रास्ता न होने के कारण 2 किमी झेलगी में ढोकर लाई गई प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला, दूसरी को 2 किमी चलना पड़ा पैदल

Chhattisgarh Government: आज भी सरगुजा के कई गांव मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे, गांव तक पहुंचने का रास्ता तक नहीं बना

By: rampravesh vishwakarma

Updated: 05 May 2020, 02:37 PM IST

अंबिकापुर. सरकार चाहे विकास का जितना भी ढिंढोरा पीट ले पर सरगुजा में जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरगुजा का आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र आज भी विकास से कोसों दूर है। यहां के लोग शिक्षा, सडक़, बिजली, पानी व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। ऐसा ही एक मामला रविवार को सामने आया है। मैनपाट ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम करम्हा का।

एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंचाने के लिए महतारी एक्सप्रेस तो समय पर पहुंच गई पर रास्ता खराब होने के कारण घर से 2 किमी दूर ही एंबुलेंस को रोकना पड़ा। इस पर परिजन ने प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को झेलगी में टांग कर एंबुलेंस तक पहुंचाया। इसके बाद महिला को कमलेश्वरपुर स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया।

गौरतलब है कि मैनपाट ब्लॉक से 25 किमी दूर ग्राम करम्हा निवासी 25 वर्षीय श्रीमति पति जयगोपाल गर्भवती है। रविवार की उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। प्रसव पीड़ा होने पर गांव की मितानिन ने अस्पताल पहुंचाने के लिए महतारी एक्सप्रेस को फोन किया। सूचना पर महतारी एक्सप्रेस दोपहर लगभग 3 बजे पहुंच गई।

गांव में जाने का रास्ता नहीं होने के कारण एंबुलेंस को गांव से 2 किमी पीछे कच्ची सडक़ पर रोकना पड़ा। बीच में नदी व गांव तक जाने के लिए रास्ता न होने के कारण एंबुलेंस घर तक नहीं जा सका।

घर तक एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर परिजन की चिंता बढ़ गई। परिजन ने महिला को झेलगी में टांग कर उसे एंबुलेंस तक लाया। इसके बाद एंबुलेंस चालक विजय ने उसे इलाज के लिए कमलेश्वरपुर स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाया।


गांव तक जाने का नहीं है रास्ता
सरगुजा में ऐसे कई ग्रामीण क्षेत्र हैं जो पहुंच विहीन है। मैनपाट के मछली नदी पर पुल का निर्माण नहीं होने के कारण इसके आस-पास का क्षेत्र टापू बन कर रह जाता है। बारिश के दिनों में तो लोग जिला मुख्यालय से कट जाते हैं। ग्राम करम्हा का भी ऐसा ही हाल है। सडक़ के नाम पर कच्ची सडक़ है जो गांव तक नहीं जाती है। बीच में मछली नदी होने के कारण रास्ता रूक जाता है। ऐसे में वहां के ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


इससे पूर्व भी कई मामले आ चुके हैं सामने
मैनपाट ब्लाक का कई ऐसे पंचायत हैं जो पहुंचविहीन हैं। बारिश के दिनों में लोगों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट जाता है। इस दूर्गम क्षेत्र पर किसी की नजर नहीं जाती है। न तो स्थानीय जप्रतिनिधि, न विधायक और न ही मंत्री इस ओर ध्यान देते हैं। आजादी के बाद से इन गांवों की हालत जस की तस है। इससे पूर्व भी स्वास्थ्य, सडक़ व आवागमन का साधन न होने के कारण यहां के लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।

दो किमी पैदल चल कर एंबुलेंस तक पहुंची गर्भवती
रविवार को एक और मामला सामने आया है। दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम पसेना पानी का है। 34 वर्षीय महिला फूलमनिया पति बसंत गर्भवती है। महिला रविवार को प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। महिला के परिजन उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए महतारी एक्सप्रेस को फोन किया।

एंबुलेंस तो पहुंचा पर यहां भी गांव तक जाने के लिए रास्ता नहीं है। गांव पहुंचविहीन होने के कारण एंबुलेंस चालक पीडि़त के घर तक नहीं पहुंच पाया और उसे घर से करीब दो किमी दूर ही एंबुलेंस को रोकना पड़ा। इस दौरान गर्भवती महिला को पैदल लेकर परिजन एंबुलेंस तक पहुंचे।

Show More
rampravesh vishwakarma Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned