप्त हो गया। प्रत्येक कुश्ती के बाद विजेता का पुरस्कार दिया गया। इस दौरान कई गांवों के लोग मौजूद थे। युवाओं के साथ बुजुर्गों ने भी कुश्ती का आनंद लिया।
हजारों की संख्या पहुंचे लोग
इस कुश्ती दंगल को देखने के लिए स्थानीय ग्रामीणों सहित आस-पास के गांव के लोग पहुंचे। वही दूर से नजारा ऐसा लग रहा था, जैसे किसी मिनि स्टेडियम में यह प्रतियोगिता चल रही हो। कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान जैसे ही पहलवान एक दूसरे से हाथ मिलाते वैसे ही ग्रामीण अपनी पसंद के पहलवान के पक्ष में जोरदार पैरवी करते रहेे। इस दौरान पहलवानों के दाव पेंचों का जिक्र करते हुए लगातार जीत हार की उद्घोषणा की जाती रही। पहलवानों के दावं पेच को देखने के लिए उमड़ा जन सैलाब का नजारा देखते ही बन रहा था। ग्रामीण मौजूद लोगों द्वारा जीत-हार का निर्णय करते हुए पहलवानों का उत्साह बढ़ाया।

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