पैरों से 10वीं बोर्ड की परीक्षा लिखेगा महेश, कहा- दिव्यांग हूं, लाचार नहीं, शिक्षक बनना है सपना

Divyang Mahesh: दिव्यांग छात्र (Divyang student) कर रहा 10वीं बोर्ड (10th board) की तैयारी, महेश का कहना है कि परिवार (Family) व शिक्षकों का मिलता है भरपूर सहयोग

By: rampravesh vishwakarma

Published: 28 Jan 2021, 01:34 PM IST

अंबिकापुर. महेश! एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही जज़्बे की झलक दिखती है। डिगमा हाई स्कूल में पढऩे वाले इस छात्र ने अपनी शारीरिक अक्षमता को जीवन पर हावी नहीं होने दिया। "महेश" बगैर हाथों के 10वीं की परीक्षा की तैयारी कर रहा है। वह पैरों से लिखकर परीक्षा (Exam) के लिए खुद को तैयार कर रहा है।


शहर से लगे ग्राम डिगमा निवासी 15 वर्षीय महेश सिंह बचपन से दिव्यांग है। उसका एक हाथ नहीं है। दूसरा हाथ अविकसित है। फिऱ भी ऐसा जुनून है कि जन्म से हाथ नहीं होने के बावजूद उसने नौवीं तक की पढ़ाई पूरी कर ली है।

महेश डिगमा के स्थानीय हायर सेकेंडरी स्कूल में 10वीं का छात्र है। वर्तमान में कोरोना की वजह से स्कूल बंद होने से मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई (Online class) कर रहा है। महेश शिक्षक बनना चाहता है।


पैरों से कॉपी पर लिखकर करता है तैयारी
महेश दोनों हाथों से दिव्यांग (Divyang Mahesh) होने की वजह से लिख नहीं पता है। ऐसे में उसे पढ़ाई में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इस पर बचपन से ही उसने काम करना शुरू किया। अब वह कॉपी पर पैर से लिखता है। लिखावट भी ऐसी, जैसे किसी ने हाथों से लिखा हो।


शिक्षक बनना है सपना
मुझे बड़ा होकर शिक्षक बनना है। बोर्ड (10th board) परीक्षा की तैयारी कर रहा हूँ। मैं सशक्त हूँ। हाथ सही नहीं हैं तो क्या हुआ, पैर तो सलामत हैं।
महेश सिंह, छात्र

rampravesh vishwakarma Desk
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