बच्चों पर अपनी इच्छा न लादें खुद चुनने दें Subject- कमिश्नर

 बच्चों पर अपनी इच्छा न लादें खुद चुनने दें Subject- कमिश्नर
Students awarded by commissioner

होलीक्रास कान्वेंट स्कूल के 12वीं में मेरिट आने वाले विद्यार्थियों का कमिश्नर ने किया सम्मान, बच्चों को लक्ष्य हासिल करने टाइम मैनेजमेंट के दिए टिप्स

अंबिकापुर. जीवन में अच्छा बनने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें और लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुनियोजित तरीके से प्रयास करें। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगन और समर्पण आवश्यक है।

उक्त बातें शुक्रवार को कमिश्नर टीसी महावर ने स्थानीय होलीक्रास कान्वेन्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दसवीं एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षा में मेरिट में आने वाले छात्र-छात्राओं के सम्मान में आयोजित समारोह में कही। उन्होंने मेरिट में आने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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कमिश्नर ने कहा कि जीवन में कुछ अच्छा हासिल करने के लिए सबसे पहले उस बारे में सर्वश्रेष्ठ तरीके से सोचना होगा और लक्ष्य निर्धारित कर वहां तक पहुंचने के लिए समय का प्रबंधन बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय के साथ ही स्वयं का प्रबंधन करना भी जरूरी है। अपने से मिलने वालों के साथ मैनेजमेण्ट भी एक कला है।

उन्होंने कहा कि यह भी संकल्प लें कि आज जो अच्छा किया है, कल उससे और बेहतर करेंगे। कमिश्नर ने अभिभावकों से कहा कि वे अपने बच्चों की प्रतिभा को पहचाने और उसी के अनुरूप उन्हें विषय चुनने का अधिकार दें। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि विषय चयन में अपनी इच्छा को बच्चों पर न थोपें तथा उन पर दबाव न बनाएं। उन्होंने कहा कि हर बच्चे की अलग-अलग प्रतिभा होती है इसलिए उनकी प्रतिभा के अनुरूप भी उन्हें कॅरियर निर्माण में सहयोग करें।

कमिश्नर ने इस अवसर पर होलीक्रास कान्वेन्ट सेकेंडरी स्कूल के बारहवीं बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 28 विद्यार्थियों और दसवीं बोर्ड के 57 विद्यार्थियों को 9 सीजीपीए से और 11 विद्यार्थियों को 10 सीजीपीए के प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया तथा उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर होलीक्रास कान्वेन्ट सेकेण्ड्री स्कूल की प्राचार्य डॉ. सिस्टर उषा एंटोनी, विद्यार्थी, अभिभावक और स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थीं।

सोने से पहले गलतियों को करें याद
कमिश्नर ने कहा कि सोने के पहले कुछ क्षण यह भी विचार करें कि आज मुझसे क्या-क्या गलतियां हुई हैं। ऐसे पांच गलतियों को तलाशें और उन्हें भविष्य में नहीं दोहराने का संकल्प लें । इसके साथ ही दूसरे दिन पांच अच्छे कार्य क्या-क्या किया जाना है उनका भी निर्धारण करें और दूसरे दिन उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास करें।

माता-पिता पहले गुरू
महावर ने कहा कि माता-पिता प्रथम गुरू होते हैं। जिस तरह खदान से निकले पत्थरों से हीरे की तलाश करते हैं, उसी तरह प्रथम गुरू तथा विद्यालय के गुरू मिलकर अपने बच्चों में छिपी प्रतिभा को उभारकर उसे प्रतिभाशाली बनाने में सहयोग करें ताकि उसे दुनिया याद रखे।

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