इस ऐतिहासिक रामलीला का मंचन देख श्रद्धा में लीन हुए दर्शक

इस ऐतिहासिक रामलीला का मंचन देख श्रद्धा में लीन हुए दर्शक

Ruchi Sharma | Publish: Oct, 14 2018 10:59:58 AM (IST) | Updated: Oct, 14 2018 10:59:59 AM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

इस ऐतिहासिक रामलीला का मंचन देख श्रद्धा में लीन हुए दर्शक

अम्बेडकर नगर. बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला पर्व दशहरा के आगमन पर पूरे देश में रामलीला की धूम मची हुई है।अम्बेडकर नगर जिले के टांडा कसबे में भी सौ साल से अधिक पुरानी रामलीला कमेटी में होने वाली रामलीला बच्चे बूढ़े और महिलाओं के साथ साथ युवाओं के आस्था और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस आधुनिक युग में सिनेमा, टीवी और इंटरनेट जैसे मनोरंजन के तमाम साधन उपलब्ध होने बावजूद यहां की रामलीला सभी के लिए पहली पसंद बनी हुई है। रंगमंच पर रामलीला के पात्रों का अभिनय देख दर्शक श्रद्धा भाव मे लीन हो जाते हैं।

बिना किसी पारिश्रमिक के करते हैं अभिनय

सौ साल से अधिक पुरानी टांडा की रामलीला कमेटी की सबसे ख़ास बात यह है कि इसके सारे कलाकार यहीं के स्थानीय लोग हैं। रामलीला कमेटी के निर्देशक बजरंगी लाल सोनी बताते हैं कि सभी पत्रों का ड्रेस स्थानीय स्तर पर ही तैयार किया गया है, जो किसी टीवी सीरियल से कम नहीं दिखाई पड़ता । अभिनय करने वाले बिना किसी पारिश्रमिक के न सिर्फ रामलीला के विभिन्न पात्रों का अभिनय करते हैं, बल्कि रोज होने वाले खर्च के लिए भी धन का सहयोग करते हैं।

कमेटी द्वारा स्वयं तैयार की गई है पटकथा

दस दिनों तक चलने वाली इस रामलीला की समाप्ति रावण वध के साथ ही विजय दशमी के दिन राम लीला का समापन हो जाता है। भगवान श्रीराम के जीवन दर्शन पर आधारित इस रामलीला की पटकथा भी यही के स्थानीय लोगों स्वयं तैयार किया गया है, जिसमे हिंदी के आलावा अरबी, उर्दू और फ़ारसी भाषा का भी प्रयोग किया गया है। जो यहां के सथानीय लोगों को बहुत पसंद आती है। कमेटी के अध्यक्ष पंडित राकेश मिश्रा ने बताया कि दस दिन तक लोगों नीतिगत ज्ञान देने के साथ ही लोगों को स्वस्थ मनोरंजन देने के लिए रामलीला का माध्यम सबसे उत्तम है।

रावण और वाणासुर के बीच स्वयंबर सभा मे हुआ विवाद

गुरु विश्वामित्र का साथ जनक पुर पहुंचे भगवान राम और भाई लक्ष्मण सीता जी के स्वयंवर में भाग लेते हैं। यहां बहुत से राजा धनुष उठाने का प्रयत्न करते हैं, लेकिन किसी से भी धनुष उठता तक नहीं। बाद में भगवान राम द्वारा धनुष को तोड़ दिए जाने के बाद सीता जी के साथ भगवान श्री राम का विवाह का मनोरम कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसे देख दर्शक झूम उठे। स्वयंबर सभा के दौरान रावण और वाणासुर भी पहुंच गए, जिनके बीच होने वाला संवाद भी काफी रोमांचकारी रहा, जिसके देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक देर रात तक बैठे रहे | भगवान् राम के विवाह के अवसर पर वैवाहिक मंगल गीत को भी दर्शकों ने खूब सराहा |

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