Toilet निर्माण में गड़बड़ी का भंडाफोड़! रुपए डकारने चल रहा है इस तरह का खेल

नगर निगम के अधिकारी, ठेकेदार व जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से चल रहा अनोखा खेल, शौचालय के ऊपर भी बना दिए गए शौचालय, पार्षद पति सहित एक ही घर में बनाए कई शौचालय

अंबिकापुर. स्वच्छ भारत मिशन में शौचालयों में भी सेटिंग का खेल कुछ ऐसा चल रहा है कि पत्रिका के खुलासे से आप भी चौंक जाएंगे। शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाली शासकीय राशि को डकारने कंस्ट्रक्शन एजेंसी से लेकर विभागीय अधिकारी बड़ा खेल रच रहे हैं। जब हमने पूरे मामले की पड़ताल की तो संभाग मुख्यालय में चल रहे इस खेल का भंडाफोड़ हो गया।

शहर के निगम क्षेत्र अंतर्गत आने वाले एक वार्ड में निर्माण एजेंसी, पार्षद व जोन इंजीनियर की जुगलबंदी कुछ ऐसी है कि यहां कई घरों में शौचालय के ऊपर ही शौचालय बना दिए हैं। यही नहीं एक घर में रहने वाले तीन सदस्यों को अलग-अलग स्थान पर रहना बताकर उनके नाम पर कागजों में शौचालय बना दिए गए हैं, ताकि शासकीय राशि का आहरण किया जा सके।

आश्चर्य की बात ये है कि स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना के साथ खिलवाड़ शहर में ही चल रहा है, जिसकी मॉनिटरिंग खुद कलक्टर ही कर रहे हैं।

स्वच्छ भारत मिशन में शौचालय निर्माण के नाम पर लाखों रुपए की हेराफेरी का खेल अंबिकापुर नगर निगम में इंजीनियर, ठेकेदार व जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से किया जा रहा है। कहने को तो शहर के प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण नगर निगम द्वारा करा दिया गया है और इसपर केंद्रीय टीम ने निरीक्षण के बाद ओडीएफ की मुहर भी लगा दी गई है।

लेकिन वार्डों में जहां शौचालय निर्माण की जरूरत भी नहीं है, वहां भी निर्माण करा दिया गया है। कागजों में शौचालय निर्माण का काम पूर्ण दिखा दिया गया है। इसका अंदाजा शहर के किसी एक वार्ड में पहुंचने के बाद वहां कराए गए शौचालय निर्माण को देखने  के बाद हो जाता है।

वार्ड क्रमांक 18 रैदास वार्ड में शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी मेसर्स दाई कंस्ट्रक्शन को दी गई थी। कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक खुद उस वार्ड के पार्षद के पति है। इसकी वजह से जहां मन किया वहां उनके द्वारा शौचालय का निर्माण करा दिया गया है। इस संबंध में कई बार वार्ड के लोगों ने निगम में इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत भी की लेकिन उनकी किसी ने भी नहीं सुनीं।

पूरे वार्ड में मनमानी तरीके से शौचालय का निर्माण कराकर सरकार द्वारा आबंटित रुपए का बंदरबाट कर लिया गया और किसी ने इसकी सुध तक नहीं ली। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों से मिलीभगत कर केवल बट्टा लगाया जा रहा है।

एक शौचालय के ऊपर करा दिया दूसरा निर्माण
योजना के तहत प्रत्येक घर में जहां शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। वहां आवेदन प्राप्त होने पर निगम द्वारा शौचालय का निर्माण किया जाना था। इसके लिए निगम द्वारा ठेकेदार को 20 हजार रुपए का भुगतान करता है। पूरा खेल इसी राशि के लिए रचा जा रहा है। रैदास वार्ड के पार्षद गली में सानमतिया चेरवा जो अनपढ है, उसके घर में पहले से ही शौचालय का निर्माण किया गया था।

लेकिन निगम के अधिकारियों से मिलीभगत कर ठेकेदार द्वारा सानमतिया के घर में पहले से बने शौचालय के ऊपर ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक और शौचालय का निर्माण करा दिया गया है। यहां तक  तो ठीक  है, लेकिन जोन इंजीनियर द्वारा इसका वेरिफिकेशन करते हुए शौचालय निर्माण का भुगतान भी करा दिया गया। जबकि नियमानुसार पूर्व में जहां शौचालय का निर्माण हो चुका है, वहां शौचालय का निर्माण नहीं किया जाना है।

