हरियाणा में हिंदी से दिखावे का प्रेम, सालों से हिंदी विभाग में जरूरी स्टाफ नहीं

Haryana News: हिंदी को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए स्टाफ नहीं होने से यह महकमा सिर्फ (Hindi Language Department Haryana) औपचारिकता बनकर रह गया...

 

(चंडीगढ़,अंबाला): हरियाणा में हिंदी की हिमायत कैसे की जा रही है इसकी बानगी हिंदी भाषा विभाग की हालत से मिल जाती है। विभाग में हिंदी को बढ़ावा देने का काम अकेले निदेशक के जिम्मे है। सालों पहले बनाए गए विभाग में कर्मचारी नहीं है।

हिंदी का हर काम ठप...

अकेले निदेशक ही इस विभाग में तैनात हैं जिससे हिंदी के विकास के काम ठप है। हिंदी शब्दावली की पुस्तक का प्रकाशन भी कई वर्षों से बंद है। विभाग तो बना दिया गया, लेकिन इस महकमे में अफसरों या कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए किसी सरकार में पहल नहीं हुई। हिंदी को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए स्टाफ नहीं होने से यह महकमा सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया। इसके अलावा साल में एक बार सरकारी भाषा हिंदी की शब्दावली जारी करने की योजना भी अधर में लटक गई।

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अदालतों में होगा हिंदी में काम...

उधर, अदालतों और अधिकरणों में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 के संशोधन के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर लगने के बाद अब इसे विधानसभा के विशेष सत्र में पारित कराने की तैयारी है। प्रदेश में हिंदी को अपनाने के लिए हरियाणा राजभाषा अधिनियम 1969 में राज्य विधानमंडल द्धारा पारित किया गया था। तभी से हिंदी को हरियाणा की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला हुआ है। नए संशोधन से हाई कोर्ट के अधीनस्थ और राज्य सरकार द्धारा गठित सभी न्यायाधिकरणों में हिंदी में देवनागरी लिपि में काम किया जाएगा।

 

सीएम को सौंपा था पत्र...

प्रदेश के 78 विधायकों, एडवोकेट जनरल और सैकड़ों वकीलों ने हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को मांगपत्र सौंपा है। इसी के बाद न्यायालयों में कामकाज के लिए हिंदी भाषा को अधिकृत करने का फैसला लिया गया। इससे आमजन भीन केवल पूरी न्याय प्रक्रिया को अपनी भाषा में समझ सकेगा, बल्कि कोर्ट के समक्ष अपनी बात भी रख सकेगा।

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Prateek Desk
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