सीएम से की करोड़ों के हैंडपंप घोटाले की शिकायत, कागजों में ही खनन, गहराई में खेल कर निकाली पूरी राशि

Handpump Scam: सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी से हुआ खुलासा, आरटीआई एक्टिविस्ट (RTI Activist) ने की पीएचई विभाग (PHE department) के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग

By: rampravesh vishwakarma

Published: 11 Jun 2021, 12:13 AM IST

अंबिकापुर. सरगुजा जिले में पीएचई विभाग का बड़ा कारनामा सामने आया है। दरअसल कागजों पर प्रदर्शित अधिकांश नलकूप खनन मौके पर किए ही नहीं गए। वहीं जहां हुए वहां गहराई व केसिंग में खेल कर बिल लगाकर पूरी राशि निकाल ली गई है। (Scam)

2016-17 व 2017-18 में नलकूप खनन में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी कर करोड़ों का भुगतान किया गया है। इसका खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता डीके सोनी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई जानकारी से हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता ने पूरे मामले की शिकायत कमिश्नर, कलक्टर व मुख्यमंत्री से की है।


आरटीआई कार्यकर्ता डीके सोनी ने शिकायत आवेदन में बताया है कि पीएचई के कार्यपालन अभियंता से सूचना के अधिकार के तहत वर्ष 2016-2017 एवं 2017-18 में खनित नलकूपों के संबंध में जानकारी की मांग की गई थी। इसे सूचना के अधिकार के तहत देने में जन सूचना अधिकारी को परेशानी हो रही थी क्योंकि उपरोक्त नलकूप खनन में काफी घोटाला किया गया था।

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इस कारण उक्त जानकारी प्राप्त करने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा तब जाकर जानकारी प्रदान की गई। इसके बाद कार्यपालन अभियंता द्वारा जो जानकारी सूचना के अधिकार के तहत प्रदान की गई। उसमें एक सूची प्रदान की गई जिसमें वर्ष 2016-17 एवं 17-18 में जितने भी नलकूप खनन हुए हैं, उसमें ग्राम का नाम, पंचायत का नाम, ब्लॉक एवं लोकेशन कहां पर खनन हुआ है तथा कैटेगिरी तथा कितनी गहराई खोदा गई है।

केसिंग पाइप कितनी लगी है, पीवीसी, जीआई की जानकारी, तथा कौन ड्राई हुआ कि जानकारी के अलावा लागत राशि, स्टीमेट की राशि एवं भुगतान की राशि का उल्लेख किया गया है। उक्त दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2016-17 में 3 करोड़ 40 लाख 95 हजार 239 रुपए एवं वर्ष 2017-18 में 2 करोड़ 95 लाख 83 हजार 825 रुपए का भुगतान बिना जांच पड़ताल किए ही किया गया है। क्योंकि उक्त कार्य में अच्छा-खासा कमीशन सेट था।

जिस कार्य की सूची प्रदान की गई है, उसमें वर्ष 2016-17 में 321 नलकूप खनन था वर्ष 17-18 में 319 नलकूप खनन होना बताया गया है। दोनों वर्ष का कुल 640 नलकूप खनन होना बताया गया है। जबकि वास्तव में विभाग द्वारा पूरे 640 नलकूप खनन नहीं किए गए हंै। इसमें अधिकांश नलकूप खनन हुए ही नहीं हैं तथा जो हुए हैं उसमें निर्धारित गहराई तक खुदाई नहीं की गई है। कम खुदाई कर उसमें ज्यादा का बिल लगाकर राशि निकाल ली गई है।

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इसके अलावा गलत केसिंग का भी उल्लेख कर उसका भी बिल वाउचर लगाकर उसकी भी राशि निकाल ली गई है। जहां पर केसिंग कम लगा वहां पर केसिंग ज्यादा दर्शा कर राशि निकाली गई है। इसमें सबसे बड़ी बात यह भी है कि कुछ नलकूप दूसरे योजनाओं से एवं अन्य विभागों द्वारा खनन कराया जाता है।

उसी नलकूप का अपने विभाग द्वारा खनन बताकर उसका बिल वाउचर लगाकर विभाग द्वारा उसकी राशि निकाली गई हैए जिसका मौके पर भौतिक सत्यापन से प्रमाणित हो जाएगा। शिकायत में डीके सोनी द्वारा मांग की गई है कि जांच कराकर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध शासकीय राशि का संयुक्त रुप से मिलीभगत कर गबन करने के संबंध में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। साथ ही राशि की वसूली संलग्न अधिकारियों से की जाए।

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200 से 300 नलकूप खनन का हुआ कार्य
आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि विभाग द्वारा जितनी संख्या में नलकूप का खनन बताया जा रहा है, उतने का खनन नहीं किया गया है जिसका भी भौतिक सत्यापन शिकायतकर्ता के साथ मौके पर कराने से स्थिति साफ हो जाएगी क्योंकि विभाग द्वारा 640 में से ज्यादा से ज्यादा 200-300 ही खनन कराया गया है। बाकी नलकूप खनन का फर्जी बिल वाउचर बनाकर पूरी राशि निकाल ली गई है।


गहराई में इस तरह का खेल
नलकूप खनन घोटाले में नीचे स्तर के कर्मचारी भी शामिल हैं क्योंकि इनके द्वारा झूठी रिपोर्ट नलकूप खनन के संबंध में विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर दी जाती है। अगर खुदाई हुई भी है तो जहां 90 मीटर खुदाई हुई है वहां 135 दर्शा दिया गया है, जहां 50 मीटर की खुदाई हुई है वह 90 मीटर की खुदाई बताई गई है।

जहां 70 मीटर की खुदाई हुई है वहां दस्तावेज में 90 मीटर बताया गया है। इस तरह का खुदाई घोटाला अधिकारियों द्वारा किया गया है। इसी वजह से नलकूप खनन हेतु क्रय किए गए सामानों के बिलों की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत नहीं दी जा रही है। नलकूप खनन के संबंध में मेजरमेंट फर्जी तरीके से तैयार किया गया है।

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भंडार क्रय नियम का पालन नहीं
शासकीय विभाग द्वारा अगर कोई भी सामग्री क्रय की जाती है तो सीएसआईडीसी में पंजीकृत विक्रेता के माध्यम से खरीदी कराई जाती है या भंडार क्रय अधिनियम के तहत होती है। लेकिन नलकूप के सामानों को क्रय करने हेतु किसी तरह से भंडार क्रय नियम का पालन नहीं किया गया है और अधिकारियों कर्मचारियों के माध्यम से उक्त कार्य के सामग्रियों का बिल वाउचर लगाकर पूरी राशि निकाल ली गई है।


कई नलकूप हो गए ड्राई
जो नलकूप खनन हुआ है उसमें कई ड्राई हो गए हैं। उसकी भी राशि का भुगतान केसिंग के साथ हुआ है। अगर नियमत: कोई भी नलकूप ड्राई होता है तो उसमें केसिंग नहीं लगाई जाती है सिर्फ खनन की राशि का ही भुगतान होता है। लेकिन यहां पर अधिकारियों से मिलीभगत कर ड्राई वाले नलकूप खनन में केसिंग की राशि एवं अन्य राशियों का भी भुगतान फर्जी तरीके से मेजरमेंट करके भुगतान किया गया है।

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