लापरवाही से खून चढ़ाने से 12 वर्षीय बालिका की हो गई थी मौत, डॉक्टर के खिलाफ अपराध दर्ज

FIR on Doctor: बालिका की मौत के बाद पिता ने निजी अस्पताल (Private hospital) के डॉक्टर के खिलाफ कोतवाली व सीएमएचओ (CMHO) से की थी शिकायत, बिना पंजीयन (Without Registration) डॉक्टर कर रहा था इलाज

By: rampravesh vishwakarma

Published: 17 Jul 2021, 07:06 PM IST

अंबिकापुर. दिसंबर 2020 में निजी अस्पताल के डॉक्टर की लापरवाही (Doctor Negligence) व गलत ढंग से ब्लड चढ़ाने के कारण एक बालिका की मौत हो गई थी। बच्ची के पिता ने इसकी शिकायत कोतवाली व सीएमएचओ से की थी। इस मामले में जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा टीम गठित कर जांच कराई गई।

जांच में पाया गया कि आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा बिना पंजीयन के ही डॉक्टर इलाज कर रहा था व ब्लड गलत तरीके से चढ़ाने से बच्ची की मौत हुई है। मृत बच्ची के पिता की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान परीक्षण अधिनियम 1987 की धारा 24 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

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सूरजपुर जिले के प्रतापपुर कदमपारा निवासी अमरेश कुमार दुबे ने 9 दिसंबर 2020 को अपनी 12 वर्षीय बेटी अदिति दुबे की तबियत खराब होने पर इलाज के लिए अंबिकापुर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां पर पदस्थ डॉक्टर आशीष जायसवाल द्वारा बच्ची का इलाज किया गया।

बच्ची को खून की कमी व सिकल सेल से पीडि़त होने पर डॉक्टर द्वारा ब्लड चढ़ाने की सलाह दी गई। परिजन ब्लड चढ़वाने के लिए तैयार हो गए। ब्लड चढ़ाने के कुछ देर बाद बच्ची की तबियत बिगड़ गई और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। बच्ची को ऑक्सीजन लगाया गया।

तबियत में कुछ सुधार होने पर उसे पुन: डॉक्टर ने वही ब्लड चढ़ाना शुरु कर दिया। इसके बाद बच्ची की और ज्यादा तबियत बिगड़ गई। बच्ची का शरीर पूरी तरह से काला पड़ गया। इस स्थिति में डॉक्टर ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए वहां से रेफर कर दिया।

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रांची अस्पताल में ली अंतिम सांस
डॉक्टर द्वारा रेफर करने के बाद परेशान परिजन ने बेटी को इलाज के लिए शहर के ही दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां चिकित्सकों ने बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए बाहर रेफर कर दिया। परिजन 11 दिसंबर 2020 को बेटी को लेकर रांची पहुंचे। यहां इलाज चल ही रहा था कि 12 दिसंबर की उसकी मौत हो गई।

बच्ची की मौत के बाद उसके पिता अमरेश दुबे ने डॉक्टर आशीष जायसवाल पर इलाज में लापरवाही व गलत तरीके से ब्लड चढ़ाने का आरोप लगाया था। उसने इसकी शिकायत सीएमएचओ व कोतवाली में की थी।

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जांच के बाद अपराध दर्ज
सीएमएचओ द्वारा जांच के लिए टीम का गठन किया गया था। जांच में पाया गया कि डॉक्टर द्वारा आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा बिना पंजीयन के ही मरीजों का इलाज किया जा रहा था।

वहीं बच्ची की मौत मामले में इलाज में लापरवाही व गलत तरीके से ब्लड चढ़ाने का मामला सामने आया था। जांच में डॉक्टर के दोषी पाए जाने पर कोतवाली में डॉक्टर के खिलाफ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान परीक्षण अधिनियम 1987 की धारा 24 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

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