दादू कोई कुख्यात अपराधी नहीं, फिर भी बेडिय़ों से जकड़े हैं उसके हाथ-पैर

ग्राम पंचायत पाराडोल निवासी दादू सामान्य व्यक्ति की तरह लोगों से करता है बात, घरवालों का मानना दिमागी हालत ठीक नहीं

By: rampravesh vishwakarma

Updated: 09 Dec 2017, 03:30 PM IST

बैकुंठपुर. दादू कोई अपराधी नहीं है फिर भी पिछले 5 साल से उसके हाथ-पैर बेडिय़ों से जकड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है लेकिन वह सामान्य व्यक्ति की तरह बात कर रहा था। घरवालों का मानना है कि बीच-बीच में उसकी दिमागी हालत खराब होती है तो वह मारपीट करने लगता है।

इसी डर से उसे बेडिय़ों से जकड़ दिया गया है। पत्रिका संवाददाता को जब व मिला तो इस कड़कड़ाती ठंड में उसके बदन पर मात्र 2 तौलिया था। 10 दिसंबर को राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस है लेकिन दादू को इन बेडिय़ों से कौन मुक्ति दिलाएगा ताकि वह भी सामान्य जीवन जी सके।


कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ स्थित साईं बाबा तिराहा पर शुक्रवार की शाम 7.30 बजे एक 28 साल का ग्रामीण मिला। जिसे देखकर ऐसा लगा जैसे कि कोई कुख्यात अपराधी हो। क्योंकि ग्रामीण के हाथ-पैर बेडिय़ों से जकड़े हुए थे। जब हमने उससे पूछा तो अपना नाम दादू और ग्राम पाराडोल का रहने वाला बताया।

यह गांव मनेंद्रगढ़ विकासखंड में आता है। एक सामाजिक कार्यकर्ता उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर खेडिय़ा टॉकीज के पास ले गया और नाश्ता कराया। इस दौरान जंजीर से जकड़े ग्रामीण ने सरगुजिया भाषा में बात कर कुछ जानकारी दी।

 

Dadu

दादू ने सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत सिंह को बताया कि उसकी दिमागी हालत कुछ ठीक नहीं रहती है। गांव के लोग बोलते हैं कि दौरा पडऩे पर मारपीट करता है। इससे परिवार के लोग करीब 5 साल से हाथ-पैर में जंजीर डाल दिया है। वह यह नहीं बता पाया कि मनेंद्रगढ़ कैसे पहुंचा। मनेंद्रगढ़ से पाराडोल की दूरी करीब 13 किलोमीटर है।

मामले में सामाजिक कार्यकर्ता ने युवक को उसके घर पहुंचाने के लिए झगराखांड़ व मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी को फोन कर मदद मांगी, लेकिन एक घंटे तक कहीं से कोई मदद नहीं मिली। सामाजिक कार्यकर्ता रात करीब 9 बजे नाश्ता कराने के बाद कॉलेज तक पाराडोल जाने वाले रास्ते में छोडऩे गए, तब युवक बोला अब मैं अपने घर चला जाऊंगा।

इसके बाद कड़कड़ाती ठंड में युवक सड़क मार्ग को पकड़कर अपने गांव-घर की ओर चल पड़ा। फिर उसकी कोई जानकारी नहीं है।


कड़कड़ाती ठण्ड में बदल पर सिर्फ दो तौलिया
पाराडोल निवासी दादू कड़कड़ाती ठण्ड में अपने पास सिर्फ तौलिया रखा था। वहीं उसके हाथ-पैर जंजीर से जकड़े हुए थे। वह अपने हाथ-पैर को नहीं मिला सकता है। कभी-कभी उसे जंजीर के कारण काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। किसान परिवार का होने के कारण जैसे-तैसे कहीं अस्पताल और कहीं जड़ी बूटी से इलाज करा रहे हैं। परिवार के लोग थोड़ी बहुत ठीक होने की आस पर मिलने पहुंच जाते हैं।


मानव अधिकार के संरक्षण-संवर्धन पर कल होगी शपथ
कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा ने बताया कि राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस 10 दिसंबर को मनाया जाना है। लेकिन मानव अधिकार दिवस के दिन अवकाश होने के कारण 11 दिसंबर मनाया जाएगा। इस दौरान सुबह 11 बजे मानव अधिकारों के संरक्षण व संवर्धन की शपथ ली जाएगी।

rampravesh vishwakarma Desk
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