इस समाज की घड़ी घूमती है उल्टी दिशा में, यकीन न हो तो देख लें Video

वर्ष 1999 में बिलासपुर के कदमपारा में देखी गई थी ऐसी पहली घड़ी, समाज के अध्यक्ष का कहना-प्रकृति की दिशा में घूमती है घड़ी

By: rampravesh vishwakarma

Published: 11 Sep 2017, 04:13 PM IST

बैकुंठपुर. सरगुजा संभाग में रहने वाले गोंड़ समाज में अनोखी दीवार घडिय़ां देखने को मिल रही हैं। हम आपको प्रकृति के सबसे करीब रहने और उसकी पूजा करने वाले गोंडवाना समाज की अजूबा घड़ी का दर्शन कराएंगे। देखने में यह सामान्य घड़ी से थोड़ी अलग है क्योंकि यह घड़ी उल्टी दिशा में चलती है और घड़ी के कांटे भी उल्टी दिशा में घूमते है। इतना ही नहीं घड़ी में 1-12 तक के अंक भी उल्टे लिखे गए हैं। गोंडवाना समाज का मानना है कि यह घड़ी प्रकृति की दिशा में घूमती है और विज्ञान सम्मत भी है।


कोरिया जिले के बैकुंठपुर ओडग़ीनाका केनापारा निवासी इंजीनियर दीपक कुमार सिंह के घर में एक अजब-गजब दीवार घड़ी टंगी थी। इस घडिय़ों देखकर कोई भी व्यक्ति असंजस में पड़ सकता है। क्योंकि यह दीवार घड़ी सामान्य घड़ी की अपेक्षा उल्टी दिशा में घूमती है। हर घर में मिलने वाली सामान्य घड़ी बाएं से दाएं की दिशा में घूमती है, जबकि गोड़वाना समाज की घड़ी दायीं से बायीं दिशा में घूमती है।

गोड़वाना समाज की घड़ी की खास बात यह है कि 1-12 तक अंक भी उल्टे लिखे गए हैं। समाज के अनुसार वर्ष 1999 में बिलासपुर के कदमपारा निवासी समाज के एक परिवार में यह उल्टी खड़ी देखी गई थी। इस घड़ी को देखकर समाज के लोग देखकर असंजस में पड़ गए थे। मामले में गोड़वाना समाज के वरिष्ठ नागरिक और गोड़वाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरा सिंह मरकाम ने कहा था कि यह घड़ी उल्टी नहीं है, बल्कि प्रकृति की दिशा घूम रही है और विज्ञान सम्मत भी है।


संभाग के हर गांव में 5-10 ऐसी दीवार घड़ी
गोड़वाना समाज के लोगों का कहना है कि सरगुजा संभाग के पांच जिले कोरिया, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और जशपुर के हर गांव में ऐसी 5-10 दीवार घड़ी मिल जाएगी। क्योंकि इस घड़ी को महाराष्ट्र, इंदौर की कंपनी से बनवाई जाती है और डिमांड के आधार पर घड़ी की आपूर्ति की जाती है। मध्यप्रदेश के अमरकंटक में हर साल मकर संक्रांति को आयोजित होने वाले वृहद सम्मेलन में यह घड़ी बड़ी संख्या में उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में सरगुजा संभाग में 1.50 लाख से अधिक आदिवासी परिवार के घरों उल्टी दीवार घड़ी मिलने की बात कही जा रही है।


उल्टी घड़ी को लेकर ऐसी है मान्यता
गोड़वाना समाज की मान्यता है कि हमारे समाज की घड़ी प्रकृति की दिशा में चल रही है और विज्ञान के सम्मत भी है। क्योंकि सामान्य घड़ी प्रकृति के विपरीत चलती है। प्रकृति के फल, फूल, साग-सब्जी एंटी क्लॉक है। गोंडवाना समाज का कहना है कि गोंड़ समाज हमेशा से प्रकृति के करीब रहा है और प्रकृति की पूजा करता है। इसके अलावा आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन की भी पूजा करता है।

घड़ी की दिशा में समाज के कुछ कार्य
1. दाएं से बाएं की ओर हल जोतना।
2. शादी-ब्याह में दाएं से बाएं सात फेरे लेना।
3. दाएं से बाएं जांता से अनाज पीसना।


अब आने लगी कलाई घड़ी भी
गोड़वाना समाज के अनुसार घड़ी का निर्माण करने वाली कंपनी से चर्चा कर कुछ कलाई घड़ी भी मंगाई गई है। हालांकि कलाई घड़ी की संख्या कम है, धीरे-धीरे अधिक संख्या में उपलब्ध कराया जाएगा। भविष्य में कलाई और दीवार घड़ी की संख्या अधिक मात्रा में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

 

प्रकृति की दिशा में चलती है यह घड़ी
गोड़वाना समाज की दीवार घड़ी प्रकृति की दिशा में चलती है। क्योंकि आदिवासी समाज प्रकृति की सबसे करीब रहता है और प्रकृति की पूजा करता है। इसके अलावा यह घड़ी विज्ञान सम्मत भी है।
जयनाथ केराम, संभागीय अध्यक्ष, गोंगपा एवं सर्व आदिवासी समाज सरगुजा

rampravesh vishwakarma Desk
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