लॉकडाउन के साइड इफेक्ट: काम की आस में घंटों बैठने के बाद चेहरे पर मायूसी लिए लौट रहे दिहाड़ी मजदूर

Side effect of Lockdown: लॉकडाउन लगने से हर दिन कमाने-खाने वालों पर संकट, मजदूरों (Workers) का कहना हमलोग रोज कमाने खाने वाले हैं, काम नहीं मिलता तो चूल्हा नहीं जलता, हमारे पर नहीं होती जमा पूंजी

By: rampravesh vishwakarma

Published: 02 May 2021, 10:57 AM IST

अंबिकापुर. जिले मे कोरोना संक्रमण (Covid-19) काफी तेजी से फैल रहा है। कोरोना संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिले में 13 अपै्रल से लॉकडाउन (Lockdown) लगाया गया है। इसके बाद से शहर पूरी तरह बंद है। लॉकडाउन में पिछले 18 दिनों से दिहाड़ी मजदूरों (Migrant labourers) को काम नहीं मिल रहा है।

काम नहीं मिलने से दिहाड़ी मजदूरों के बीच आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। शासन द्वारा दिए जाने वाले राशन की मदद के भरोसे ही परिवार का भरण पोषण हो पा रहा है। लेकिन जिन मजदूरों के पास राशन कार्ड भी नहीं है। उनके परिवार व बच्चों को पेट भरना मुश्किल हो गया है।

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शहर व आस पास के क्षेत्रों से काफी संख्या में मजदूर शहर में आकर पल्लेदारी, भवन निर्माण कार्य सहित कई कामों में लग जाते थे। लेकिन लॉकडाउन (Lockdown) में सारे कार्य बंद होने के कारण इन्हें काम नहीं मिल पा रहा है।

पिछले कई दिनों से काम के जुगाड़ में सुबह-सुबह मजदूर शहर के गांधी चौक स्थित सर्किट हाउस के दीवार से लगे प्लेटफार्म पर बैठे नजर आते हैं।

इन मजदूरों से जब पत्रिका की टीम ने चर्चा की तो बताया कि काम की तलाश में हम यहां पहुंचते हैं पर काम नहीं मिल पा रहा है। लॉकडाउन के दौरान किसी दिन अगर काम मिल जाता है तो लगता है मानो भगवान से भेंट हो गया।

Workers waiting for work
IMAGE CREDIT: Labour

हम जैसे मजदूरों के पास जमा पूंजी नहीं रहती
मजदूरों का कहना है कि पिछले वर्ष भी लॉकडाउन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस वर्ष भी लॉकडाउन लगा दिया गया है। हम लोगों के पास कोई जमा पूंजी नहीं होती है कि उससे भरण पोषण करें। हमलोग रोज कमाने खाने वाले हैं। एक दिन अगर काम नहीं मिलता है तो शाम को चूल्हा जलना बंद हो जाता है।

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क्या कहते हैं दिहाड़ी मजदूर
शनिवार की सुबह लगभग 7 बजे गांधी चौक स्थित सर्किट हाउस (Circuit House) के दीवार से लगे फुटपाथ पर लगभग एक दर्जन से ज्यादा मजदूर बैठे थे। इस दौरान शहर के सतीपारा के एक मजदूर राममिलन ने कहा कि लॉकडाउन (Lockdown) में काम कभी-कभी मिलता है, नहीं मिलने पर वापस चले जाते हैं।

काम नहीं मिलने से आर्थिक परेशानी हो रही है। वहीं सकालो निवासी मोहन ने बताया कि काम की तलाश में आए हैं। दस बजे तक इंतजार करेंगे। नहीं मिलेगा तो घर लौट जाएंगे। लॉकडाउन की वजह से काम नहीं मिल रहा है। इससे परेशानी ज्यादा बढ़ गई है।

rampravesh vishwakarma Desk
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