Video: विकास की तस्वीर: झेलगी में ढोकर उफनती नदी पार कराई गई गर्भवती, एक पुल तक नहीं बना सकी सरकार

Health facility: नदी के दूसरी ओर खड़ी रही महतारी एक्सप्रेस, 2-3 किमी झेलगी पर ढोकर लाए परिजन, पार कराई घुनघुट्टा नदी

By: rampravesh vishwakarma

Published: 01 Aug 2020, 03:25 PM IST

अंबिकापुर. विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार तथा उसके क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को अपनी राजनीति चमकाने से फुरसत नहीं मिल रही है कि वे जनता की पीड़ा को देख सकें। चुनाव के समय तो बड़े-बड़े वादे ये जनता से करते हैं लेकिन जब जीतकर आते हैं तो उन्हें ही भूल जाते हैं।

जिले के कई गांव अभी भी मूलभूत सुविधाओं सडक़, पुल, पानी से जूझ रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को बीमारी के समय या प्रसव पीड़ा के दौरान उफनती नदी भी पार कर अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला मैनपाट विकासखंड से सामने आया है। (Health service)

शनिवार की सुबह प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को झेलगी में ढोकर परिजनों द्वारा उफनती नदी पार कराई गई। इसके बाद नदी के दूसरी ओर खड़ी महतारी एक्सप्रेस से उसे अस्पताल तक पहुंचाया गया।

करीब महीनेभर पूर्व ही स्वास्थ्य मंत्री, खाद्य मंत्री व कलक्टर ने बैठक लेकर जिले में स्वास्थ्य सुविधा पर जोर देकर कहा था कि झेलगी में ढोने की नौबत किसी को नहीं आने देंगे, लेकिन मैनपाट की ये तस्वीर तो कुछ और ही बयां करती है। (Health facility)

छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से मशहूर मैनपाट विकासखंड के कई गांव आजादी के बाद से आज तक मूलभूत सुविधाओं के मोहताज हैं। बारिश के दिनों में ये गांव मुख्यालय से पूरी तरह कट जाते हैं। गांव व मुख्यालय के बीच मछली नदी, घुनघुट्टा नदी पड़ती है जो बारिश के सीजन में उफनती रहती है।

पुल-पुलिया व सडक़ विहीन इन गांवों के लोग यदि बीमार पड़ जाते हैं या कोई महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती है तो परिजनों के सामने संकट खड़ा हो जाता है। फोन करने पर संजीवनी व महतारी एक्सप्रेस (Health facility) तो उपलब्ध हो जाती है लेकिन सडक़-पुल न होने से गांव से कोसों दूर ही उनके पहिए थम जाते हैं। ऐसे में बीमार या प्रसूता को वहां तक पहुंचाने परिजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

ताजा मामला विकासखंड के ग्राम कदनई से सामने आया है। यहां की ससीता नामक महिला को शनिवार की सुबह प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन द्वारा महतारी में फोन किया गया। महतारी एक्सप्रेस पहुंच तो गई लेकिन गांव से पहले पडऩे वाली उफनती घुनघुट्टा नदी पर पुल नहीं होने के कारण वह वहीं रुक गई।

इधर प्रसूता के परिजन महिला को करीब 2-3 किमी तक झेलगी में ढोकर लाए। उन्होंने उफनती नदी भी पार की और गर्भवती को महतारी एक्सप्रेस तक पहुंचाया। इसके बाद गर्भवती को वहां से 20 किमी दूर बतौली विकासखंड के शांतिपारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

मंत्री-कलक्टर ने चेताया था
करीब महीनेभर पूर्व सूबे के दिग्गज मंत्रियों व सरगुजा कलक्टर ने स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें चेताया था कि किसी भी बीमार या प्रसूता को झेलगी में ढोकर लाने की नौबत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को मुख्यालय में रहने के भी निर्देश दिए थे। इसके बावजूद प्रसूता को झेलगी में ढोकर लाना पड़ा।

Video: विकास की तस्वीर: झेलगी में ढोकर उफनती नदी पार कराई गई गर्भवती, एक पुल तक नहीं बना सकी सरकार

सडक़-पुल ही नहीं तो क्या करेंगे स्वास्थ्य कर्मी
बीमार या प्रसूता को अस्पताल तक लाने या घर तक छोडऩे वाहन तो उपलब्ध हैं लेकिन यदि सडक़ व पुल-पुलिया ही नहीं है तो स्वास्थ्य कर्मी भी क्या कर सकते हैं। सीतापुर-मैनपाट क्षेत्र से चार बार कांग्रेस के विधायक रह चुके अमरजीत भगत अब सूबे में खाद्य मंत्री हैं।

उन्होंने पिछले 15 सालों के कार्यकाल में पुल-सडक़ की ओर ध्यान ही नहीं दिया, ऐसे में आज भी उनके क्षेत्र के कई गांव मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। वहीं मंत्री का कहना है कि तीन बार विधायक रहा लेकिन सरकार दूसरी पार्टी की थी, अगले बार के बजट में यहां पुल-सडक़ स्वीकृत करा लिया जाएगा।

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rampravesh vishwakarma Desk
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