पार्षद के घर में बन गया शौचालय
शौचालय निर्माण के लिए कुछ लोगों के अभिभावकों का नाम बदलकर एक ही घर में कई शौचालय का निर्माण करा दिया गया है। खुद वार्ड के पार्षद जिनके पति के नाम पर दाई कंस्ट्रक्शन कंपनी है उनके नाम पर घर में शौचालय निर्माण सूची में दिखाया गया है। इसके साथ ही उनकी माताजी के नाम पर भी शौचालय निर्माण किया जाना बताया जा रहा है,

जो पूरी तरह से नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। नियमानुसार पार्षद रहते हुए उनके परिवार का कोई भी सदस्य निगम से लाभ नहीं ले सकता है। लेकिन पार्षद पति धर्मेन्द्र ताम्रकार द्वारा शौचालय निर्माण का काम लेकर जमकर अधिकारियों के साथ मिलकर घालमेल किया गया।

पिता व बेटे के नाम पर हो गया निर्माण
रैदास वार्ड में शौचालय निर्माण के नाम पर भारी गड़बड़ी की गई है। वार्ड में एक ही घर में पिता, पुत्र व पत्नी के नाम पर ही शौचालय निर्माण करा दिया गया है। ऐसा एक घर में नहीं, बल्कि रैदास वार्ड में कई घरों में इसी तरह से शौचालय का निर्माण कराया गया है। निगम द्वारा रैदास वार्ड में शौचालय निर्माण की जो सूची जारी की गई है उसमें तीसरे नंबर पर लालचंद गुप्ता का नाम दर्ज है, जिनके घर में शौचालय निर्माण निगम द्वारा योजना के तहत कराया गया है।

वहीं सूची में ही 8 वें नम्बर पर उनके छोटे बेटे बृजेश गुप्ता के नाम पर शौचालय निर्माण दिखाया गया है। जबकि बृजेश आज भी अपने पिता के साथ उसी घर में रहता है। इसी प्रकार पहली सूची के 56 वें नम्बर पर देवेश्वर सिंह का नाम शौचालय निर्माण कराए जाने में अंकित हैं और उन्हीं की मां गीता बाई का नाम दूसरी सूची के पहले नम्बर पर अंकित है।

निरीक्षण पर नहीं जाते हैं इंजीनियर
शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी जिन इंजीनियरों को निगम द्वारा दी गई है। उनके द्वारा कभी भी वार्ड में निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने नहीं जाया जाता है। इसकी वजह से हमेशा निर्माण करने वाले ठेकेदार द्वारा मनमानी तरीके से कहीं भी निर्माण कर दिया जा रहा है। निगम इंजीनियरों की लापरवाही की वजह से शासन की इतनी महत्वकांक्षी योजना महज कागजों तक सिमटकर रह गई है।

इस संबंध में जब पत्रिका की टीम द्वारा रैदास वार्ड के प्रभारी इंजीनियर से बात की गई उन्हें इस प्रकार के शौचालय निर्माण की कोई जानकारी ही नहीं थी,उन्होंने टीम से जानकारी लेनी शुरू कर दी। निगम के इंजीनियर अगर ठीक से वार्डों में जाकर मॉनीटरिंग करते तो शायद इतनी बड़ी गड़बड़ी नहीं होती। सामान्य सभा की बैठक में अक्सर यह बात भी सामने आ चुकी है कि इंजीनियर निर्माण कार्यों को देखने मौके पर नहीं जाते, सिर्फ कार्यालय में बैठकर पूरे काम का आंकलन कर लिया जाता है।
 
कराई जाएगी जांच
ऐसी कोई बात है तो वार्ड में जांच कराई जाएगी।
डा. अजय तिर्की, महापौर

शौचालय रहते दूसरा बनवाना गलत
पूर्व से अगर शौचालय निर्माण है तो वहां फिर से शौचालय निर्माण नहीं किया जाना है। एक शौचालय के ऊपर दूसरा निर्माण कराया जाना गलत है। निगम द्वारा जो भी शौचालय निर्माण कराया गया है, उसकी जांच इंजीनियर द्वार करने के बाद ही भुगतान किया जाता है। मामले की जांच कराई जाएगी।
प्रमोद दुबे, ईई नगर निगम

जांच के बाद हुआ है भुगतान
निगम द्वारा वार्ड में जहां भी शौचालय निर्माण कराया गया है। उसकी जांच करने के बाद ही ठेकेदार को भुगतान किया गया है। अगर ऐसी कोई गड़बड़ी है तो इसकी जांच एक बार फिर से मेरे द्वारा की जाएगाी।
सतीश रवि, जोन इंजीनियर, रैदास वार्ड नगर निगम
Pranayraj rana
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