फोन करने पर नही मिली संजीवनी तो बस से 17 वर्षीय बेटी को लेकर अस्पताल पहुंचे माता-पिता, ओपीडी कक्ष के सामने ही तोड़ दिया दम

Chhattisgarh Government: पूरे संभाग में चौपट हो गई है संजीवनी १०८ की सेवा, इमरजेंसी केस के मरीजों की आफत में पड़ गई है जान

By: rampravesh vishwakarma

Published: 03 Jan 2020, 09:05 PM IST

अंबिकापुर. जिले में संजीवनी 108की स्थिति काफी कंडम है। समय पर एंबुलेंस का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। संजीवनी 108 नहीं मिलने से एक बीमार किशोरी को समय पर अस्पताल नहीं लाया गया और उसकी मौत हो गई। परिजन ने बुधवार को किशोरी को अस्पताल ले जाने के लिए संजीवनी 108 पर फोन कर बात की।

कंट्रोल द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध न होने का हवाला देकर सेवा देने से इंकार कर दिया। काफी पहुंचविहीन क्षेत्र होने के कारण कोई साधन नहीं मिला। शुक्रवार को यात्री बस से किशोरी को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। यहां पहुंचते ही ओपीडी के बाहर किशोरी अचानक गिर गई और उसकी मौत हो गई।


सूरजपुर जिले के चंदौरा थाना क्षेत्र के ग्राम धुमाडांड़ निवासी 17 वर्षीय दुर्गावती पिता रामबलिंदर काफी दिनों से बीमार चल रही थी। चार वर्ष से वह सांस की बीमारी से परेशान थी। तीन दिन पूर्व उसे उल्टी-दस्त व बुखार हुआ था। परिजन ने उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाने बुधवार को संजीवनी 108 पर फोन कर बात किया। लेकिन कंट्रोल द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध न होने का हवाला देकर सेवा देने से इंकार कर दिया।

दूसरे दिन गुरुवार को भी परिजन ने 108 पर फोन कर बात की। फिर भी उसे सेवा नहीं मिल पाई। एंबुलेंस की सेवा न मिलने पर परिजन शुक्रवार की सुबह यात्री बस से अंबिकापुर बस स्टैंड लेकर उसे लेकर पहुंचे। यहां से उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लाए। यहां किशोरी अस्पताल के पास ऑटो से उतर कर पैदल अस्पताल के अंदर गई। इधर परिजन ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची कटा रहे थे।

पर्ची कटाने के बाद परिजन किशोरी का लेकर चिकित्सक कक्ष में जा रहे थे। इस दौरान किशोरी अचानक गिर गई। किशोरी के गिरने की सूचना पर चिकित्सक कक्ष से बाहर निकले और उसकी स्वास्थ्य जांच की। जांच के दौरान चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।


पहुंचविहीन क्षेत्र है धुमाडांड़
परिजन ने बताया कि सूरजपुर जिले के चंदौरा थाना क्षेत्र के ग्राम धुमाडांड़ काफी पहुंचविहीन क्षेत्र है। अच्छी सडक़ न होने के कारण कोई साधन नहीं मिलता है। दिन में केवल एक यात्री बस धुमाडांड़ से अंबिकापुर आती है। कोई साधन न होने के कारण किशोरी को इलाज के लिए समय पर अस्पताल नहीं ला पाए। परिजन का कहना है कि समय पर इलाज न होने के कारण किशोरी की मौत हो गई।


कुछ दिनों से ज्यादा बिगड़ गर्इं हैं 108 की सेवाएं
पूर्व में संजीवनी 108 का संचालन जीवीके कंपनी द्वारा किया जा रहा था। इसका अनुबंध समाप्त होने पर शासन द्वारा दूसरी कंपनी को संजीवनी 108 की सेवा दे दी गई है।

दूसरी कंपनी जय अंबे द्वारा लगभग दो माह से संजीवनी 108 की सेवा दी जा रही हे। लेकिन मरीजों को समय पर एंबुलेंस न मिलने की समस्याएं लगातार आ रहीं हंै। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर-बिलासपुर रेफर मरीजों को 108 द्वारा नहीं ले जाया जा रहा है।


इतनी महत्वपूर्ण सेवा, फिर भी लापरवाही
संजीवनी 108 की सेवा इमरजेंसी केस के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण है। इतने दिन से संजीवनी 108 वाहनों की व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। अधिकांश वाहन कंडम हो चुके हैं, सडक़ दुर्घटना सहित आकस्मिक स्थिति में मरीजों को संजीवनी 108 की सेवा नहीं मिल पा रही है।

मरीजों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, देर होने की वजह से उनकी जान आफत में पड़ रही है, इसके बावजूद शासन स्तर पर इस इमरजेंसी सेवा की स्थिति में सुधार लाने कोई पहल नहीं की जा रही है।


मौत की जानकारी नहीं
संजीवनी नहीं मिलने से किशोरी की मौत की घटना की जानकारी अभी मुझे नहीं है। क्षेत्र के बीएमओ से जानकारी लेता हूं। अभी जिले में 6 संजीवनी 108 एंबुलेंस संचालित हैं।
डॉ. आरएन सिंह, सीएमएचओ, सूरजपुर

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