लड़कियों और महिलाओं की कट रही चोटी पर हुआ बड़ा खुलासा, सुनिए पीड़ित की जुबानी

उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में लड़कियों और महिलाओं के साथ चोटी कटने की सैकड़ों घटनाएं हो चुकी हैं।

By: आकांक्षा सिंह

Published: 22 Aug 2017, 10:22 AM IST

अम्बेडकर नगर. राजस्थान से शुरू होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अब पूर्वी उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में लड़कियों और महिलाओं के साथ चोटी कटने की सैकड़ों घटनाएं हो चुकी हैं। अम्बेडकर नगर जिले में भी लगभग एक दर्जन से अधिक लड़कियों के साथ चोटी कटने की वारदात हो चुकी है, लेकिन इस घटना को लोग कभी अफवाह बताकर तो कभी मजाक समझ कर बात को रफा दफा कर देते हैं। आज हम ऐसे ही एक पीड़ित लड़की के साथ हुई चोटी कटने की घटना की पूरी कहानी उसी की जुबानी सुनाने जा रहे हैं, जिसके बाद आप खुद ही अंदाजा लगाइएगा कि यह घटना क्या महज इत्तेफाक है या फिर इसके पीछे कोई और ही सच्चाई है। जिसकी वास्तव में बड़े स्तर पर जांच होनी चाहिए।


जिले में लगातार चोटी कटने की घटना हो रही है। इसी बीच जिले की टांडा कोतवाली क्षेत्र के भरहा गांव की लड़की गायत्री की चोटी शाम को उस समय अचानक कट गई जब वह अपने घर के बर्तन को साफ़ कर रही थी। गायत्री ने बताया कि वह खाना बनाने के लिए बर्तन की सफाई कर रही थी कि अचानक उसके पीछे चोटी पर कोई बड़ा सा कीड़ा आकर बैठा और जब उसको इसका एहसास हुआ तो उसने जल्दी से हाथ से उसको झटक दिया, जिसके बाद कीड़ा तो उड़ गया, लेकिन बालों पर हाथ फेरने से चोटी बालों से अलग होकर उसके हाथ में आ गई। गायत्री ने बताया कि चोटी कटने के बाद उसके सिर में अचानक तेज जलन होने लगी और वह बेहोश हो गई।


उपचार के लिए अस्पताल में हुई भर्ती

 
गायत्री के साथ हुई इस घटना और उसके बेहोश हो जाने के बाद उसके परिवार के लोग घबरा गए और तुरंत ही उसको लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टांडा पहुंचे। जहां डाक्टरों ने गायत्री को भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया। थोड़ी देर में होश में आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। इस घटना के बाद से ही गायत्री काफी घबराई हुई है और उसको लगातार चक्कर आ रहे हैं। गायत्री की नानी सोना देवी ने बताया कि छोटी काटने के समय वह मौके पर तो नहीं थी, लेकिन बर्तन पहले वाही साफ़ करने जा रही थीं और गायत्री ने उनके हाथ से बर्तन लेकर खुद साफ़ करने लगी थी, जिसके बाद यह घटना हुई। फिलहाल अस्पताल में इलाज के बाद गायत्री की हालत अब काफी ठीक है।


कैसे कह सकते हैं कि यह सिर्फ अफवाह है


जिले में चोटी कटने की यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते 15 दिन के अन्दर लगभग एक दर्जन महिलाओं और लड़कियों के साथ चोटी कटने की घटना हो चुकी है। जब इसकी शुरुआत हुई तो लोगों ने इसको गंभीरता से लेने के बजाय इसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। कुछ लोग इसको किसी सिरफिरे की करतूत बता रहे थे तो कोई इसे खुद ही चोटी काटकर स्वयं को हाई लाईट करने की बात कह रहा था। सवाल यह उठता है कि अपनी खुद की चोटी काटने से किसी महिला या लड़की को कौन सा लाभ हो जाएगा।

शुरूआती दौर में जब कहीं चोटी काटने का मामला आया तो पहले तो यह काफी तूल पकड़ा, लेकिन जैसे जैसे यह घटना बढती गई तो इसको पुलिस वालों ने भी अफवाह बताना शुरू कर दिया और इस तरह की अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देना शुरू कर दिए। हो सकता है इन घटनाओं में कुछ ऐसे मामले भी रहे हों, जो सिर्फ लोगों को हैरान करने के लिए किये गए हों, लेकिन सभी मामले झूठे हैं ऐसा नहीं कहा जा सकता। गायत्री के मामले में भी कहीं से कोई झूठ नजर नहीं आता, क्योंकि एक सामन्य से परिवार की 18-19 साल की गायत्री, जो आठवीं क्लास तक पढ़ने के बाद पढ़ाई छोड़कर घर पर ही रह रही है। उसे आखिर अपनी चोटी काटने से क्या लाभ मिलने वाला है। इस तरह की घटनाओं में कोई सहायता राशि भी तो सरकार की तरफ से नहीं दी जा रही है, जिसके लालच में कोई अपनी चोटी खुद काट ले। जरूरत यह है कि इस मामले की गहन जांच हो और जैसा कि गायत्री ने बताया है कि किसी बड़े आकार के कीड़े की वजह से उसकी चोटी कटी है, इसकी सच्चाई सबके सामने आ सके।

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आकांक्षा सिंह
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