scriptBrahmastra and Neelastra insecticide works naturally organic crop | किसानों के लिए अच्छी खबर, ब्रम्हास्त्र-नीलास्त्र से फसल को मिली प्राकृतिक सुरक्षा, मिला कम दाम में ज्यादा असरदार कीटनाशक | Patrika News

किसानों के लिए अच्छी खबर, ब्रम्हास्त्र-नीलास्त्र से फसल को मिली प्राकृतिक सुरक्षा, मिला कम दाम में ज्यादा असरदार कीटनाशक

अगर आप भी अपनी फसलाें में लगने वाले कीटों से परेशान हैं तो आपके लिए खुशखबरी है। अब इन सभी टेंशन से आपको नीलास्त्र और ब्रम्हास्त्र बचाएंगे।

अम्बेडकर नगर

Published: October 28, 2020 09:44:32 am

अंबेडकरनगर. अगर आप भी अपनी फसलाें में लगने वाले कीटों से परेशान हैं तो आपके लिए खुशखबरी है। अब इन सभी टेंशन से आपको नीलास्त्र और ब्रम्हास्त्र बचाएंगे। दरअसल नीलास्त्र और ब्रम्हास्त्र कोई मिसाइल नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक कीटनाशक है। इसे किसी आधुनिक प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने तकनीकों के सहारे नहीं तैयार किया है, बल्कि इसे अंबेडकर नगर जिले की एक महिला किसान ने बनाया है। जिले के अकबरपुर ब्लॉक के ग्राम सैदापुर की निवासी कांती देवी ने अपने दिमाग का इस्तेमाल करके यह प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किया है। नीलास्त्र और ब्रम्हास्त्र नाम का कीटनाशक पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर करने वाला एक घोल है। फिलहाल जनपद स्तर पर इसकी मांग बढ़ी है और कांती देवी को उम्मीद है कि जल्द ही इसकी मांग पूरे प्रदेश में तेज हो जाएगी, क्योंकि इस प्राकृतिक कीटनाशक का कोई साइडइफेक्ट नहीं और रिजल्ट भी बाकी कीटनाशकों की अपेक्षा काफी बेहतर है।

किसानों के लिए अच्छी खबर, ब्रम्हास्त्र-नीलास्त्र से फसल को मिली प्राकृतिक सुरक्षा, मिला कम दाम में ज्यादा असरदार कीटनाशक
किसानों के लिए अच्छी खबर, ब्रम्हास्त्र-नीलास्त्र से फसल को मिली प्राकृतिक सुरक्षा, मिला कम दाम में ज्यादा असरदार कीटनाशक

कम लागत में फायदे ज्यादा

खेती में लगने वाले कीड़े, रोगों समेत जानवरों से बचाने की चुनौती में किसानों के लिए यह प्राकृतिक कीटनाशक घोल काफी मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा अभी तक रोग नियंत्रण में रसायन के इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभाव से किसान बच रहे हैं। इस प्राकृतिक कीटनाशक के इस्तेमाल से फसल शुद्ध और किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम हुआ है।

अभियान से जुड़ी महिलाएं

नीलास्त्र और ब्रम्हास्त्र नाम के प्राकृतिक कीटनाशक का निर्माण करने वाली कांती देवी के मुताबिक पशुओं और कीटों से फसलों को बचाने के लिए ग्रामीण महिलाओं को इस अभियान से जोड़ा है। इसमें कीटों से बचाने के लिए 200 लीटर पानी में गाय का गोबर, नीम की पत्ती, धतूरा की पत्ती, पपीते की पत्ती को पीस कर मिलाया जाता है। इसके बाद इसमें बरगद के पेड़ के नीचे की 250 ग्राम मिट्टी डालकर घोल तैयार किया जाता है। वहीं पोषक तत्वों को पूरा करने के लिए आम, पीपल, बरगद, गोबर, गुड़ मिलाकर घोल तैयार किया जाता है।

कम लागत में अच्छा मुनाफा

कृषि विज्ञान केंद्र पांती के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामजीत ने बताया कि प्राकृतिक घोल फसलों में नाइट्रोजन की पूर्ति करता है। गोबर, मिट्टी में अधिकांश ऐसे तत्व मिलते हैं। नीम और धतूरे से सूक्ष्म कीट समाप्त होते हैं। अगर किसान ऐसे घाेल का फसलों पर प्रयोग करते हैं तो उन्हें कम लागत में अच्छा और आर्गेनिक उत्पादन मिलता है। वहीं उप कृषि निदेशक रामदत्त बागला ने बताया कि कांती देवी को कृषि विभाग ने कृषि सखी नामित किया है। वह क्षेत्र के 10 महिला समूहों में ऐसे उत्पादनों का निर्माण कराती हैं ताकि लोगों को कम से कम दाम में अच्छा मुनाफा मिल सके।

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