नशे की लत में बर्बाद युवा पीढ़ी, कोई भी राजनीतिक दल इसे नहीं बनाता चुनावी एजेंडा

नशे की लत में बर्बाद युवा पीढ़ी, कोई भी राजनीतिक दल इसे नहीं बनाता चुनावी एजेंडा

Ruchi Sharma | Updated: 27 Apr 2019, 12:16:57 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

नशे की लत में बर्बाद युवा पीढ़ी, कोई भी राजनीतिक दल इसे नहीं बनाता चुनावी एजेंडा

अम्बेडकरनगर. देश की कुल आबादी का 65 प्रतिशत संख्या युवाओं का है और इसकी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान एक प्राइवेट चैनल पर इंटरव्यू देते समय की थी। प्रधानमंत्री ने युवाओं के प्रतिशत पर खुशी जाहिर करते हुए इसे जवान देश की संज्ञा दी है। इन युवाओं के शिक्षा और रोजगार की चर्चा तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों करते हैं, जिस पर चुनाव के इस मौसम में जबरदस्त आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, लेकिन देश की इस युवा पीढ़ी में जो खराब लत लग चुकी है, उसकी तरफ किसी भी राजनीतिक दल की निगाह नहीं जा रही है, या फिर शायद वे इसे मुद्दा बनाना नहीं चाहते और शायद इसी वजह से युवा पीढ़ी में अधिकांश युवा अपनी जिंदगी तक बर्बाद कर ले रहे हैं।

बिहार से भी नहीं लेते सीख

बिना सरकारी इच्छा शक्ति के इस बड़े कारोबार पर नियंत्रण नहीं लगाया जा सकता है और यह कदम सबसे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने था। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बिहार में देशी और अंग्रेजी शराब की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का मुद्दा अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया और सरकार बनने के बाद उसे पूरे बिहार में लागू भी किया। नीतीश के इस कदम को न सिर्फ बिहार के लोगों ने बल्कि देश की तमाम राजनीतिक पार्टियों ने भी नीतीश कुमार की तारीफ की, लेकिन नीतीश सरकार को शराब व्यवसाय पर रोक लगाने के बाद बिहार सरकार में आबकारी विभाग को जबरदस्त आर्थिक चोट पहुंच रही है। बावजूद इसके नीतीश कुमार ने प्रदेश के आर्थिक चोट के बावजूद इस अभियान को चलाये रखा है।

यहां बर्बाद हो रहे हैं अधिकांश युवा

नशे की लत का आलम यह है कि पढ़ने वाला छात्र हो या मेहनत मजदूरी करने वाला श्रमिक या फिर सरकारी नौकरियों में काम करने वाला युवा हो, अधिकांश खैनी तम्बाकू और सिग्रेट जैसी लत के तो आसानी से शिकार हो गया है। इसी में से कई युवा तो और आगे बढ़ते हुए शराब और ड्रग तक की लत मे पूरी तरह लिप्त हो चुके हैं। कई लोग तो ऐसे भी है, जिनका घर खेत सबकुछ इस नशे के चक्कर मे बिक चुके हैं और कई तो कैंसर जैसी घातक बीमारी की चपेट में आकर अपनी जीवनलीला भी समाप्त कर चुके हैं और कई का तो परिवार ही बिखर चुका है।

नशे की लत के कारण बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी को को बचाने की जिम्मेदारी सरकार की ही होती है, लेकिन इस मुद्दे ओर कोई भी सरकार कदम नही उठाना चाहती, क्योंकि अपने शासनकाल में इस व्यवसाय से होने वाली बड़ी आमदनी को कोई समाप्त नहीं करना चाहेगा।

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